SupremeCourt – 30 साल पुराने तलाक विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला
SupremeCourt – सुप्रीम कोर्ट ने एक लंबे समय से चले आ रहे वैवाहिक विवाद को समाप्त करते हुए देशभर की अलग-अलग अदालतों में लंबित 61 मामलों पर रोक लगा दी और दंपती को तलाक की अनुमति दे दी। यह मामला वर्ष 1994 से चल रहा था और कई अदालतों में अलग-अलग पहलुओं पर सुनवाई हो रही थी। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुयान की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 का उपयोग करते हुए इस विवाद का अंतिम समाधान निकाला। अदालत ने माना कि दोनों पक्ष लंबे समय से अलग रह रहे हैं और अब इस संबंध को कानूनी रूप से समाप्त करना ही उचित है।

अनुच्छेद 142 के तहत लिया गया अहम फैसला
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पहले दोनों पक्षों की दलीलों को विस्तार से सुना और फिर उन्हें आपसी सहमति से समाधान निकालने का सुझाव दिया। अदालत की पहल पर दोनों के बीच बातचीत हुई, जिसके बाद तलाक की प्रक्रिया पर सहमति बनी।
पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह के मामलों में जहां विवाद लंबे समय से लंबित हो और संबंध पूरी तरह टूट चुके हों, वहां अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल न्याय सुनिश्चित करने के लिए किया जा सकता है। यह प्रावधान सुप्रीम कोर्ट को विशेष परिस्थितियों में व्यापक आदेश देने की अनुमति देता है।
गुजारा भत्ता और संपत्ति को लेकर सहमति
अदालत के आदेश के अनुसार, पति पत्नी को एकमुश्त एक करोड़ रुपये का भुगतान करेगा। इसके अलावा लोनावला स्थित संपत्ति में भी पत्नी को हिस्सा दिया जाएगा। अदालत ने निर्देश दिया कि संपत्ति के हिस्से के रूप में 90 लाख रुपये याचिकाकर्ता के खाते में जमा किए जाएं।
दोनों पक्षों ने लिखित रूप में इस समझौते को स्वीकार किया और अदालत को भरोसा दिलाया कि वे इस फैसले का पालन करेंगे। अदालत ने इसे अंतिम और बाध्यकारी समझौता माना।
सभी लंबित मामलों को किया गया समाप्त
इस विवाद से जुड़े कुल 61 मामले देश की विभिन्न अदालतों में लंबित थे, जिनमें घरेलू हिंसा, संपत्ति विवाद और अन्य आपराधिक व सिविल मामले शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में इन सभी मामलों को समाप्त करने का निर्देश दिया।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अब इन मुद्दों पर भविष्य में कोई नया मामला दर्ज नहीं किया जाएगा। यदि ऐसा किया जाता है, तो उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह निर्णय विवाद को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अदालत ने दी स्पष्ट चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले से जुड़े सभी पूर्व न्यायिक आदेश भी निरस्त माने जाएंगे। साथ ही यह भी कहा गया कि दोनों पक्ष अब किसी भी तरह का नया सिविल या आपराधिक मामला दर्ज नहीं करेंगे।
पीठ ने जोर देकर कहा कि इस तरह के लंबे समय से चल रहे विवादों में न्यायिक हस्तक्षेप का उद्देश्य केवल कानूनी प्रक्रिया पूरी करना नहीं, बल्कि स्थायी समाधान सुनिश्चित करना भी होना चाहिए।
लंबे विवाद का हुआ निष्कर्ष
करीब तीन दशक तक चले इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला एक मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है। अदालत ने यह सुनिश्चित किया कि न केवल तलाक की प्रक्रिया पूरी हो, बल्कि उससे जुड़े सभी विवाद भी एक साथ समाप्त हो जाएं।
इस फैसले से यह भी संकेत मिलता है कि न्यायालय जटिल और लंबे समय से लंबित मामलों में व्यापक दृष्टिकोण अपनाकर समाधान निकालने के लिए तैयार है, ताकि पक्षकारों को अनावश्यक कानूनी प्रक्रिया से राहत मिल सके।



