OSHCode – यूपी में शॉप एक्ट की जगह लागू होगा नया श्रम सुरक्षा ढांचा
OSHCode- उत्तर प्रदेश में लंबे समय से लागू दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान अधिनियम में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार पुराने शॉप एक्ट को समाप्त कर उसकी जगह व्यवसायिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य (OSH) कोड लागू करने की तैयारी में है। इस बदलाव के बाद प्रदेश के लाखों दुकानों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, कार्यालयों, होटल और रेस्टोरेंट सहित अन्य संस्थानों को नए नियमों के अनुरूप पंजीकरण कराना होगा। प्रस्ताव को लेकर श्रम विभाग ने आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है।

नए नियमों के तहत बदलेगी पंजीकरण व्यवस्था
वर्तमान व्यवस्था में संशोधन के बाद 20 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों को पंजीकरण से छूट दी गई थी। हालांकि, नए OSH कोड में 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों के लिए पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रावधान है। इसी अंतर को देखते हुए राज्य सरकार पुराने कानून को समाप्त कर नई श्रम संहिता लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, ताकि सभी नियम एक समान व्यवस्था के तहत संचालित हो सकें।
छह दशक पुराने कानून की होगी विदाई
उत्तर प्रदेश में दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान अधिनियम वर्ष 1962 से लागू है। पहले किसी भी कर्मचारी वाले प्रतिष्ठान के लिए श्रम विभाग में पंजीकरण आवश्यक था। बाद में इसमें संशोधन कर 20 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों को राहत दी गई। अब केंद्र सरकार की नई श्रम संहिताओं के अनुरूप राज्यों को भी अपने कानूनों में बदलाव करना है। इसी प्रक्रिया के तहत प्रदेश में शॉप एक्ट को समाप्त करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
दोहरे पंजीकरण की स्थिति होगी समाप्त
श्रम विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मौजूदा नियमों और नए OSH कोड के बीच पंजीकरण को लेकर अलग-अलग प्रावधान होने से भ्रम की स्थिति बन रही थी। केंद्र सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि व्यापारियों को अलग-अलग कानूनों के तहत दोहरा पंजीकरण नहीं कराना होगा। इसी कारण श्रमायुक्त कार्यालय ने पुराने अधिनियम को समाप्त करने का प्रस्ताव शासन को भेजा है। अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद नई व्यवस्था लागू की जाएगी।
महिला श्रमिकों के लिए नई सुविधा
इसी बीच राज्य सरकार की वीबी जीरामजी योजना में महिला श्रमिकों के लिए बच्चों की देखभाल से जुड़ा नया प्रावधान भी शामिल किया गया है। योजना के तहत यदि किसी कार्यस्थल पर पांच वर्ष से कम आयु के कम से कम पांच बच्चे मौजूद होंगे, तो वहीं उनकी देखभाल की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए महिला श्रमिकों में से ही एक को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी और उसे निर्धारित मजदूरी का पूरा भुगतान किया जाएगा।
कार्यस्थल पर मिलेगी बच्चों की देखभाल
नई व्यवस्था के तहत बच्चों के लिए स्वच्छ पेयजल और प्राथमिक उपचार जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि महिला श्रमिक छोटे बच्चों की देखभाल की चिंता के बिना काम कर सकें। अधिकारियों का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की कार्य भागीदारी बढ़ेगी और उन्हें अधिक सुरक्षित व सुविधाजनक कार्य वातावरण मिल सकेगा।