उत्तर प्रदेश

AyushmanScheme – लखनऊ के निजी अस्पतालों में इलाज दावों में गड़बड़ी उजागर

AyushmanScheme – आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज और भुगतान से जुड़े दावों की जांच में लखनऊ के कई निजी अस्पतालों में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। नेशनल एंटी फ्रॉड यूनिट और स्टेट एंटी फ्रॉड यूनिट की संयुक्त कार्रवाई के दौरान अस्पतालों के रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में बड़ा अंतर पाया गया। जांच टीम को कई जगह मरीजों की संख्या, उपलब्ध सुविधाओं और चिकित्सा स्टाफ से जुड़े दावों में विसंगतियां मिलीं, जिसके बाद संबंधित अस्पतालों को नोटिस जारी किया गया है।

lucknow private hospitals ayushman scheme irregularities

प्रारंभिक जांच से यह संकेत मिला है कि कुछ अस्पतालों ने योजना के तहत इलाज के दावों में वास्तविकता से अधिक मरीज दिखाए थे। अधिकारियों का कहना है कि इन मामलों की विस्तृत जांच जारी है और आवश्यक होने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मरीजों की संख्या और दावों में बड़ा अंतर

जांच के दौरान राजधानी के शान्या स्कैन हॉस्पिटल में सबसे बड़ी गड़बड़ी सामने आई। अस्पताल ने रिकॉर्ड में 592 मरीजों को भर्ती दिखाते हुए योजना के तहत दावा किया था। हालांकि निरीक्षण के समय अस्पताल में केवल 40 मरीज ही मौजूद पाए गए।

जांच टीम ने अस्पताल प्रबंधन से इस अंतर के बारे में पूछताछ की, लेकिन स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका। इसके अलावा अस्पताल में बेड के बीच की दूरी भी निर्धारित स्वास्थ्य मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई। अधिकारियों के अनुसार यह भी पाया गया कि अस्पताल की वास्तविक क्षमता के मुकाबले कहीं अधिक मरीजों को भर्ती दिखाया गया था।

जांच सुविधाओं को लेकर भी उठे सवाल

निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि अस्पताल ने योजना के तहत मरीजों को पेट स्कैन और कीमोथेरेपी जैसी सेवाओं के लिए भर्ती दर्शाया था। लेकिन वास्तविक स्थिति में अधिकांश मामलों में केवल पेट स्कैन ही किया गया था।

अस्पताल में कुल 28 बेड उपलब्ध हैं, जबकि रिकॉर्ड में उससे कहीं अधिक मरीजों को भर्ती दिखाया गया था। इस संबंध में अस्पताल को विस्तृत स्पष्टीकरण देने के लिए नोटिस जारी किया गया है।

अन्य अस्पतालों में भी मिली कई कमियां

जांच टीम ने शहर के अन्य अस्पतालों का भी निरीक्षण किया, जहां कई प्रकार की खामियां सामने आईं। अद्भुत हॉस्पिटल में आईसीयू वार्ड के भीतर संक्रमण नियंत्रण से जुड़े नियमों का ठीक तरह पालन नहीं किया जा रहा था। निरीक्षण के समय वहां कोई ड्यूटी डॉक्टर मौजूद नहीं मिला, जबकि नियमों के अनुसार तीन डॉक्टरों की तैनाती आवश्यक थी।

ओम साई हॉस्पिटल ने आयुष्मान योजना के तहत 10 बेड की सुविधा दर्शाकर पंजीकरण कराया था, लेकिन मौके पर केवल पांच बेड ही उपलब्ध मिले। अस्पताल में पूर्णकालिक ड्यूटी डॉक्टर और ऑपरेशन थिएटर से जुड़े तकनीकी कर्मचारी भी उपस्थित नहीं पाए गए।

कई अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं की कमी

अर्जुनगंज स्थित पुष्पांजली हॉस्पिटल के रिकॉर्ड में नौ आयुष्मान लाभार्थी दर्ज थे, जबकि निरीक्षण के दौरान वहां केवल एक मरीज मिला। इसके अलावा अस्पताल में कोई एमबीबीएस डॉक्टर भी मौजूद नहीं पाया गया और दवाइयों के रखरखाव की व्यवस्था भी अव्यवस्थित मिली।

इसी क्षेत्र में स्थित शताब्दी हॉस्पिटल का संचालन भूमिगत बेसमेंट से किया जा रहा था। वहां आयुष्मान योजना से संबंधित हेल्प डेस्क की व्यवस्था नहीं थी और योजना के पोर्टल के संचालन के लिए प्रशिक्षित स्टाफ भी उपलब्ध नहीं मिला।

मेडी हेल्थ हॉस्पिटल में निरीक्षण के समय केवल एक एमबीबीएस डॉक्टर ड्यूटी पर मौजूद थे। इसके अलावा बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन का प्रमाणपत्र समाप्त पाया गया और अग्नि सुरक्षा से जुड़ी स्वीकृति भी जारी नहीं थी।

स्वास्थ्य प्राधिकरण ने दिए कार्रवाई के संकेत

राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। साचीज की मुख्य कार्यकारी अधिकारी अर्चना वर्मा ने बताया कि योजना से जुड़े अस्पतालों की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मंडल स्तर पर विशेष जांच टीमें बनाई गई हैं।

उन्होंने कहा कि यदि जांच में अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं तो संबंधित अस्पतालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसमें योजना से अस्थायी निलंबन या पूरी तरह डि-इम्पैनलमेंट जैसे कदम भी शामिल हो सकते हैं।

अधिकारियों का कहना है कि आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य जरूरतमंद मरीजों को बेहतर और सुलभ इलाज उपलब्ध कराना है। इसलिए योजना के तहत होने वाली किसी भी तरह की गड़बड़ी को गंभीरता से लिया जा रहा है और निगरानी को और मजबूत किया जा रहा है।

Related Articles

Back to top button

Adblock Detected

Please remove AdBlocker first, and then watch everything easily.