उत्तर प्रदेश

Kanpur GST Tax Fraud: कानपुर में ‘लेडी गैंग’ के फर्जीवाड़े का हुआ सनसनीखेज खुलासा, पढ़ें पूरी खबर

Kanpur GST Tax Fraud: उत्तर प्रदेश के औद्योगिक केंद्र कानपुर में भ्रष्टाचार और जालसाजी का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने विभागीय अधिकारियों की नींद उड़ा दी है। पिछले कई वर्षों से कागजों पर करोड़ों का कारोबार दिखाकर सरकारी खजाने को चूना लगाने वाली दो फर्जी फर्मों का भंडाफोड़ हुआ है। इस पूरे खेल में (organized tax evasion) की गहरी साजिश रची गई थी, जिसके जरिए सरकारी राजस्व को सीधे तौर पर निशाना बनाया गया। कानपुर के बेकनगंज थाने में दर्ज यह मामला अब शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है।

Kanpur GST Tax Fraud
Kanpur GST Tax Fraud

हीरामनपुरवा के रिहायशी इलाकों में छिपा ‘बोगस’ कारोबार

जांच में खुलासा हुआ है कि हीरामनपुरवा के एक सामान्य आवासीय पते पर साल 2018 से इन फर्जी फर्मों का संचालन दिखाया जा रहा था। राज्य वस्तु एवं सेवा कर (SGST) विभाग के उपायुक्त धीरेंद्र कुमार की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर के मुताबिक, कोमल ट्रेडर्स और स्टार इंटरप्राइजेज नामक इन संस्थाओं ने (fictitious business) के जरिए करोड़ों का लेनदेन दिखाया। चौंकाने वाली बात यह है कि जिस पते पर फुटवियर और प्लास्टिक के सामान का थोक व्यापार होना बताया गया था, वहां रहने वाले लोग ऐसी किसी भी व्यावसायिक गतिविधि से पूरी तरह अनजान थे।

कोमल ट्रेडर्स: आंकड़ों की जादूगरी और करोड़ों का खेल

शबाना नाम की महिला के नाम पर पंजीकृत ‘कोमल ट्रेडर्स’ ने साल 2018-19 में लगभग 9 करोड़ 71 लाख रुपये का व्यापार दिखाया था। अगले ही साल 2019-20 में यह आंकड़ा बढ़कर 19 करोड़ 9 लाख रुपये तक पहुंच गया। इस भारी भरकम व्यापार के आधार पर (GST liability) की गणना की गई तो विभाग को पता चला कि फर्म पर 5 करोड़ 14 लाख रुपये का टैक्स बनता था। हालांकि, शातिर जालसाजों ने इस टैक्स को चुकाने के बजाय बोगस दस्तावेजों का सहारा लिया और पूरी राशि को ठिकाने लगा दिया।

इनपुट टैक्स क्रेडिट के जरिए राजस्व पर डाका

जालसाजी का तरीका इतना शातिर था कि विभाग को लंबे समय तक इसकी भनक नहीं लगी। फर्म ने फर्जी बिल और कागजात तैयार कर (Input Tax Credit) यानी आईटीसी का गैर-कानूनी लाभ उठाया। सरकार को 5 करोड़ 14 लाख रुपये का टैक्स देने के बजाय, आरोपियों ने इसे फर्जी आईटीसी के साथ समायोजित कर दिया। इसी तरह स्टार इंटरप्राइजेज ने भी तब्बुसम फातिमा के नाम पर 7 करोड़ 35 लाख का व्यापार दिखाकर 1.32 करोड़ रुपये का आईटीसी क्लेम कर लिया, जो सीधे तौर पर जनता के पैसे की लूट थी।

एसआईबी की छापेमारी और बेनकाब होता सच

विशेष जांच शाखा (SIB) ने जब इन फर्मों के दिए गए पते पर अचानक छापा मारा, तो वहां का नजारा देख अधिकारी दंग रह गए। करोड़ों का टर्नओवर दिखाने वाली फर्मों के नाम पर वहां सिर्फ एक साधारण मकान मौजूद था। जांचकर्ताओं को मौके पर (no business activity) के सबूत मिले, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि यह पूरा तंत्र केवल दस्तावेजों और कंप्यूटर स्क्रीन तक सीमित था। आस-पड़ोस के लोगों से पूछताछ में भी फर्म के अस्तित्व को लेकर कोई जानकारी नहीं मिल सकी, जिससे धोखाधड़ी की पुष्टि हो गई।

पति-पत्नी और संगठित गिरोह का संदिग्ध नेटवर्क

उपायुक्त धीरेंद्र कुमार ने बताया कि इस फर्जीवाड़े के पीछे एक संगठित गैंग के काम करने की प्रबल आशंका है। इस मामले में शबाना, तब्बुसम फातिमा, दिलशाद आलम, नौशाद, महफूज और मर्सरत को नामजद किया गया है। जांच में सामने आया है कि दिलशाद और मर्सरत (husband and wife) हैं जो इस पूरे सिंडिकेट को संचालित कर रहे थे। पुलिस अब इस बिंदु पर भी गहराई से जांच कर रही है कि क्या इन महिलाओं के दस्तावेजों का इस्तेमाल उनकी जानकारी के बिना या उन्हें धोखे में रखकर किया गया था।

नामजदगी के बाद पुलिस की धरपकड़ तेज

एफआईआर दर्ज होने के बाद कानपुर पुलिस और एसजीएसटी विभाग की संयुक्त टीमें आरोपियों की तलाश में जुट गई हैं। इस (criminal investigation) के दायरे में अब वे लोग भी आ सकते हैं जिन्होंने इन फर्जी फर्मों को बैंक खाते खोलने या अन्य कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने में मदद की थी। विभाग यह भी सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि इस गैंग द्वारा बनाई गई अन्य संभावित डमी फर्मों का भी पता लगाया जा सके ताकि भविष्य में ऐसी बड़ी चोरी को रोका जा सके।

आर्थिक अपराधियों पर कसता कानून का शिकंजा

कानपुर का यह मामला राज्य में आर्थिक अपराधों के खिलाफ चल रही बड़ी कार्रवाई का हिस्सा माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि (shell companies) बनाकर टैक्स चोरी करने वालों के खिलाफ अब जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। इस खुलासे के बाद अन्य व्यापारियों में भी हड़कंप मचा हुआ है। विभाग का लक्ष्य न केवल आरोपियों को जेल भेजना है, बल्कि चोरी की गई 6.46 करोड़ रुपये की राजस्व राशि की वसूली करना भी है ताकि सरकारी खजाने की भरपाई हो सके।

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