WestBengalElection – बंगाल में 15 दिन डेरा डालेंगे अमित शाह
WestBengalElection – पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। सत्ता तक पहुंच बनाने के लक्ष्य के साथ भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीति को आक्रामक रूप दिया है। इसी कड़ी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य में लगातार 15 दिनों तक प्रवास करने का ऐलान किया है। उनका यह फैसला चुनावी तैयारी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

भवानीपुर से दिया गया बड़ा चुनावी संदेश
अमित शाह ने हाल ही में भवानीपुर में आयोजित एक जनसभा के दौरान यह घोषणा की। यह सीट मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का राजनीतिक गढ़ मानी जाती है, जिससे इस बयान को खास महत्व मिला है। भाजपा ने यहां शुभेंदु अधिकारी को उम्मीदवार बनाया है, जो पहले भी ममता बनर्जी को कड़ी चुनौती दे चुके हैं। शाह ने अपने संबोधन में भरोसा जताया कि अगर इस सीट पर भाजपा को सफलता मिलती है, तो राज्य में सत्ता परिवर्तन का रास्ता आसान हो जाएगा।
शुभेंदु अधिकारी पर दांव और हाई-प्रोफाइल मुकाबला
शुभेंदु अधिकारी का नाम पहले भी चर्चा में रहा है, खासकर तब जब उन्होंने नंदीग्राम से ममता बनर्जी को हराया था। इस बार पार्टी ने उन्हें नंदीग्राम के साथ-साथ भवानीपुर से भी मैदान में उतारकर मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह रणनीति भाजपा के लिए निर्णायक साबित हो सकती है, क्योंकि दोनों ही सीटें प्रतीकात्मक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं।
15 दिन का प्रवास केवल रैलियों तक सीमित नहीं
सूत्रों के अनुसार, अमित शाह का यह दौरा केवल जनसभाओं तक सीमित नहीं रहेगा। वे राज्य के विभिन्न हिस्सों में रुककर चुनावी प्रबंधन को करीब से देखेंगे। सिलीगुड़ी, बालुरघाट, हुगली, खड़गपुर और दुर्गापुर जैसे क्षेत्रों में उनके ठहरने की योजना है। इन क्षेत्रों का चयन उन सीटों को ध्यान में रखकर किया गया है जहां पिछले चुनाव में भाजपा मामूली अंतर से पीछे रह गई थी।
माइक्रो मैनेजमेंट और जमीनी फीडबैक पर फोकस
इस प्रवास के दौरान शाह संगठनात्मक बैठकों पर विशेष ध्यान देंगे। देर रात तक चलने वाली इन बैठकों में बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद किया जाएगा। साथ ही, टिकट वितरण के बाद उत्पन्न असंतोष को दूर करने और स्थानीय मुद्दों को समझने की कोशिश भी होगी। पार्टी का मानना है कि जमीनी स्तर की यह तैयारी चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकती है।
अन्य राज्यों में आजमा चुके हैं यह रणनीति
अमित शाह की यह कार्यशैली नई नहीं है। इससे पहले मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार के चुनावों में भी उन्होंने इसी तरह का विस्तृत प्रवास किया था। खासकर बिहार में पार्टी के बेहतर प्रदर्शन के पीछे उनकी रणनीतिक योजना को अहम माना गया था। अब इसी मॉडल को बंगाल में लागू करने की तैयारी है, जहां राज्य को विभिन्न हिस्सों में बांटकर चुनावी गतिविधियों की निगरानी की जाएगी।
पिछले चुनावों के आंकड़ों से मिली सीख
2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उल्लेखनीय बढ़त दर्ज करते हुए अपनी सीटों की संख्या में बड़ा इजाफा किया था। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को कुछ सीटों पर नुकसान उठाना पड़ा। ऐसे में इस बार पार्टी उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे रही है, जहां पिछली बार बेहद कम अंतर से हार मिली थी। जलपाईगुड़ी, राजगंज और मेखलीगंज जैसे इलाकों में रणनीति को और मजबूत किया जा रहा है, ताकि इस बार परिणाम बदले जा सकें।



