South Africa vs West Indies 1999 Test Series: क्रिकेट इतिहास का वो अजूबा! जब एक खिलाड़ी नहीं बल्कि पूरी टीम बनी ‘मैन ऑफ द मैच’
South Africa vs West Indies 1999 Test Series: क्रिकेट की दुनिया में एक दौर था जब वेस्टइंडीज के गेंदबाजों की सनसनाती गेंदों से दुनिया के बल्लेबाज कांपते थे। 1970 और 80 के दशक का वो खौफनाक रुतबा 90 के दशक के अंत तक आते-आते फीका पड़ने लगा था। हालांकि (Test Cricket Rankings) में टीम चौथे स्थान पर थी और सम्मान बरकरार था, लेकिन मैदान पर प्रदर्शन लगातार गिर रहा था। इसी गिरते ग्राफ के बीच 1998-99 का वो ऐतिहासिक दौरा आया, जब पहली बार वेस्टइंडीज की टीम दक्षिण अफ्रीका की धरती पर कदम रख रही थी। किसी ने सोचा भी नहीं था कि यह दौरा एक ऐसी अनूठी घटना का गवाह बनेगा जो आज तक दोबारा नहीं दोहराई गई।

साउथ अफ्रीका की सरजमीं पर पहली अग्निपरीक्षा
ब्रायन लारा की कप्तानी में वेस्टइंडीज की टीम जब दक्षिण अफ्रीका पहुंची, तो उनका सामना हैंसी क्रोनिए की उस टीम से था जो अपने घर में अजेय नजर आ रही थी। सीरीज की शुरुआत से ही (South Africa vs West Indies 1999 Test Series) के मामले में मेजबान टीम कैरेबियाई खिलाड़ियों पर भारी पड़ रही थी। सात मैचों की वनडे सीरीज हो या पांच मैचों की टेस्ट सीरीज, हर जगह अफ्रीकी शेरों ने वेस्टइंडीज का बुरा हाल कर दिया था। 15 से 18 जनवरी 1999 के बीच खेला गया सीरीज का आखिरी टेस्ट मैच क्रिकेट इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों में दर्ज होने वाला था।
जब लारा का टॉस जीतना भी काम न आया
सीरीज पहले ही 4-0 से हाथ से निकल चुकी थी, लेकिन कप्तान ब्रायन लारा आखिरी मैच जीतकर अपनी साख बचाना चाहते थे। सेंचुरियन के मैदान पर (Toss Winning Strategy) अपनाते हुए लारा ने पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। शुरुआत उम्मीद के मुताबिक रही और महज 5 रन पर दक्षिण अफ्रीका के दो बड़े विकेट गिर गए। एक समय स्कोर 123 रन पर 6 विकेट था और ऐसा लग रहा था कि वेस्टइंडीज इस बार बाजी मार लेगा। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और दक्षिण अफ्रीकी निचले क्रम ने मोर्चा संभाल लिया।
मार्क बाउचर और कैलिस का पलटवार
जब दक्षिण अफ्रीका की टीम मुश्किल में थी, तब युवा मार्क बाउचर और भरोसेमंद जैक्स कैलिस ने कैरेबियाई गेंदबाजों की बखिया उधेड़नी शुरू की। बाउचर ने शानदार शतक जड़ा और कैलिस ने 83 रनों की जुझारू पारी खेलकर (Team Score Consolidation) की जिम्मेदारी बखूबी निभाई। पहले दिन का खेल खत्म होने तक मेजबान टीम ने 9 विकेट पर 311 रन बना लिए थे और अगले दिन उनकी पारी 313 रन पर सिमट गई। वेस्टइंडीज के पास अभी भी मौका था, लेकिन उनकी बल्लेबाजी ताश के पत्तों की तरह ढह गई।
एलन डोनाल्ड की आग उगलती गेंदों का कहर
दक्षिण अफ्रीका के 313 रनों के जवाब में वेस्टइंडीज की शुरुआत तो ठीक रही, लेकिन ‘सफेद बिजली’ कहे जाने वाले एलन डोनाल्ड ने अपनी रफ्तार से कहर बरपा दिया। डोनाल्ड के (Five Wicket Haul) के सामने लारा की सेना महज 144 रनों पर ढेर हो गई। पहली पारी के आधार पर दक्षिण अफ्रीका को 169 रनों की भारी बढ़त मिल चुकी थी। वेस्टइंडीज के लिए यहां से वापसी की कोई गुंजाइश नहीं बची थी क्योंकि वे मानसिक और तकनीकी दोनों मोर्चों पर पिछड़ चुके थे।
