ShippingCrisis – फारस की खाड़ी में फंसे जहाजों से ऊर्जा आपूर्ति पर चिंता
ShippingCrisis – पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत से जुड़ी समुद्री आपूर्ति को लेकर एक गंभीर स्थिति सामने आई है। सरकार ने जानकारी दी है कि ऊर्जा उत्पाद लेकर भारत की ओर आ रहे 10 विदेशी जहाज फिलहाल फारस की खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं, जबकि 18 भारतीय जहाज भी इसी इलाके में मौजूद हैं। कुल मिलाकर 28 जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति शृंखला पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

फंसे जहाजों में ऊर्जा संसाधनों का बड़ा हिस्सा
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, इन विदेशी जहाजों में एलपीजी, कच्चा तेल और एलएनजी जैसे अहम ऊर्जा संसाधन लदे हुए हैं। इनमें तीन जहाज एलपीजी, चार कच्चे तेल और तीन एलएनजी लेकर आ रहे हैं। दूसरी ओर, भारतीय ध्वज वाले जहाजों में भी गैस और तेल से जुड़े टैंकर शामिल हैं। यह स्थिति ऐसे समय पर सामने आई है जब ऊर्जा आपूर्ति पहले से ही संवेदनशील बनी हुई है और किसी भी बाधा का असर सीधे बाजार पर पड़ सकता है।
भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा पर नजर
अधिकारियों ने बताया कि भारतीय ध्वज वाले 18 जहाज जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में मौजूद हैं, जिनमें सैकड़ों नाविक सवार हैं। इसके अलावा कुछ जहाज पूर्वी हिस्से में भी हैं। इनमें एलपीजी, एलएनजी, कच्चा तेल, केमिकल और कंटेनर कार्गो ले जाने वाले जहाज शामिल हैं। हाल के दिनों में कुछ जहाज सुरक्षित रूप से इस क्षेत्र से निकलने में सफल रहे हैं, लेकिन अभी भी कई जहाज जोखिम वाले इलाके में फंसे हुए हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना मुख्य चुनौती
यह संकट मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के कारण उत्पन्न हुआ है, जो खाड़ी देशों से दुनिया भर में तेल और गैस आपूर्ति का प्रमुख मार्ग माना जाता है। क्षेत्र में जारी सैन्य गतिविधियों के चलते जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। हालांकि, ईरान की ओर से यह संकेत दिया गया है कि समन्वय के बाद गैर-विरोधी देशों के जहाजों को गुजरने की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।
सरकार की प्राथमिकता: सुरक्षित निकासी
जहाजरानी मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा हालात में सरकार का मुख्य ध्यान भारतीय जहाजों और उनमें सवार लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अधिकारियों के अनुसार, प्रयास किया जा रहा है कि भारत से जुड़े जहाजों को सुरक्षित मार्ग मिले और वे बिना किसी बाधा के जलडमरूमध्य पार कर सकें। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वय भी किया जा रहा है।
राहत की खबर: कुछ जहाज पहुंचे सुरक्षित
तनावपूर्ण हालात के बीच एक सकारात्मक पहलू भी सामने आया है। हाल ही में लगभग 94,000 टन रसोई गैस लेकर चल रहे दो एलपीजी जहाज सुरक्षित रूप से इस क्षेत्र से बाहर निकलने में सफल रहे हैं। उम्मीद है कि ये जहाज जल्द ही भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच जाएंगे। इससे यह संकेत मिलता है कि सीमित स्तर पर ही सही, लेकिन आवाजाही फिर से शुरू हो रही है।
बीमा लागत में तेज उछाल
इस संकट का असर केवल आपूर्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापारिक लागत भी तेजी से बढ़ रही है। जहाजों के लिए बीमा प्रीमियम में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पहले जहां यह प्रीमियम बहुत कम था, अब जोखिम बढ़ने के कारण इसमें कई गुना इजाफा हो चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसका असर ईंधन की कीमतों और आपूर्ति दोनों पर पड़ सकता है।
खाली जहाजों की वापसी पर फिलहाल रोक
मौजूदा हालात को देखते हुए सरकार ने खाली जहाजों को दोबारा इस क्षेत्र में भेजने का फैसला फिलहाल टाल दिया है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाती, तब तक नए जोखिम लेने से बचा जाएगा। यह कदम एहतियात के तौर पर उठाया गया है ताकि संभावित नुकसान को रोका जा सके।



