BikeTaxi – पेट्रोल संकट के बीच गोरखपुर में बढ़ा नया रोजगार
BikeTaxi – पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच गोरखपुर में ऐप आधारित बाइक टैक्सी और मालवाहक सेवाओं का चलन तेजी से बढ़ रहा है। शहर में हजारों लोग अब इन सेवाओं के जरिए अतिरिक्त कमाई कर रहे हैं। खास बात यह है कि केवल बेरोजगार युवा ही नहीं, बल्कि नौकरीपेशा लोग, छात्र और छोटे कारोबारी भी पार्ट टाइम काम के रूप में इन प्लेटफॉर्म से जुड़ रहे हैं।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, ईंधन संकट और पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारों के कारण लोगों ने अब वैकल्पिक साधनों की तरफ रुख करना शुरू कर दिया है। कई निजी कंपनियों के मोबाइल एप के जरिए बाइक टैक्सी और छोटे मालवाहक वाहन आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं। अनुमान है कि शहर में पांच हजार से अधिक लोग इस तरह की सेवाओं से जुड़े हुए हैं।
नौकरी के साथ अतिरिक्त कमाई का जरिया
शहर के पादरी बाजार इलाके में रहने वाले भोला प्रजापति रोज काम के लिए लंबी दूरी तय करते हैं। उनका कहना है कि पहले रोजाना आने-जाने में काफी पेट्रोल खर्च होता था, लेकिन अब रास्ते में यात्रियों को छोड़ते हुए कुछ अतिरिक्त कमाई भी हो जाती है।
इसी तरह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले कई छात्र भी ऐप आधारित बाइक सेवा से जुड़े हैं। उनका कहना है कि पढ़ाई के साथ कुछ घंटे काम कर वे अपने खर्च निकाल लेते हैं। कई लोग इसे फुल टाइम नौकरी की बजाय अतिरिक्त आय का साधन मान रहे हैं।
माल ढुलाई सेवाओं की बढ़ी मांग
सिर्फ बाइक टैक्सी ही नहीं, छोटे मालवाहक वाहनों की मांग भी तेजी से बढ़ी है। बशारतपुर के रहने वाले राजीव श्रीवास्तव ई-रिक्शा के जरिए सामान ढुलाई का काम करते हैं। उनका कहना है कि पहले उन्हें ऑर्डर के लिए दुकानदारों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब एप के जरिए सीधे ग्राहकों से काम मिल रहा है।
शहर के कई व्यापारी भी इस सेवा को सुविधाजनक मान रहे हैं। छोटे सामान, इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, टाइल्स और घरेलू वस्तुएं कम समय में पहुंचाने के लिए लोग ऐप आधारित डिलीवरी सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं।
ग्राहकों को मिल रही सुविधा
गोरखपुर के कारोबारी आनंद रूंगटा बताते हैं कि पहले छोटी दूरी के लिए सामान मंगवाना समय लेने वाला काम होता था। अब मोबाइल एप के जरिए कुछ ही मिनटों में बाइक या छोटा वाहन उपलब्ध हो जाता है। इसी तरह कई दुकानदारों का कहना है कि कम मात्रा में सामान भेजने के लिए यह सेवा किफायती साबित हो रही है।
हालांकि पेट्रोल की कीमत बढ़ने और ईंधन संकट के चलते इन सेवाओं का किराया भी बढ़ा है। लोगों का कहना है कि पहले की तुलना में अब राइड और माल ढुलाई दोनों का शुल्क अधिक लिया जा रहा है।
बढ़ते किराए के बावजूद बनी मांग
स्थानीय लोगों के अनुसार, किराए में बढ़ोतरी के बाद भी ऐप आधारित सेवाओं की मांग कम नहीं हुई है। कई उपभोक्ता मानते हैं कि लंबी लाइन में लगने और निजी वाहन से यात्रा करने की तुलना में यह विकल्प अधिक सुविधाजनक है।
कुछ मामलों में ग्राहकों को पहले से ऑनलाइन भुगतान की सुविधा भी मिल रही है। इससे यात्रा और सामान ढुलाई दोनों प्रक्रियाएं आसान हो गई हैं। व्यापारियों का कहना है कि गर्मी और पेट्रोल संकट के बीच यह व्यवस्था लोगों के लिए राहत का काम कर रही है।
शहर में बदल रहा परिवहन का तरीका
विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन संकट और डिजिटल सेवाओं के विस्तार ने छोटे शहरों में भी परिवहन के नए विकल्पों को बढ़ावा दिया है। गोरखपुर में बढ़ती बाइक टैक्सी और मालवाहक सेवाएं इसी बदलाव का उदाहरण मानी जा रही हैं।
स्थानीय प्रशासन भी इन सेवाओं पर नजर बनाए हुए है ताकि यातायात और सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। आने वाले समय में इस क्षेत्र में और अधिक लोगों के जुड़ने की संभावना जताई जा रही है।