SupremeCourt – लोकसभा में आज पेश होगा न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने वाला विधेयक
SupremeCourt- संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन लोकसभा में एक महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाने की तैयारी है, जिसके माध्यम से उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 किए जाने संबंधी अध्यादेश का स्थान लिया जाएगा। इससे पहले केंद्र सरकार ने मई में इस प्रस्ताव को केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूरी दिलाई थी, जिसके बाद संसद का सत्र न होने के कारण अध्यादेश जारी किया गया। उसी अध्यादेश के आधार पर सर्वोच्च न्यायालय में पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति भी की जा चुकी है।

साधारण बहुमत से पारित हो सकेगा विधेयक
प्रस्तावित कानून के लिए संविधान संशोधन की आवश्यकता नहीं होगी। इसे संसद के दोनों सदनों में साधारण बहुमत से पारित कराया जा सकता है। सरकार का उद्देश्य अध्यादेश को स्थायी कानूनी रूप देना है, क्योंकि संसदीय प्रक्रिया के अनुसार अध्यादेश को निर्धारित समय सीमा के भीतर विधेयक के रूप में मंजूरी मिलना आवश्यक होता है।
पहले भी कई बार बढ़ चुकी है न्यायाधीशों की संख्या
उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या समय-समय पर बढ़ाई जाती रही है। वर्ष 2019 में अंतिम बार स्वीकृत संख्या में संशोधन हुआ था, जब प्रधान न्यायाधीश को छोड़कर न्यायाधीशों की संख्या 30 से बढ़ाकर 33 कर दी गई थी। अब नए प्रस्ताव के तहत कुल स्वीकृत संख्या 38 हो जाएगी, जिसमें भारत के प्रधान न्यायाधीश भी शामिल हैं।
इससे पहले वर्ष 1956 के कानून में न्यायाधीशों की अधिकतम संख्या 10 निर्धारित की गई थी। बाद के वर्षों में 1960, 1977, 1986 और 2009 में अलग-अलग संशोधनों के जरिए यह संख्या बढ़ाई जाती रही। न्यायिक कार्यभार में लगातार वृद्धि को देखते हुए समय-समय पर यह विस्तार किया गया है।
अध्यादेश पर विपक्ष ने जताया विरोध
लोकसभा सचिवालय के बुलेटिन के अनुसार, विपक्षी सदस्यों ने इस अध्यादेश के विरोध में सांविधिक संकल्प भी प्रस्तुत किया है, जिसे सदन में स्वीकार कर लिया गया है। संसदीय परंपरा के तहत जब किसी अध्यादेश को विधेयक के रूप में प्रतिस्थापित किया जाता है, तब उसके विरोध में इस प्रकार का प्रस्ताव लाने का प्रावधान होता है।
पूर्व केंद्रीय विधि सचिव पी. के. मल्होत्रा के अनुसार, अध्यादेश अस्थायी व्यवस्था होती है। संसद का सत्र शुरू होने के बाद छह सप्ताह के भीतर यदि उसे कानून का रूप नहीं दिया जाता, तो वह स्वतः प्रभावहीन हो जाता है। इसी कारण सरकार अब इस विषय पर विधेयक लेकर आ रही है।
मॉनसून सत्र में कई अन्य विधेयक भी एजेंडे में
सरकार ने मॉनसून सत्र के लिए कई महत्वपूर्ण विधेयकों को भी सूचीबद्ध किया है। इनमें राष्ट्र गीत वंदे मातरम् के अपमान को दंडनीय अपराध बनाने से संबंधित प्रस्तावित संशोधन भी शामिल है। इसके अलावा विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को भी विचार और पारित करने के लिए सूची में रखा गया है। यह विधेयक पहले बजट सत्र में पेश किया गया था, लेकिन उस समय उस पर आगे की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी थी।
जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण कानून में भी प्रस्तावित संशोधन
संसद की कार्यसूची में जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 भी शामिल है। इस प्रस्ताव के तहत जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 की धारा 13(3) में संशोधन का प्रावधान किया गया है। सरकार का उद्देश्य पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और सख्त बनाना बताया जा रहा है। मॉनसून सत्र के दौरान इन सभी विधेयकों पर संसद में विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।