ConversionCase – आगरा धर्मांतरण मामले में चार और आरोपियों की हुई गिरफ्तारी
ConversionCase – आगरा में दो सगी बहनों के कथित धर्मांतरण से जुड़े मामले में पुलिस ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। अब इस मामले में चार और लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कार्रवाई में उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ एसटीएफ की टीम भी शामिल रही। पुलिस ने दिल्ली और राजस्थान में कई स्थानों पर दबिश देकर आरोपियों को पकड़ा। अधिकारियों के मुताबिक गिरफ्तार किए गए कुछ लोग पहले से चर्चित धर्मांतरण नेटवर्क से भी जुड़े रहे हैं।

यह मामला पिछले वर्ष तब सामने आया था, जब आगरा के सदर क्षेत्र से दो बहनें अचानक लापता हो गई थीं। परिवार की शिकायत पर अपहरण का केस दर्ज किया गया था। शुरुआती जांच में एक कश्मीरी छात्रा पर संदेह जताया गया, लेकिन आगे की पड़ताल में पुलिस को एक बड़े संगठित नेटवर्क के संकेत मिले। जांच में यह भी सामने आया कि इस नेटवर्क में अलग-अलग राज्यों के लोग और कुछ महिलाएं भी सक्रिय थीं।
कई राज्यों तक फैली जांच
पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार ने बताया कि मामले की विवेचना अभी जारी है। जब्त किए गए मोबाइल फोन और लैपटॉप के डेटा की जांच के दौरान कई नए नाम सामने आए। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई तेज की।
अधिकारियों के अनुसार, इस नेटवर्क में हर सदस्य की अलग भूमिका तय थी। कोई कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार करता था, तो कोई आर्थिक मदद पहुंचाने का काम करता था। कुछ लोग सोशल मीडिया के जरिए संपर्क बढ़ाने और लोगों को प्रभावित करने में सक्रिय बताए गए हैं। वहीं, कुछ आरोपियों पर दिल्ली में ठहरने की व्यवस्था कराने का आरोप है।
गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका
पुलिस ने जिन चार लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें पूर्वी दिल्ली के जामिया नगर निवासी तलमीज उर रहमान, नॉर्थ दिल्ली के परवेज अख्तर, पश्चिम दिल्ली के जतिन कपूर और भरतपुर निवासी हसन मोहम्मद शामिल हैं। अदालत में पेशी के बाद सभी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
जांच एजेंसियों का दावा है कि हसन मोहम्मद लंबे समय से इस नेटवर्क से जुड़ा था और पहले भी विवादित गतिविधियों में शामिल लोगों के संपर्क में रह चुका है। पुलिस के मुताबिक वह कथित तौर पर धर्म परिवर्तन और निकाह से जुड़े दस्तावेज तैयार करने में मदद करता था और जरूरत पड़ने पर भरतपुर से दिल्ली आता-जाता था।
तलमीज उर रहमान के बारे में कहा गया है कि वह नेटवर्क के मुख्य आरोपी के संपर्क में लगातार बना हुआ था और धार्मिक जमातों में भी साथ जाता था। वहीं, परवेज अख्तर पर प्रचार सामग्री और साहित्य उपलब्ध कराने का आरोप है। पुलिस का कहना है कि इन किताबों का इस्तेमाल लोगों को प्रभावित करने के लिए किया जाता था। जांच में यह भी सामने आया है कि वह आर्थिक सहायता पहुंचाने में भी भूमिका निभाता था।
ठिकाने और संपर्कों की जांच जारी
पुलिस के अनुसार, जतिन कपूर दिल्ली में रुकने की व्यवस्था उपलब्ध कराता था। अब एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क का दायरा और किन राज्यों तक फैला हुआ है। पुलिस ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में कुछ और लोगों से पूछताछ हो सकती है।
इस मामले में पहले भी कई राज्यों में छापेमारी कर 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस ने हाल ही में एक ऐसे व्यक्ति की संपत्ति पर भी कार्रवाई की थी, जिस पर विदेश से फंडिंग करने का आरोप है। फिलहाल सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच जारी है।