IncomeTax – छात्रा के नाम पर करोड़ों के कारोबार का मामला, जांच की मांग…
IncomeTax – उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में एक बीए छात्रा के नाम पर कथित तौर पर करोड़ों रुपये के कारोबार का मामला सामने आने के बाद जांच की मांग उठी है। छात्रा को आयकर विभाग की ओर से समन मिलने पर परिवार हैरान रह गया। नोटिस में लगभग 20.98 करोड़ रुपये की कथित अघोषित आय से संबंधित जानकारी मांगी गई है। छात्रा का कहना है कि उसके आधार और पैन कार्ड का दुरुपयोग कर उसके नाम से फर्जी फर्म संचालित की गई।

आयकर विभाग से मिला समन
गिरिजाबाग क्षेत्र निवासी रश्मि सविता ने बताया कि उन्हें आयकर विभाग, चंडीगढ़ की ओर से आयकर अधिनियम की धारा 131(1A) के तहत समन प्राप्त हुआ। नोटिस में निर्धारित तिथि तक अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया था। इस तरह का समन आमतौर पर वित्तीय लेनदेन या आय से जुड़े मामलों की जांच के दौरान जारी किया जाता है।
आर्थिक स्थिति को लेकर परिवार ने जताई चिंता
रश्मि के परिजनों के अनुसार, परिवार की आजीविका मजदूरी पर निर्भर है। ऐसे में करोड़ों रुपये के कारोबार और आय से जुड़ा नोटिस मिलने के बाद पूरा परिवार चिंता में है। उनका कहना है कि उनका किसी व्यापारिक गतिविधि से कोई संबंध नहीं है और इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
आधार और पैन के दुरुपयोग का आरोप
छात्रा ने दावा किया है कि जांच के दौरान उन्हें जानकारी मिली कि उनके आधार और पैन कार्ड का कथित रूप से इस्तेमाल कर दिल्ली के बुराड़ी क्षेत्र में आरएस इंटरप्राइजेज नाम से एक फर्म पंजीकृत की गई थी। उनके अनुसार, यह फर्म 15 जनवरी 2025 को शुरू हुई और 9 मई 2025 को बंद कर दी गई। इस दौरान उनके दस्तावेजों का कथित रूप से बिना जानकारी के उपयोग किया गया।
अधिकारियों से की कार्रवाई की मांग
रश्मि ने आयकर विभाग को अपना जवाब भेजने के साथ ही जनसुनवाई पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से आधार और पैन कार्ड के कथित दुरुपयोग की जांच कराने की मांग की है। इसके अलावा पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर मामले में शामिल लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और कानूनी कार्रवाई करने की अपील की है।
जांच के बाद सामने आएंगे तथ्य
फिलहाल संबंधित विभागों द्वारा मामले की जांच की जा रही है। जांच के दौरान दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और फर्म के पंजीकरण से जुड़े तथ्यों का सत्यापन किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दस्तावेजों का उपयोग किसने और किन परिस्थितियों में किया।