OmPrakashRajbhar – आजमगढ़ में सामाजिक समरसता रैली की तैयारी चालू
OmPrakashRajbhar – उत्तर प्रदेश की राजनीति में पूर्वांचल का प्रभावशाली चेहरा माने जाने वाले सुभासपा अध्यक्ष और प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर रविवार को आजमगढ़ में बड़ी जनसभा करने जा रहे हैं। इस कार्यक्रम को ‘सामाजिक समरसता रैली’ नाम दिया गया है। राजनीतिक हलकों में इसे मिशन 2027 की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, खासकर इसलिए क्योंकि आजमगढ़ को लंबे समय से समाजवादी पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है।

आजमगढ़ का सियासी परिदृश्य
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में आजमगढ़ जिले की सभी 10 सीटों पर समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की थी। उस समय ओम प्रकाश राजभर सपा के साथ गठबंधन में थे और उनके प्रभाव को उस जीत का अहम कारण माना गया। अब राजनीतिक परिस्थितियां बदल चुकी हैं। राजभर एनडीए के साथ हैं और उन्हीं सीटों पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं, जहां पहले वे सपा के सहयोगी के रूप में सक्रिय थे।
रैली का स्थान और राजनीतिक संदेश
यह रैली अतरौलिया विधानसभा क्षेत्र के जनता इंटर कॉलेज, अहिरौला में आयोजित की जाएगी। सुभासपा के नेताओं का दावा है कि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग जुटेंगे। इस रैली में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह सहित एनडीए से जुड़े कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी प्रस्तावित है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह उपस्थिति गठबंधन की सामूहिक रणनीति का संकेत है, जिसमें पिछड़े और अति-पिछड़े वर्गों को केंद्र में रखा गया है।
पूर्वांचल में समीकरण बदलने की कोशिश
ओम प्रकाश राजभर लंबे समय से खुद को पूर्वांचल में पिछड़े वर्गों की आवाज के रूप में पेश करते रहे हैं। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए वे यह संदेश देना चाहते हैं कि उनके समर्थक वर्ग अब भी उनके साथ हैं। अतरौलिया क्षेत्र सामाजिक और जातीय समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में यहां की भीड़ को राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जाएगा।
सपा के गढ़ में चुनौती
आजमगढ़ में समाजवादी पार्टी का संगठनात्मक ढांचा मजबूत रहा है। पिछले चुनावों में यहां एम-वाई समीकरण की चर्चा प्रमुख रही। अब सुभासपा और एनडीए मिलकर वैकल्पिक सामाजिक गठजोड़ तैयार करने की कोशिश में हैं। पार्टी कार्यकर्ता गांव-गांव संपर्क कर लोगों को रैली में शामिल होने का निमंत्रण दे रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि कार्यक्रम को शक्ति प्रदर्शन के रूप में पेश किया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषण
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि रैली में अपेक्षित संख्या में लोग जुटते हैं तो इसका असर पूर्वांचल की अन्य सीटों पर भी दिख सकता है। हालांकि चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन ऐसी रैलियां भविष्य की रणनीति का संकेत देती हैं। आजमगढ़ जैसे जिले में भीड़ जुटाना किसी भी दल के लिए राजनीतिक संदेश देने जैसा माना जाता है।
आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि यह रैली केवल एक आयोजन तक सीमित रहती है या फिर क्षेत्रीय राजनीति में नए समीकरणों की शुरुआत का आधार बनती है।



