SanjuSamson – संघर्ष से उभरकर टी20 विश्व कप में बने भारत के हीरो
SanjuSamson – आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारतीय टीम ने खिताब जीतकर इतिहास रचा, लेकिन इस सफलता के पीछे कुछ ऐसे प्रदर्शन भी रहे जिन्होंने पूरे टूर्नामेंट की दिशा बदल दी। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा संजू सैमसन की बल्लेबाजी की रही। टूर्नामेंट की शुरुआत में उनका नाम प्लेइंग इलेवन से बाहर था, लेकिन बाद में टीम में वापसी के बाद उन्होंने जिस तरह खेल दिखाया, उसने भारत के अभियान को नई ऊर्जा दे दी।

भारतीय टीम इस टूर्नामेंट में मजबूत दावेदार के रूप में उतरी थी। कप्तान सूर्यकुमार यादव के नेतृत्व में टीम ने 2024 के बाद से आक्रामक क्रिकेट खेलना शुरू किया था, जिससे प्रशंसकों और विशेषज्ञों की उम्मीदें काफी बढ़ गई थीं। हालांकि टूर्नामेंट की शुरुआत में टीम की लय वैसी नहीं दिखी जैसी उससे अपेक्षा की जा रही थी।
शुरुआती मैचों में टीम का असंतुलित प्रदर्शन
ग्रुप चरण में भारत ने अपने सभी चार मुकाबले जीत लिए, जिनमें पाकिस्तान के खिलाफ अहम मैच भी शामिल था। इसके बावजूद टीम का प्रदर्शन पूरी तरह संतुलित नहीं दिखाई दे रहा था। कई मुकाबलों में जीत किसी एक खिलाड़ी के व्यक्तिगत प्रदर्शन की बदौलत मिली।
अमेरिका के खिलाफ कप्तान सूर्यकुमार यादव की पारी ने मैच का रुख बदला, जबकि पाकिस्तान के खिलाफ ईशान किशन ने अहम भूमिका निभाई। हालांकि बल्लेबाजी क्रम में निरंतरता की कमी साफ नजर आ रही थी। टीम के शीर्ष क्रम में कई बाएं हाथ के बल्लेबाज होने से विरोधी टीमों को रणनीति बनाने का मौका मिल रहा था।
दक्षिण अफ्रीका से हार ने बदल दी दिशा
सुपर आठ चरण में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारत को करारी हार झेलनी पड़ी। इस मुकाबले में 76 रन से मिली हार ने टीम के प्रदर्शन पर सवाल खड़े कर दिए। कई पूर्व खिलाड़ियों और विशेषज्ञों ने टीम के संयोजन को लेकर आलोचना भी की।
यही वह समय था जब टीम प्रबंधन ने बदलाव करने का निर्णय लिया। मुख्य कोच गौतम गंभीर और कप्तान सूर्यकुमार यादव ने टीम संयोजन पर फिर से विचार किया और प्लेइंग इलेवन में बदलाव करते हुए संजू सैमसन को मौका देने का फैसला किया।
सैमसन की वापसी से बदला खेल
टूर्नामेंट से पहले संजू सैमसन का फॉर्म उम्मीद के मुताबिक नहीं था। न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में भी वह लगातार रन बनाने में सफल नहीं रहे थे, जिससे टीम में उनकी जगह पर सवाल उठने लगे थे।
इसी कारण शुरुआती मैचों में उन्हें मौका नहीं मिला और ईशान किशन को प्राथमिकता दी गई। हालांकि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हार के बाद टीम प्रबंधन ने संयोजन में बदलाव करते हुए सैमसन को मौका दिया।
अवसर मिलते ही दिखाई अलग लय
टीम में वापसी के बाद सैमसन ने इस मौके को पूरी तरह भुनाया। जिम्बाब्वे के खिलाफ उन्होंने तेज शुरुआत देते हुए 15 गेंदों पर उपयोगी रन बनाए और टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई।
इसके बाद उनका आत्मविश्वास लगातार बढ़ता गया। वेस्टइंडीज के खिलाफ महत्वपूर्ण मुकाबले में उन्होंने 97 रन की नाबाद पारी खेलकर भारत को कठिन लक्ष्य तक पहुंचाया। यह मैच टूर्नामेंट के निर्णायक मुकाबलों में से एक माना गया।
नॉकआउट मुकाबलों में निर्णायक योगदान
सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ सैमसन ने एक और शानदार पारी खेली और 89 रन बनाए। उनकी इस पारी ने भारत को बड़े मुकाबले में मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया।
फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ भी उन्होंने बेहतरीन बल्लेबाजी करते हुए 89 रन बनाए। इस प्रदर्शन ने भारत की जीत की नींव रखी और टीम को विशाल स्कोर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बने
पूरे टूर्नामेंट में संजू सैमसन ने पांच मैचों में कुल 321 रन बनाए और भारतीय टीम के सबसे सफल बल्लेबाज साबित हुए। उनकी निरंतर बल्लेबाजी ने टीम को कई महत्वपूर्ण मैचों में जीत दिलाई।
इसी प्रदर्शन के आधार पर उन्हें टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया। विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआत में मुश्किल दौर से गुजरने के बाद जिस तरह सैमसन ने वापसी की, वह इस टूर्नामेंट की सबसे यादगार कहानियों में से एक बन गई।



