उत्तराखण्ड

DoctorsDay – पहाड़ों में सेवा को समर्पित डॉक्टरों ने पेश की समर्पण की मिसाल

DoctorsDay – राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में वर्षों से स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे ऐसे चिकित्सकों की चर्चा हो रही है, जिन्होंने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद पहाड़ को अपनी कर्मभूमि बनाया। जहां कई स्थानीय डॉक्टर दुर्गम जिलों में नियुक्ति से बचते रहे हैं, वहीं दूसरे राज्यों और मैदानी क्षेत्रों से आए अनेक चिकित्सक लंबे समय से यहां रहकर मरीजों की सेवा कर रहे हैं। इन डॉक्टरों का योगदान राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

uttarakhand doctors day hill service

पौड़ी में लंबे समय से निभा रहे जिम्मेदारी

उत्तर प्रदेश के अमेठी निवासी डॉ. शिव मोहन शुक्ला वर्तमान में पौड़ी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। वर्ष 2014 से वे पौड़ी में सेवाएं दे रहे हैं। इससे पहले उन्होंने चंपावत जिले में करीब 14 वर्षों तक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की थीं। रेडियोलॉजी विशेषज्ञ के रूप में उन्होंने पिथौरागढ़ सहित कई पर्वतीय अस्पतालों में भी अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। लंबे अनुभव के कारण वे पर्वतीय क्षेत्रों की स्वास्थ्य चुनौतियों से भली-भांति परिचित हैं।

श्रीनगर में मिला अपनापन बना ठहरने की वजह

मथुरा में जन्मे डॉ. अजय गोयल वर्ष 2010 से श्रीनगर में तैनात हैं। वे संयुक्त अस्पताल में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के साथ-साथ फिजीशियन के रूप में भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनका कहना है कि पहाड़ के लोगों ने उन्हें हमेशा सम्मान और स्नेह दिया, जिसकी वजह से उन्होंने यहीं काम जारी रखने का निर्णय लिया। उन्होंने बताया कि उन्हें दूसरे जिलों में सेवा देने के प्रस्ताव भी मिले, लेकिन स्थानीय लोगों का विश्वास और अपनापन उन्हें लगातार उत्तराखंड में बनाए हुए है।

उत्तरकाशी में दो दशक से मरीजों के साथ

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ से आने वाले डॉ. हरेंद्र कुमार यादव वर्ष 2003 से उत्तरकाशी में कार्यरत हैं। स्नातकोत्तर अध्ययन के दौरान कुछ समय के अंतराल को छोड़ दें तो उन्होंने लगभग दो दशकों से अधिक समय पर्वतीय अस्पतालों में बिताया है। रेडियोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. यादव का कहना है कि दुर्गम क्षेत्रों में मरीजों की सेवा करना उनके लिए केवल पेशा नहीं बल्कि जिम्मेदारी है। उन्होंने भविष्य में भी पहाड़ी क्षेत्रों में ही कार्य करने की इच्छा जताई है।

रुद्रप्रयाग को बनाया स्थायी कार्यस्थल

गोरखपुर निवासी डॉ. शैलेंद्र द्विवेदी वर्ष 2016 से रुद्रप्रयाग जिला अस्पताल में कार्यरत हैं और वर्तमान में प्रभारी मुख्य चिकित्सा अधीक्षक की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उनकी पहली नियुक्ति जौनसार क्षेत्र में हुई थी। बाद में देहरादून और हरिद्वार में भी सेवाएं देने के बाद उन्होंने फिर पर्वतीय जिले को चुना। उनका कहना है कि पहाड़ के लोगों की सेवा करना उन्हें विशेष संतोष देता है और वे आगे भी इसी क्षेत्र में कार्य करना चाहते हैं।

टिहरी और कर्णप्रयाग में सेवा का सिलसिला जारी

वाराणसी में जन्मे डॉ. अमित राय वर्ष 2015 से टिहरी जिला अस्पताल में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के रूप में कार्यरत हैं। स्थानीय लोग उनके सरल व्यवहार और मरीजों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण की सराहना करते हैं। उनकी पत्नी डॉ. राखी गुसाईं भी उसी अस्पताल में चिकित्साधिकारी हैं। वहीं मेरठ के डॉ. राजीव शर्मा और डॉ. उमा शर्मा ने लगभग तीन दशक तक कर्णप्रयाग में सेवाएं देने के बाद सेवानिवृत्ति प्राप्त की, लेकिन मरीजों की जरूरत को देखते हुए दोनों आज भी अस्पताल में अपनी सेवाएं जारी रखे हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार उनका अनुभव स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आज भी उपयोगी साबित हो रहा है।

Back to top button

Adblock Detected

Please remove AdBlocker first, and then watch everything easily.