WaterTreaty – सिंधु जल संधि पर पाकिस्तानी मंत्री के बयान से बढ़ी बयानबाजी, भारत की प्रतिक्रिया का इंतजार…
WaterTreaty – भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। पाकिस्तान के एक केंद्रीय मंत्री के हालिया बयान ने दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक तनाव को नई चर्चा दे दी है। सोशल मीडिया पर इस बयान का एक वीडियो भी व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल, भारत सरकार की ओर से इस ताजा बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

प्रेस वार्ता में लगाए आरोप
पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक और सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने हाल ही में संयुक्त प्रेस वार्ता की। इस दौरान मुसादिक मलिक ने आरोप लगाया कि भारत सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान के हिस्से के जल प्रवाह को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि यदि पाकिस्तान के जल अधिकारों में किसी प्रकार का हस्तक्षेप हुआ तो उसका जवाब दिया जाएगा। वायरल वीडियो में उनके एक तीखे बयान का भी उल्लेख किया जा रहा है, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान के पानी से जुड़े अधिकारों की रक्षा करने की बात कही है।
सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान का पक्ष
प्रेस वार्ता के दौरान मुसादिक मलिक ने कहा कि सिंधु जल संधि एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है और पाकिस्तान हमेशा इसके प्रावधानों का सम्मान करता आया है। उन्होंने दावा किया कि इस समझौते का पालन सभी पक्षों को करना चाहिए और पाकिस्तान अपने अधिकारों से किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा। उन्होंने भारत पर संधि के पालन को लेकर सवाल भी उठाए और जल संसाधनों के मुद्दे को पाकिस्तान के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया।
सूचना मंत्री ने भी रखा सरकार का रुख
पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने कहा कि उनके अनुसार सिंधु जल संधि अब भी प्रभावी है और इसे समाप्त या निरस्त किए जाने को किसी अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्वीकार नहीं किया गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के पूर्व बयानों का हवाला देते हुए कहा कि पानी पाकिस्तान के लिए जीवनरेखा है और इस विषय पर सरकार अपना रुख स्पष्ट कर चुकी है।
पहलगाम हमले के बाद बढ़ा विवाद
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को लेकर अपने रुख में बदलाव की घोषणा की थी। इसके बाद से दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर लगातार बयान सामने आ रहे हैं। पाकिस्तान की ओर से इस फैसले का विरोध किया जाता रहा है, जबकि भारत सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों का हवाला देते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुका है।
पहले भी आ चुके हैं कड़े बयान
इससे पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ भी सिंधु जल संधि और जल आपूर्ति को लेकर कड़ा रुख व्यक्त कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि यदि पाकिस्तान के हिस्से के पानी पर किसी प्रकार का संकट पैदा होता है तो उनका देश इस मुद्दे पर हर विकल्प पर विचार करेगा। उन्होंने भारत के फैसलों की आलोचना करते हुए कश्मीर और जल विवाद को भी जोड़ा था।
भारत पहले ही दे चुका है जवाब
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 23 जून को पाकिस्तान की ओर से लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि भारत ने संबंधित रिपोर्टों को देखा है, लेकिन ऐसे दावे पाकिस्तान की आंतरिक चुनौतियों और मानवाधिकार संबंधी मुद्दों से ध्यान हटाने का प्रयास हैं। उन्होंने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए खारिज किया था। ताजा बयान पर हालांकि भारत की ओर से अभी तक कोई नया आधिकारिक वक्तव्य जारी नहीं किया गया है।