दूसरी पारी में रनों का विशाल पहाड़
169 रनों की बढ़त के साथ दूसरी पारी खेलने उतरी दक्षिण अफ्रीकी टीम ने वेस्टइंडीज के घावों पर नमक छिड़कने का काम किया। गैरी कर्स्टन और जोंटी रोड्स ने धमाकेदार शतक लगाए, जबकि हर्शल गिब्स और कप्तान हैंसी क्रोनिए ने (Middle Order Batting) को मजबूती देते हुए अर्धशतक जड़े। दक्षिण अफ्रीका ने अपनी दूसरी पारी में 399 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया और वेस्टइंडीज के सामने जीत के लिए 569 रनों का असंभव सा लक्ष्य रख दिया। कैरेबियाई टीम के लिए यह हार अब सिर्फ समय की बात रह गई थी।
जज डेनिस लिंडसे का वो ऐतिहासिक फैसला
विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए वेस्टइंडीज की दूसरी पारी 217 रन पर सिमट गई और दक्षिण अफ्रीका ने यह मैच 351 रनों के भारी अंतर से जीत लिया। मैच खत्म होने के बाद प्रेजेंटेशन सेरेमनी में जो हुआ, उसने पूरी दुनिया को चौंका दिया। मैच के निर्णायक डेनिस लिंडसे ने (Player of the Match) का चुनाव करते समय किसी एक खिलाड़ी का नाम नहीं लिया। उन्होंने पूरी दक्षिण अफ्रीकी टीम को इस सम्मान के लिए चुना। यह फैसला क्रिकेट इतिहास में पहली और आखिरी बार देखा गया, जिसने व्यक्तिगत उपलब्धियों से ऊपर टीम वर्क को रखा।
क्यों चुना गया पूरी टीम को विजेता
सवाल उठा कि आखिर मार्क बाउचर के शतक या एलन डोनाल्ड के पांच विकेट के बावजूद पूरी टीम को यह अवॉर्ड क्यों मिला? जज लिंडसे का मानना था कि इस जीत में (Balanced Team Contribution) का अद्भुत उदाहरण देखने को मिला था। किसी ने शतक लगाया, किसी ने अर्धशतक, किसी ने पांच विकेट लिए तो जोंटी रोड्स जैसे खिलाड़ियों ने फील्डिंग में जान फूंक दी थी। यह जीत किसी एक नायक की नहीं, बल्कि ग्यारह खिलाड़ियों के साझा संघर्ष का परिणाम थी। इसलिए पूरी टीम को मंच पर बुलाकर सम्मानित किया गया।
जैक्स कैलिस का दबदबा और सीरीज का अंत
भले ही आखिरी मैच में ‘मैन ऑफ द मैच’ का अवॉर्ड पूरी टीम को मिला, लेकिन पूरी सीरीज के दौरान जैक्स कैलिस की चमक सबसे अलग रही। कैलिस ने पूरी (Test Series Statistics) में अविश्वसनीय 485 रन बनाए थे, जिसके चलते उन्हें निर्विवाद रूप से ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ चुना गया। दक्षिण अफ्रीका ने टेस्ट सीरीज में 5-0 से क्लीन स्वीप किया, जो वेस्टइंडीज क्रिकेट के गौरवशाली इतिहास पर एक गहरा काला धब्बा था। लारा की कप्तानी में मिली यह हार आज भी वेस्टइंडीज के प्रशंसकों को चुभती है।
टीम वर्क की सबसे बड़ी मिसाल
1999 की वह सीरीज आज भी क्रिकेट जगत में सामूहिक प्रयासों की सबसे बड़ी मिसाल मानी जाती है। क्रिकेट अमूमन व्यक्तिगत रिकॉर्ड्स का खेल माना जाता है, लेकिन (Collective Achievement Philosophy) को बढ़ावा देने वाले उस एक फैसले ने इस खेल की गरिमा बढ़ा दी। दक्षिण अफ्रीका की उस टीम ने साबित किया कि जब ग्यारह खिलाड़ी एक ही लक्ष्य के लिए पूरी जान लगा देते हैं, तो व्यक्तिगत पुरस्कार भी छोटे पड़ जाते हैं। आज भी जब कभी क्रिकेट के अजीबोगरीब रिकॉर्ड्स की बात होती है, तो सेंचुरियन के इस मैच का जिक्र जरूर आता है।



