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West Bengal Voter List: बंगाल में इलेक्शन कमीशन ने लगाया अंतिम दाँव, SIR की समयसीमा में हुआ बड़ा बदलाव

West Bengal Voter List: चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्यक्रम की समयसीमा में संशोधन करते हुए अंतिम मतदाता सूची की प्रकाशन तिथि 14 फरवरी 2026 निर्धारित कर दी है (election)। यह फैसला राज्य में बड़े पैमाने पर हो रहे घर-घर सर्वे और मतदान केंद्रों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। बुधवार को जारी आदेश में कहा गया कि बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) द्वारा घर-घर सर्वेक्षण का कार्य 11 दिसंबर 2025 को पूरा हो जाएगा।

West Bengal Voter List
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नए कैलेंडर में शामिल प्रमुख तारीखें

संशोधित कार्यक्रम के तहत 11 दिसंबर 2025 तक घर-घर सर्वे पूरा कर लिया जाएगा (schedule)। इसके बाद 16 दिसंबर 2025 को मसौदा मतदाता सूची यानी ड्राफ्ट रोल प्रकाशित किया जाएगा। 16 दिसंबर 2025 से 15 जनवरी 2026 तक दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अवधि तय की गई है। इसके बाद 7 फरवरी 2026 तक इन्हें निपटाया जाएगा और साथ ही विशेष सत्यापन अभियान तथा मतदान केंद्रों के युक्तिकरण की प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी।


अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी 2026 को होगी प्रकाशित

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि सभी प्रक्रियाओं के पूर्ण होने के बाद अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी 2026 को जारी कर दी जाएगी (rolls)। यह सूची विधानसभा चुनाव 2026 से पहले निर्वाचन प्रक्रिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी। आयोग का मानना है कि अपडेटेड और सटीक मतदाता सूची से चुनावों की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित होगी।


बूथ लेवल अधिकारियों की सुरक्षा पर बढ़ी चिंता

इस बीच SIR अभियान के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है (security)। कई रिपोर्ट्स में सामने आया है कि BLOs को धमकियों और हिंसा का सामना करना पड़ रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए शीर्ष अदालत ने आयोग से जवाब मांगा है।


सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी—“यह डेस्क जॉब नहीं है”

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कहा कि BLOs अत्यधिक कार्यभार के कारण तनाव में काम कर रहे हैं (workload)। उन्होंने कहा कि BLOs का काम सिर्फ दस्तावेजों की जांच नहीं, बल्कि घर-घर जाकर सत्यापन करना और फिर डिजिटल सिस्टम में डेटा अपलोड करना है, जिससे उन पर भारी दबाव बनता है। कोर्ट ने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए आयोग से सुरक्षा और कार्यप्रणाली संबंधी कदम उठाने को कहा।


कई राज्यों में जारी है SIR प्रक्रिया

पश्चिम बंगाल के साथ ही देश के 11 अन्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में भी SIR प्रक्रिया चलाई जा रही है (states)। यह व्यापक अभियान देशभर में मतदाता सूचियों को अपडेट करने के लिए महत्वपूर्ण है। चुनाव आयोग का लक्ष्य है कि 2026 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची पूरी तरह सटीक और त्रुटिरहित हो।


2026 विधानसभा चुनाव से पहले आयोग की बड़ी तैयारी

पश्चिम बंगाल में 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं, और उससे पहले मतदाता सूची में किसी प्रकार की त्रुटि न रहे, इसके लिए SIR कार्यक्रम को प्राथमिकता दी जा रही है (voting)। नए संशोधित शेड्यूल से यह सुनिश्चित होगा कि सभी दावे-आपत्तियां उचित समय में निपट जाएं और अंतिम सूची बिना किसी विसंगति के प्रकाशित हो सके।


BLOs के लिए बढ़ती चुनौतियां—जमीनी स्तर पर दबाव ज्यादा

जमीनी स्तर पर काम कर रहे BLOs की चुनौतियां काफी बढ़ गई हैं (verification)। उन्हें हजारों घरों में जाकर सत्यापन करना होता है, जो समय और सुरक्षा दोनों दृष्टि से जोखिम भरा है। इसी वजह से अदालत ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए शासन को सुरक्षा उपाय मजबूत करने के निर्देश देने का संकेत दिया है।


मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने पर आयोग का फोकस

चुनाव आयोग का कहना है कि SIR प्रक्रिया से मतदाता सूची अधिक पारदर्शी और सटीक होगी (accuracy)। मृतकों, दोहराए गए नाम, गलत पते और नए मतदाताओं के पंजीकरण जैसी सभी गतिविधियों को इस विशेष अभियान में व्यवस्थित किया जा रहा है। आयोग का उद्देश्य 2026 के चुनावों से पहले एक मजबूत और क्लीन वोटर लिस्ट तैयार करना है।


संशोधित कार्यक्रम से और बेहतर तैयारी की उम्मीद

संशोधित समयसीमा से अधिकारियों को अधिक सुव्यवस्थित तरीके से काम करने का मौका मिलेगा (process)। इससे न केवल BLOs का बोझ कम होगा, बल्कि पूरा सिस्टम और अधिक सुव्यवस्थित हो सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम चुनाव प्रक्रिया को और विश्वसनीय बनाएगा।

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