उत्तराखण्ड

BSF – काठगोदाम स्टेशन पर अचेत मिले जवान की मौत, जहरखुरानी की आशंका

BSF – उत्तराखंड के काठगोदाम रेलवे स्टेशन पर बीएसएफ के एक जवान अचेत अवस्था में मिलने के बाद उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस ने आशंका जताई है कि वह सफर के दौरान जहरखुरानी गिरोह का शिकार हुए हो सकते हैं। घटना के बाद जीआरपी ने मामले की जांच शुरू कर दी है और संबंधित एजेंसियों को भी इसकी सूचना दे दी गई है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम और अन्य जांच रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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घर लौटते समय बिगड़ी तबीयत

पुलिस के अनुसार, रुड़की के सिविल लाइंस क्षेत्र स्थित ढंडेरा निवासी 53 वर्षीय सत्यपाल सिंह सीमा सुरक्षा बल की 20वीं बटालियन में जैसलमेर में तैनात थे। वह छुट्टी पर अपने घर लौट रहे थे। रास्ते में जोधपुर से उन्होंने अपने बेटे से फोन पर बात कर यात्रा की जानकारी दी थी। इसके बाद उनसे संपर्क नहीं हो सका। आशंका है कि यात्रा के दौरान किसी अज्ञात व्यक्ति ने उन्हें नशीला पदार्थ देकर बेहोश कर दिया, जिसके बाद उनका मोबाइल, पर्स, सामान और जरूरी दस्तावेज गायब हो गए।

स्टेशन पर अचेत हालत में मिले जवान

काठगोदाम रेलवे स्टेशन पर जीआरपी के जवानों की नजर सत्यपाल सिंह पर पड़ी, जहां वह अचेत अवस्था में मिले। उन्हें तुरंत उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें बचाया नहीं जा सका। प्रारंभिक चिकित्सकीय जानकारी के अनुसार, शरीर में किसी जहरीले या नशीले पदार्थ का असर काफी देर तक बना रहने के कारण उनकी स्थिति गंभीर हो गई थी। पुलिस अब मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ा रही है।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

हल्द्वानी और काठगोदाम क्षेत्र में रेल और बस यात्रियों के साथ जहरखुरानी की घटनाएं पहले भी दर्ज हो चुकी हैं। हाल के महीनों में कई यात्री अचेत अवस्था में मिले, जिनके कीमती सामान चोरी होने की शिकायत सामने आई थी। एक मामले में बदायूं निवासी यात्री के साथ सफर के दौरान पेय पदार्थ में नशीला पदार्थ मिलाकर वारदात की गई थी, जबकि दूसरे मामले में एक यात्री को चाय में नशीला पदार्थ पिलाकर उसका सामान लेकर फरार होने की घटना सामने आई थी। पुलिस इन घटनाओं को भी जांच के दायरे में रखकर पड़ताल कर रही है।

सफर के दौरान क्या हुआ, यही सबसे बड़ा सवाल

जांच अधिकारियों के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जोधपुर से काठगोदाम तक करीब 960 किलोमीटर के लंबे रेल सफर के दौरान किसी यात्री या रेलवे कर्मचारी की नजर अचेत पड़े जवान पर क्यों नहीं पड़ी। यह भी स्पष्ट नहीं हो सका है कि उन्हें ट्रेन से किसने उतारा और स्टेशन तक कैसे पहुंचाया गया। अधिकारियों का मानना है कि यदि समय रहते जानकारी मिल जाती और तुरंत चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध हो जाती, तो स्थिति अलग हो सकती थी। पुलिस इस पहलू को भी गंभीरता से जांच में शामिल कर रही है।

जांच जारी, सुरक्षा व्यवस्था पर भी फोकस

घटना की सूचना बीएसएफ के संबंधित अधिकारियों को भी भेज दी गई है। पोस्टमार्टम के बाद जवान का शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस का कहना है कि रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में सक्रिय जहरखुरानी गिरोहों पर नजर रखी जा रही है। यात्रियों से भी अपील की गई है कि सफर के दौरान किसी अनजान व्यक्ति से खाने-पीने की वस्तु स्वीकार न करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना रेलवे पुलिस को दें।

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