Shah Jahan Urs at Taj Mahal: मोहब्बत की निशानी देखने उमड़ा लोगों का सैलाब, शाहजहाँ के उर्स पर खुला जन्नत का दरवाजा
Shah Jahan Urs at Taj Mahal: दुनिया के सात अजूबों में शुमार ताजमहल में मुगल बादशाह शाहजहाँ का सालाना उर्स बेहद शान-ओ-शौकत के साथ शुरू हो गया है। इस खास मौके पर ताज के दीदार के लिए (Historical Monuments India) के शौकीनों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे आगरा की सड़कों से लेकर स्मारक के अंदर तक तिल रखने की जगह नहीं बची। उर्स के पहले ही दिन हजारों की संख्या में आए सैलानियों ने उस ऐतिहासिक पल को अपनी आंखों में कैद किया, जब शाहजहाँ और मुमताज की असली कब्रों के दीदार के लिए तहखाने के दरवाजे खोले गए।

मुफ्त प्रवेश ने तोड़े भीड़ के सारे पुराने रिकॉर्ड
शाहजहाँ के उर्स के उपलक्ष्य में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने ताजमहल में पर्यटकों का प्रवेश पूरी तरह नि:शुल्क कर दिया है। इस घोषणा के बाद देखते ही देखते करीब 60 हजार से अधिक पर्यटक (Tourist Footfall Statistics) के रूप में दर्ज किए गए, जो स्मारक की क्षमता से कहीं अधिक थे। भीड़ इतनी जबरदस्त थी कि एंट्री गेट से लेकर मुख्य गुंबद तक लंबी कतारें लगी रहीं और सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने के लिए एएसआई के अधिकारियों को अपनी पूरी ताकत झोंकनी पड़ी।
सीआईएसएफ के जवानों ने संभाला सुरक्षा का मोर्चा
भारी भीड़ को नियंत्रित करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था, लेकिन जवानों ने मुस्तैदी दिखाई। ताज सुरक्षा पुलिस और (Security Management Protocols) के तहत सीआईएसएफ के जवानों ने हर मोर्चे पर भीड़ को संभाला ताकि कोई अनहोनी न हो। हालांकि, पर्यटकों की संख्या इतनी अधिक थी कि जवानों को कतारें व्यवस्थित करने और लोगों को आगे बढ़ाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी, जिससे स्मारक परिसर में दिनभर गहमागहमी बनी रही।
गुस्ल की रस्म के साथ शुरू हुआ 371वां सालाना उर्स
मुगल बादशाह शाहजहाँ के 371वें उर्स का आगाज पूरी धार्मिक रवायतों के साथ किया गया, जिसकी शुरुआत ‘गुस्ल’ की रस्म से हुई। एएसआई और उर्स कमेटी के पदाधिकारियों ने (Traditional Rituals) का पालन करते हुए कब्रों पर फलों की चादर चढ़ाई और दुआएं मांगी। यह आयोजन आगामी 17 जनवरी तक चलेगा, जिसमें हर दिन अलग-अलग धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे, जो मुग़लकालीन परंपराओं की जीवंत झांकी पेश करते हैं।
कव्वाली और संदल की रस्म बढ़ाएगी उर्स की रौनक
उर्स के दूसरे दिन यानी 16 जनवरी को ताजमहल के प्रांगण में संदल की रस्म अदा की जाएगी, जो अकीदतमंदों के लिए विशेष महत्व रखती है। इस दौरान (Cultural Performances) के रूप में कव्वाली का भी आयोजन होगा, जिससे ताज का वातावरण सूफियाना संगीत से सराबोर हो उठेगा। उर्स के दौरान होने वाले ये कार्यक्रम न केवल धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि पर्यटकों के लिए भी एक अनूठा सांस्कृतिक अनुभव साबित हो रहे हैं।
रिकॉर्ड तोड़ लंबी चादरपोशी और लंगर का आयोजन
उर्स के अंतिम दिन यानी 17 जनवरी को ताजमहल में एक भव्य नजारा देखने को मिलेगा, जब सात रंगों की विशाल चादर चढ़ाई जाएगी। इस बार (Chadar Poshi Ceremony) के लिए करीब 1,720 मीटर लंबी चादर तैयार की गई है, जिसे हजारों लोग एक साथ लेकर मुख्य गुंबद तक पहुंचेंगे। इसके साथ ही गरीब और जरूरतमंदों के लिए लंगर का भी वितरण किया जाएगा, जो भाईचारे और सेवा का संदेश देता है।
अपनों से बिछड़े परिजनों के लिए पुलिस बनी देवदूत
भीड़ का आलम यह था कि ताजमहल घूमने आए करीब तीन दर्जन से अधिक लोग, जिनमें बच्चे और बुजुर्ग शामिल थे, अपने परिवार से बिछड़ गए। ऐसे में (Public Safety Services) प्रदान करते हुए ताज सुरक्षा पुलिस और सीआईएसएफ की टीम ने सक्रियता दिखाई और लाउडस्पीकर के माध्यम से घोषणाएं कर बिछड़े हुए लोगों को उनके परिजनों से मिलवाया। पुलिस की इस तत्परता ने कई रोते हुए चेहरों पर मुस्कान वापस लौटा दी।
हिंदू महासभा ने फूंका विरोध का बिगुल
एक तरफ जहाँ उर्स की खुशियां मनाई जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने इस आयोजन का पुरजोर विरोध किया है। महासभा के कार्यकर्ताओं ने (Protest and Demonstrations) करते हुए एएसआई कार्यालय के बाहर पुतला फूंका और नारेबाजी की। मीना दिवाकर और रवि चाहर जैसे पदाधिकारियों की मौजूदगी में हुए इस विरोध प्रदर्शन ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है, हालांकि ताज के अंदर शांतिपूर्ण तरीके से कार्यक्रम जारी हैं।
शुक्रवार को दोपहर बाद मिलेगी मुफ्त एंट्री
शुक्रवार का दिन होने के कारण ताजमहल सुबह के वक्त आम पर्यटकों के लिए बंद रहेगा, क्योंकि यहाँ नमाज अदा की जाती है। हालांकि, (Free Entry Timings) के अनुसार दोपहर दो बजे के बाद पर्यटकों के लिए दरवाजे फिर से खोल दिए जाएंगे और प्रवेश पूरी तरह नि:शुल्क रहेगा। स्थानीय नमाजियों के लिए व्यवस्था हमेशा की तरह सामान्य रहेगी, जबकि पर्यटकों के लिए यह शाहजहाँ और मुमताज की असली कब्रों को देखने का आखिरी पड़ाव होगा।
लापरवाही का मंजर और हर तरफ जूते-चप्पल
नि:शुल्क प्रवेश और भारी भीड़ के कारण ताजमहल परिसर में कुछ अव्यवस्थाएं भी देखने को मिलीं, जिससे स्मारक की गरिमा पर सवाल उठे। कई पर्यटकों ने नियमों की अनदेखी करते हुए (Waste Management Issues) को बढ़ावा दिया और मुख्य गुंबद के आसपास ही जूते-चप्पल उतार दिए। हालांकि सुरक्षा बल लगातार लोगों को टोकते रहे, लेकिन पर्यटकों की भारी संख्या के सामने नियमों का पालन करवाना काफी कठिन साबित हो रहा था।



