उत्तर प्रदेश

RoadProjects – चुनाव से पहले सड़क परियोजनाओं पर सरकार ने बढ़ाई रफ्तार

RoadProjects – उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले सरकार ने सड़क और बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने की तैयारी शुरू कर दी है। लोक निर्माण विभाग ने पांच करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली सभी परियोजनाओं के लिए नई समयसीमा तय की है। सरकार का उद्देश्य है कि चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले प्रमुख सड़कें, पुल और फ्लाईओवर जनता के लिए तैयार कर दिए जाएं।

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राज्य सरकार का मानना है कि बेहतर सड़क नेटवर्क से न केवल यातायात व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच संपर्क भी आसान बनेगा। इसी को ध्यान में रखते हुए निर्माण कार्यों की निगरानी और समयबद्ध पूरा कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

परियोजनाओं के लिए तय हुई अलग-अलग समयसीमा

लोक निर्माण विभाग की नई गाइडलाइन के अनुसार अब परियोजनाओं को उनकी लागत के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है। प्रत्येक श्रेणी के लिए अधिकतम निर्माण अवधि निर्धारित की गई है ताकि काम में अनावश्यक देरी न हो।

निर्देशों के मुताबिक, 20 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं को नौ महीने के भीतर पूरा करना होगा। 20 से 100 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के लिए 15 महीने की समयसीमा तय की गई है। वहीं 100 से 300 करोड़ रुपये के बड़े प्रोजेक्ट्स को अधिकतम 18 महीने में पूरा करना होगा। 300 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाओं को मेगा प्रोजेक्ट श्रेणी में रखा गया है, जिनके लिए 30 महीने की समयसीमा निर्धारित की गई है।

सभी विधानसभा क्षेत्रों में विकास कार्यों पर जोर

सरकार ने प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों में विकास कार्यों को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाने की योजना बनाई है। इसी के तहत कुल 837 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें नई सड़कों के निर्माण के अलावा पुराने पुलों की मरम्मत और मजबूतीकरण, रेलवे ओवरब्रिज तथा प्रमुख चौराहों के चौड़ीकरण जैसे कार्य भी शामिल हैं।

सूत्रों के अनुसार, परियोजनाओं के लिए बजट आवंटन भी कर दिया गया है ताकि निर्माण कार्य धन की कमी के कारण प्रभावित न हों। विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि सभी परियोजनाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए।

गुणवत्ता और पारदर्शिता पर विशेष फोकस

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता न किया जाए। सरकार चाहती है कि सड़कों के निर्माण और मरम्मत में पारदर्शिता बनी रहे और जनता को बेहतर सुविधाएं मिलें।

इसी उद्देश्य से परियोजनाओं का थर्ड पार्टी ऑडिट कराने की भी योजना बनाई गई है। इसके तहत स्वतंत्र एजेंसियां निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच करेंगी। यदि कहीं लापरवाही या मानकों में कमी पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई की जा सकती है।

समय पर काम पूरा न होने पर होगी कार्रवाई

सरकार ने निर्माण एजेंसियों और अधिकारियों को तय समयसीमा का सख्ती से पालन करने को कहा है। अधिकारियों के अनुसार, यदि किसी परियोजना में अनावश्यक देरी होती है तो जिम्मेदार ठेकेदारों और अभियंताओं के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

प्रदेश में पहले से चल रहे गड्ढामुक्त सड़क अभियान के साथ इन नई परियोजनाओं को जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार का दावा है कि आने वाले महीनों में प्रदेश के कई हिस्सों में सड़क संपर्क व्यवस्था में बड़ा बदलाव दिखाई देगा।

चुनावी तैयारी के साथ विकास पर फोकस

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले सड़क और बुनियादी ढांचे पर बढ़ा फोकस सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। बेहतर कनेक्टिविटी और तेज निर्माण कार्यों के जरिए सरकार विकास संबंधी संदेश को मजबूत करना चाहती है।

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