उत्तर प्रदेश

FuelSupply – सीमावर्ती इलाकों में बढ़ी ईंधन मांग से गोरखपुर में दबाव

FuelSupply – उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और आसपास के जिलों में इन दिनों पेट्रोल और डीजल की असामान्य मांग ने प्रशासन और तेल कंपनियों दोनों की चिंता बढ़ा दी है। जिले में लगातार पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं। इसी मुद्दे पर गुरुवार को जिलाधिकारी दीपक मीणा की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में तीन बड़ी पेट्रोलियम कंपनियों के अधिकारियों ने दावा किया कि पिछले साल की तुलना में इस बार 33 प्रतिशत ज्यादा ईंधन की आपूर्ति की गई है। हालांकि जमीनी हालात इन दावों से मेल खाते नहीं दिख रहे।

fuel demand pressure in gorakhpur border areas

सीमावर्ती इलाकों में बढ़ी मांग पर सवाल

गोरखपुर मंडल के पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि नेपाल और बिहार से आने वाले वाहनों की वजह से स्थानीय स्तर पर ईंधन की खपत अचानक बढ़ गई है। पेट्रोल पंप मालिकों के अनुसार नेपाल में पेट्रोल और डीजल की कीमत भारत से काफी अधिक है, जबकि बिहार में टैक्स और सेस के कारण ईंधन महंगा बिक रहा है। ऐसे में बड़ी संख्या में वाहन चालक यूपी सीमा में प्रवेश करते ही टंकी फुल करा रहे हैं।

आंकड़ों के मुताबिक गोरखपुर जिले में कुल 246 पेट्रोल पंप संचालित हैं, जहां पिछले तीन महीनों में ईंधन बिक्री में 10 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। फरवरी के मुकाबले अप्रैल में पेट्रोल की बिक्री 1000 किलोलीटर से अधिक बढ़ी, जबकि डीजल की खपत में करीब 4160 किलोलीटर की वृद्धि दर्ज हुई। मई में यह दबाव और अधिक बढ़ गया है।

नेपाल और बिहार से जुड़ा है पूरा समीकरण

पेट्रोलियम कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि नेपाल में पेट्रोल लगभग 36 रुपये और डीजल करीब 40 रुपये प्रति लीटर महंगा है। वहीं बिहार में डीजल और पेट्रोल यूपी की तुलना में करीब 10 रुपये ज्यादा बिक रहा है। यही कारण है कि बिहार और नेपाल जाने वाले वाहन चालक रास्ते में पड़ने वाले गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर और महराजगंज के पेट्रोल पंपों पर भारी संख्या में पहुंच रहे हैं।

सीमावर्ती क्षेत्रों के आंकड़े भी इस दबाव की पुष्टि कर रहे हैं। सोनौली और ठूठीबारी बॉर्डर से हर दिन सैकड़ों मालवाहक वाहन, पर्यटक बसें और निजी गाड़ियां नेपाल में प्रवेश करती हैं। इसी तरह कुशीनगर के सलेमगढ़ बॉर्डर से बड़ी संख्या में वाहन बिहार की ओर जाते हैं। स्थानीय व्यापारियों का मानना है कि यही वजह है कि सीमा से पहले वाले जिलों में ईंधन की मांग तेजी से बढ़ रही है।

प्रशासन ने बनाई निगरानी टीम

ईंधन संकट की शिकायतों के बाद जिला प्रशासन ने निरीक्षण अभियान शुरू किया है। जिला पूर्ति अधिकारी रामेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि पेट्रोल पंपों की निगरानी के लिए 20 सदस्यीय टीम बनाई गई है। यह टीम विभिन्न इलाकों में जाकर यह जांच कर रही है कि कहीं कोई पंप ड्राई तो नहीं हो गया।

अधिकारियों के अनुसार जहां भी पेट्रोल या डीजल खत्म होने की सूचना मिल रही है, वहां संबंधित तेल कंपनियों को तुरंत आपूर्ति बढ़ाने के निर्देश दिए जा रहे हैं। प्रशासन का दावा है कि सूचना मिलने के तीन से चार घंटे के भीतर संबंधित पंप तक ईंधन पहुंचाया जा रहा है।

कालाबाजारी की आशंका भी बढ़ी

सीमावर्ती जिलों में बढ़ती मांग के बीच अवैध ईंधन कारोबार की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। हाल ही में कुशीनगर में पुलिस ने एक संदिग्ध मोबाइल टैंकर पकड़ा था, जिसमें करीब 3000 लीटर ईंधन भरा हुआ मिला। मामले की जांच जारी है।

कुछ पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि बड़ी मात्रा में गैलन लेकर आने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ी है। पूछताछ करने पर कई बार विवाद की स्थिति बन जाती है। पंप संचालकों ने प्रशासन और तेल कंपनियों से ऐसे मामलों में सख्ती की मांग की है ताकि सामान्य उपभोक्ताओं को परेशानी न हो।

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