Brain Infection Risk: मिट्टी में मिल गया नीट की छात्रा का डॉक्टर बनने का सपना, पत्ता गोभी ही बनी मौत की फरमान
Brain Infection Risk: उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने स्वास्थ्य विशेषज्ञों और आम जनता को चिंता में डाल दिया है। नीट की तैयारी कर रही एक 18 वर्षीय मेधावी छात्रा की संदिग्ध दिमागी संक्रमण के कारण मौत हो गई। छात्रा का सपना डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। इस घटना (medical tragedy) के बाद पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है और लोग अपनी सुरक्षा को लेकर डरे हुए हैं।

फास्ट फूड और संक्रमित पत्ता गोभी का कनेक्शन
मीडिया रिपोर्ट्स में छात्रा की मौत के पीछे फास्ट फूड में इस्तेमाल होने वाली संक्रमित पत्ता गोभी को एक संभावित कारण बताया जा रहा है। आशंका जताई जा रही है कि पत्ता गोभी में पाए जाने वाले एक विशेष प्रकार के सूक्ष्म कीड़े के कारण छात्रा के दिमाग में (brain cysts) बन गई थीं। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग या किसी आधिकारिक संस्थान ने अभी तक इस दावे की पूर्ण सत्यता की पुष्टि नहीं की है, लेकिन प्राथमिक लक्षणों के आधार पर यह चर्चा तेज हो गई है।
टाइफाइड से शुरू हुआ मौत का सफर
छात्रा की बीमारी की शुरुआत लगभग एक महीने पहले सामान्य बुखार से हुई थी। स्थानीय डॉक्टरों ने जांच के बाद टाइफाइड की पुष्टि की थी और इलाज शुरू किया गया था। परिजनों को जरा भी अंदाजा नहीं था कि यह साधारण सा लगने वाला बुखार (fatal infection) में तब्दील हो जाएगा। स्थानीय उपचार से जब कोई सुधार नहीं हुआ और सिरदर्द असहनीय हो गया, तब परिवार उसे लेकर नोएडा के एक बड़े निजी अस्पताल की ओर भागा।
डॉक्टर भी रह गए दंग जब देखीं दिमाग में गांठें
नोएडा के अस्पताल में जब छात्रा का सीटी स्कैन और एमआरआई किया गया, तो जो रिपोर्ट सामने आई उसने अनुभवी डॉक्टरों के भी होश उड़ा दिए। शुरुआती रिपोर्ट में दिमाग में 7 से 8 गांठें दिखाई दी थीं, लेकिन महज कुछ ही दिनों के भीतर यह संक्रमण (rapid neurocysticercosis) की तरह फैला और गांठों की संख्या बढ़कर 20 से 25 तक पहुंच गई। संक्रमण की इस भयावह गति ने मेडिकल टीम को हैरान कर दिया और आनन-फानन में छात्रा को दिल्ली रेफर किया गया।
दिल्ली में मेजर ऑपरेशन भी नहीं बचा सका जान
गंभीर स्थिति को देखते हुए छात्रा को 22 दिसंबर को दिल्ली के एक प्रतिष्ठित अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां विशेषज्ञ सर्जनों ने दिमाग का एक मेजर ऑपरेशन किया ताकि संक्रमण को बढ़ने से रोका जा सके। अस्पताल के (intensive care) यूनिट में कई दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच जंग चलती रही। आखिरकार सोमवार को छात्रा ने दम तोड़ दिया, जिससे उसके परिवार और परिचितों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
सुपुर्द-ए-खाक हुई डॉक्टर बनने की हसरत
छात्रा का पार्थिव शरीर देर रात उसके पैतृक गांव पहुंचा, जहां गमगीन माहौल में उसे सुपुर्द-ए-खाक किया गया। गांव के हर शख्स की आंखों में आंसू थे क्योंकि उन्होंने अपनी एक होनहार बेटी को खो दिया था। वह कड़ी मेहनत कर (competitive exams) की तैयारी कर रही थी ताकि एक सफल डॉक्टर बन सके। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को फास्ट फूड की दुकानों पर स्वच्छता मानकों की कड़ाई से जांच करनी चाहिए ताकि कोई और ऐसी अनहोनी का शिकार न हो।
क्या पत्ता गोभी के कीड़े वाकई जानलेवा हैं?
मेडिकल जगत में पत्ता गोभी में पाए जाने वाले कीड़े (tapeworm larvae) को न्यूरोसिस्टिकुलोसिस का एक प्रमुख कारण माना जाता है। यदि कच्ची या अधपकी पत्ता गोभी का सेवन किया जाए, तो ये कीड़े खून के जरिए दिमाग तक पहुंच जाते हैं और वहां गांठें बना देते हैं। अमरोहा की इस घटना ने एक बार फिर आहार संबंधी आदतों और बाजार में बिकने वाली सब्जियों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बचाव ही एकमात्र उपाय
इस दुखद घटना ने समाज को एक कड़ा सबक दिया है कि हमें बाहर के खान-पान को लेकर कितनी सावधानी बरतने की जरूरत है। विशेषज्ञों की सलाह है कि सब्जियों को हमेशा (hygienic cleaning) के बाद ही पकाएं और फास्ट फूड के अत्यधिक सेवन से बचें। खास तौर पर पत्ता गोभी जैसी सब्जियों को बहुत तेज आंच पर पकाने के बाद ही खाना चाहिए। छात्रा की मौत ने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि पूरे सिस्टम को सतर्क रहने का संकेत भी दिया है।



