Corruption – पुलिस की वर्दी का दुरुपयोग कर गरीब मजदूर से वसूली
Corruption – बहराइच जिले के मोतीपुर थाने में तैनात उप निरीक्षक अमरेश गिरी और हेड कांस्टेबल शैलेंद्र यादव की गैरकानूनी गतिविधियां अब उनके लिए भारी पड़ गई हैं। इन दोनों पर गरीब मजदूर निजामुद्दीन से अवैध रूप से 30 हजार रुपये वसूलने का आरोप लगा है। घटना की जानकारी आईजी देवीपाटन रेंज अमित पाठक की भ्रष्टाचार निरोधी हेल्पलाइन पर मिलने वाली शिकायत से सामने आई, जिसने उनकी कथित काली करतूतों का पर्दाफाश किया।

जेल का डर दिखाकर किया गया धन की मांग
सूत्रों के अनुसार, उप निरीक्षक और हेड कांस्टेबल ने निजामुद्दीन को यह कहकर डराया कि अगर उसने राशि नहीं दी तो उसके खिलाफ अवैध खनन का मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा जाएगा। परिवार की स्थिति को देखते हुए, निजामुद्दीन ने लोगों से उधार लेकर 30 हजार रुपये जमा किए और भ्रष्ट पुलिसकर्मियों की मांग पूरी की। इससे यह स्पष्ट होता है कि वर्दीधारी अधिकारियों ने अपनी पद और शक्ति का गलत उपयोग किया।
आईजी की डिजिटल जांच और गोपनीय कार्रवाई
मामले की शिकायत मिलने के बाद आईजी अमित पाठक ने तुरंत भ्रष्टाचार निरोधी सेल को सक्रिय किया। गोपनीय तरीके से हुई प्रारंभिक जांच में ही आरोप सही पाए गए। इसके बाद क्षेत्राधिकारी मिहींपुरवा द्वारा विस्तृत जांच करवाई गई, जिसमें भी दोनों पुलिसकर्मियों की जवाबदेही सिद्ध हुई। इस प्रक्रिया के अंतर्गत उप निरीक्षक अमरेश गिरी और हेड कांस्टेबल शैलेंद्र यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
भ्रष्टाचार निरोधी नीति पर कड़ा रुख
आईजी अमित पाठक ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में विभाग में जीरो टॉलरेंस अपनाया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि हेल्पलाइन पर प्राप्त सभी शिकायतों की गंभीरता से जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले भी, बीते कुछ हफ्तों में आईजी ने 13 पुलिसकर्मियों को भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित किया था, जिससे यह संदेश दिया गया कि विभाग में किसी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
गरीबों की सुरक्षा और पुलिस भरोसेमंद बनाने की पहल
इस प्रकरण ने यह भी उजागर किया कि गरीब और संवेदनशील वर्ग के नागरिकों के लिए पुलिस का भरोसा बनाए रखना कितना जरूरी है। आईजी की त्वरित कार्रवाई ने यह संदेश दिया कि वर्दी का गलत इस्तेमाल करने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। अधिकारियों की जवाबदेही और पारदर्शिता को सुनिश्चित करने के लिए इस तरह की कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भविष्य में सख्त कार्यवाही की तैयारी
भ्रष्टाचार निरोधी हेल्पलाइन के माध्यम से मिलने वाली शिकायतों का गंभीरता से निवारण किया जा रहा है। आईजी ने यह भी संकेत दिया कि विभाग आगे भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रखेगा, जिससे अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग करने से बचें और जनता के बीच पुलिस पर भरोसा बना रहे।
निष्कर्ष
यह मामला न केवल भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाने का उदाहरण है, बल्कि यह दर्शाता है कि प्रशासन गरीब और कमजोर वर्ग के हितों की रक्षा के लिए तत्पर है। वर्दी का दुरुपयोग करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई से पुलिस विभाग में नैतिकता और जिम्मेदारी को बढ़ावा मिलेगा।



