उत्तर प्रदेश

UPPanchayatElections – समय पर चुनाव को लेकर हाईकोर्ट में टली सुनवाई

UPPanchayatElections – उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव समय पर कराने की मांग से जुड़ी याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में बुधवार को सुनवाई नहीं हो सकी। समयाभाव के चलते यह मामला टल गया और अब इसकी सुनवाई अगले सप्ताह होने की संभावना जताई जा रही है। इस मामले को लेकर पहले ही अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग से विस्तृत जवाब मांगा था, जिससे चुनाव कार्यक्रम को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके।

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संविधान के प्रावधानों पर कोर्ट की नजर

पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि संविधान के अनुच्छेद 243E के तहत पंचायतों का कार्यकाल उनकी पहली बैठक से पांच वर्ष तक ही सीमित होता है। अदालत ने यह भी कहा था कि इस अवधि को किसी भी स्थिति में बढ़ाया नहीं जा सकता। इसी आधार पर कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग से यह बताने को कहा था कि तय समयसीमा के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी कराना संभव है या नहीं।

चुनाव कार्यक्रम को लेकर उठे सवाल

याचिका में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों की पहली बैठक 27 मई 2021 को हुई थी, जिसके अनुसार उनका कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। ऐसे में यह जरूरी है कि नई पंचायतों के चुनाव समय रहते पूरे कराए जाएं। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यदि चुनाव में देरी होती है, तो यह संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ होगा।

मतदाता सूची में देरी बनी चिंता का कारण

मामले में एक अहम मुद्दा मतदाता सूची के प्रकाशन को लेकर भी उठाया गया है। याचिका के अनुसार, मतदाता सूची जारी करने की तारीख कई बार बदली जा चुकी है। पहले यह प्रक्रिया दिसंबर 2025 तक पूरी होनी थी, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर मार्च 2026 किया गया और अब नई तारीख 15 अप्रैल तय की गई है। इस लगातार बदलाव से चुनाव कार्यक्रम प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

आरक्षण प्रक्रिया में लग सकता है अतिरिक्त समय

याचिकाकर्ता ने यह भी कहा है कि मतदाता सूची के अंतिम रूप के बाद निर्वाचन क्षेत्रों के आरक्षण की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसमें अतिरिक्त समय लग सकता है। इससे पूरे चुनाव कार्यक्रम में देरी होने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या तय समयसीमा के भीतर सभी औपचारिकताएं पूरी करना संभव होगा।

राज्य निर्वाचन आयोग से मांगा गया जवाब

हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया है कि वह हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करे कि 15 अप्रैल तक मतदाता सूची जारी होने के बाद 26 मई तक चुनाव प्रक्रिया पूरी कराई जा सकती है या नहीं। यह जवाब मामले के निपटारे में अहम भूमिका निभाएगा।

अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें

इस मामले में अधिवक्ता इम्तियाज हुसैन द्वारा दायर जनहित याचिका पर अब अगली सुनवाई का इंतजार किया जा रहा है। कोर्ट के रुख को देखते हुए यह मामला संवैधानिक महत्व का बन गया है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि चुनाव तय समय पर होंगे या प्रक्रिया में बदलाव की जरूरत पड़ेगी।

संवैधानिक समयसीमा पर बना दबाव

पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि पंचायत चुनाव केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि संवैधानिक जिम्मेदारी भी है। ऐसे में समयसीमा का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है। अब सभी की नजर हाईकोर्ट की अगली सुनवाई और राज्य निर्वाचन आयोग के जवाब पर टिकी हुई है।

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