WomenReservation – भाजपा संगठन में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण से मिली नई चुनौती
WomenReservation – भारतीय जनता पार्टी ने अपने संगठनात्मक ढांचे में एक अहम बदलाव करते हुए पहली बार जिला स्तर पर एक-तिहाई पद महिलाओं के लिए आरक्षित करने का निर्णय लिया है। 21 सदस्यीय जिला कार्यकारिणी में अब सात पद महिलाओं को दिए जाएंगे। इस कदम को जहां महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में बड़ा प्रयास माना जा रहा है, वहीं जमीनी स्तर पर इसे लागू करना पार्टी के लिए आसान नहीं साबित हो रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में उपयुक्त महिला चेहरों की तलाश कठिन
पार्टी सूत्रों के अनुसार, कई जिलों खासकर ग्रामीण इलाकों में सक्रिय और अनुभवी महिला कार्यकर्ताओं की पहचान करना चुनौती बन गया है। महानगरों में कुछ हद तक नाम सामने आ रहे हैं, लेकिन अधिकांश जिलों में स्थिति अलग है। जिला स्तर के पदाधिकारियों और पर्यवेक्षकों को सात योग्य महिला उम्मीदवारों की सूची तैयार करने में कठिनाई हो रही है।
राजनीतिक गतिविधियों में लंबे समय से सक्रिय पुरुष कार्यकर्ताओं की संख्या अधिक होने के कारण सिफारिशों में भी पुरुष नाम ही प्रमुखता से सामने आ रहे हैं। इससे संगठन के सामने संतुलन बनाना और भी जटिल हो गया है।
संगठनात्मक प्रक्रिया में तय किए गए मानक
प्रदेश स्तर से भेजे गए पर्यवेक्षकों को एक विस्तृत दिशा-निर्देश सूची दी गई है, जिसमें चयन की प्रक्रिया और मानकों को स्पष्ट किया गया है। इसमें आयु सीमा, अनुभव, स्थानीय स्तर पर स्वीकार्यता और विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने जैसे पहलुओं को शामिल किया गया है।
इन सभी मानकों के बीच महिलाओं के लिए सात पद अनिवार्य करना सबसे प्रमुख शर्त के रूप में रखा गया है। यही बिंदु कई जिलों में प्रक्रिया को धीमा कर रहा है, क्योंकि तय मानकों पर खरे उतरने वाले नाम सीमित संख्या में मिल रहे हैं।
महिला आरक्षण के फैसले की पृष्ठभूमि
यह निर्णय व्यापक स्तर पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की नीति का हिस्सा माना जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा 2023 में लागू किए गए नारी शक्ति वंदन अधिनियम के बाद पार्टी ने संगठन में भी इसी दिशा में कदम बढ़ाया है। इसके तहत भविष्य में विधायी निकायों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान किया गया है।
संगठन में इस पहल को उसी सोच के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है, ताकि जमीनी स्तर से ही महिलाओं की भागीदारी को मजबूत किया जा सके।
पुरुष कार्यकर्ताओं में भी असमंजस की स्थिति
इस बदलाव का असर संगठन के उन पुरुष कार्यकर्ताओं पर भी पड़ रहा है, जो लंबे समय से जिला कार्यकारिणी में शामिल होने की उम्मीद लगाए हुए थे। एक-तिहाई पद आरक्षित होने से कई सक्रिय पुरुषों को इस बार मौका नहीं मिल पाने की संभावना है, जिससे भीतर ही भीतर असंतोष की स्थिति बन रही है।
हालांकि पार्टी नेतृत्व का मानना है कि संगठन में संतुलित प्रतिनिधित्व के लिए यह कदम जरूरी है। लेकिन स्थानीय स्तर पर इसे लागू करने में आने वाली व्यावहारिक दिक्कतें सामने आ रही हैं।
संभावित समाधान और आगे की रणनीति
जानकारी के मुताबिक, कई जिलों से प्रदेश नेतृत्व को यह फीडबैक भेजा गया है कि कुछ स्थानों पर मानकों में लचीलापन रखा जाए या चयन प्रक्रिया के लिए अतिरिक्त समय दिया जाए। माना जा रहा है कि जहां ज्यादा दिक्कत है, वहां व्यावहारिक समाधान तलाशे जा सकते हैं।
यह बदलाव संगठनात्मक रूप से बड़ा कदम है, लेकिन इसके सफल क्रियान्वयन के लिए जमीनी स्तर पर तैयारी और संसाधनों की जरूरत होगी। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि पार्टी इस नई व्यवस्था को किस तरह संतुलित तरीके से लागू करती है।



