T20Stats – टी20 विश्व कप में कप्तानों की धीमी पारियों का रिकॉर्ड
T20Stats – टी20 क्रिकेट को तेज रफ्तार खेल के रूप में जाना जाता है, जहां कुछ ओवरों में ही मैच का रुख बदल जाता है। आम तौर पर दर्शक चौकों और छक्कों की बरसात देखने की उम्मीद लेकर मैदान या स्क्रीन के सामने बैठते हैं। लेकिन हर मुकाबला बल्लेबाजों के अनुकूल नहीं होता। कई बार परिस्थितियां ऐसी बन जाती हैं कि बड़े से बड़े आक्रामक खिलाड़ी भी रन गति बनाए रखने में संघर्ष करते दिखते हैं। टी20 विश्व कप 2026 के सुपर 8 मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सूर्यकुमार यादव की पारी ने एक बार फिर इस चर्चा को जन्म दिया है कि बड़े टूर्नामेंटों में कप्तानों पर दबाव किस तरह असर डालता है।

सूर्यकुमार की पारी और बढ़ी बहस
सुपर 8 के उस मैच में सूर्यकुमार यादव ने 22 गेंदों का सामना किया, लेकिन केवल 18 रन ही बना सके। उनका स्ट्राइक रेट 81.82 रहा, जो टी20 प्रारूप के मानकों के हिसाब से धीमा माना जाता है। खासतौर पर तब, जब टीम को तेज गति से रन बनाने की जरूरत हो। इस पारी के बाद पुराने आंकड़े फिर चर्चा में आ गए और टी20 विश्व कप इतिहास में भारतीय कप्तानों के सबसे कम स्ट्राइक रेट वाली पारियों पर नजर डाली जाने लगी।
एमएस धोनी के दो मुकाबले
इस सूची में सबसे ऊपर नाम पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का आता है। वर्ष 2009 में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेले गए मैच में उन्होंने 23 गेंदों पर 11 रन बनाए थे। उस पारी का स्ट्राइक रेट 47.82 रहा, जो आज भी भारतीय कप्तानों में न्यूनतम माना जाता है, बशर्ते बल्लेबाज ने कम से कम 20 गेंदें खेली हों।
इसी तरह 2012 के टी20 विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ धोनी 21 गेंदों पर 15 रन ही बना सके थे। उस मैच में उनका स्ट्राइक रेट 71.42 दर्ज किया गया। दोनों मुकाबलों में टीम को हार का सामना करना पड़ा था, जिससे इन पारियों की चर्चा और भी बढ़ गई।
रोहित शर्मा का नाम भी शामिल
इस सूची में रोहित शर्मा भी शामिल हैं। 2022 के टी20 विश्व कप सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने 28 गेंदों में 27 रन बनाए थे। उस पारी का स्ट्राइक रेट 96.42 रहा। हालांकि यह अन्य नामों की तुलना में बेहतर है, फिर भी टी20 के लिहाज से अपेक्षाकृत धीमा माना गया। वह मुकाबला भी भारत के पक्ष में नहीं गया था।
कप्तानी का दबाव और परिस्थितियां
इन आंकड़ों को देखते समय यह समझना जरूरी है कि हर पारी का संदर्भ अलग होता है। कई बार विकेट की प्रकृति, विपक्षी गेंदबाजी और मैच की स्थिति बल्लेबाज को जोखिम लेने से रोकती है। कप्तान होने के नाते जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। टीम को संभालने की कोशिश में कई बार बल्लेबाज आक्रामक खेल नहीं दिखा पाता।
सूर्यकुमार यादव की हालिया पारी भी ऐसे ही दबाव भरे माहौल में आई, जब टीम को स्थिरता की जरूरत थी। हालांकि टी20 प्रारूप में रन गति अहम होती है, लेकिन हर पारी सिर्फ आंकड़ों से नहीं आंकी जा सकती।
आंकड़ों की यह सूची क्या बताती है
इन सभी मुकाबलों में एक समान बात यह रही कि भारतीय टीम को हार मिली। इससे यह संकेत जरूर मिलता है कि कप्तान की पारी टीम के प्रदर्शन पर असर डाल सकती है। फिर भी यह कहना उचित नहीं होगा कि केवल धीमी पारी ही हार का कारण होती है। क्रिकेट सामूहिक खेल है और परिणाम कई कारकों पर निर्भर करता है।
टी20 विश्व कप में भारतीय कप्तानों के न्यूनतम स्ट्राइक रेट वाली पारियां (कम से कम 20 गेंदें खेलने के बाद)
47.82 – महेंद्र सिंह धोनी बनाम वेस्टइंडीज, 2009
71.42 – महेंद्र सिंह धोनी बनाम ऑस्ट्रेलिया, 2012
81.82 – सूर्यकुमार यादव बनाम दक्षिण अफ्रीका, 2026
96.42 – रोहित शर्मा बनाम इंग्लैंड, 2022



