FakeMedicine – दिनेशपुर में नकली शुगर दवा के अवैध कारोबार का खुलासा
FakeMedicine – उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले में नकली दवाओं के कारोबार का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। दिनेशपुर क्षेत्र में प्रशासन और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में कथित रूप से ‘शुगर की चमत्कारी दवा’ बनाकर बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में संदिग्ध दवाएं, उपकरण और वन्यजीव से जुड़ी सामग्री बरामद की गई है। इस मामले में एक व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

घर के भीतर चल रहा था अवैध निर्माण
अधिकारियों के अनुसार, नगर पंचायत क्षेत्र के एक मकान में लंबे समय से यह अवैध गतिविधि संचालित हो रही थी। संयुक्त टीम ने जब मौके पर पहुंचकर तलाशी ली, तो पाया कि दो कमरों में बड़े पैमाने पर दवा तैयार की जा रही थी। वहां तैयार और कच्चे माल का बड़ा भंडार मिला, जिसे जब्त कर लिया गया है।
एलोपैथिक दवाओं के साथ किया जा रहा था मिश्रण
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी एलोपैथिक दवाओं को अन्य पदार्थों के साथ मिलाकर एक पाउडर तैयार करता था, जिसे आयुर्वेदिक दवा बताकर बेचा जाता था। मौके से कई प्रकार की दवाइयों की पेटियां, टैबलेट स्ट्रिप और अन्य सामग्री बरामद हुई हैं। टीम ने दवा तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली मशीनों को भी कब्जे में लिया है।
वन्यजीव सामग्री की बरामदगी से बढ़ी गंभीरता
छापेमारी के दौरान हिरण के सींग मिलने से मामला और गंभीर हो गया है। वन विभाग ने इन सींगों की जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाया जा रहा है कि इन्हें कहां से लाया गया। अधिकारियों का कहना है कि वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत भी इस मामले में कार्रवाई की जाएगी।
ऊंची कीमत पर बेची जा रही थी दवा
जानकारी के मुताबिक, तैयार दवा को ‘शुगर नियंत्रण’ के नाम पर ऊंचे दामों में बेचा जा रहा था। एक पैकेट की कीमत करीब एक हजार रुपये तक बताई गई है। इस दवा का प्रचार सोशल मीडिया और आपसी जानकारी के जरिए किया जाता था, जिससे लोगों में इसके प्रति भरोसा बनाया जाता था।
कई राज्यों तक फैला था नेटवर्क
जांच के दौरान यह भी संकेत मिले हैं कि यह अवैध कारोबार केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं था। तैयार दवाएं अन्य राज्यों में भी भेजी जा रही थीं। इससे यह मामला एक संगठित नेटवर्क की ओर इशारा करता है, जिसकी गहराई से जांच की जा रही है।
विभिन्न विभागों ने मिलकर की कार्रवाई
इस पूरी कार्रवाई में पुलिस, प्रशासन, आयुष विभाग और वन विभाग की संयुक्त टीम शामिल रही। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के मामलों में विभागों के बीच समन्वय बेहद जरूरी है, ताकि अवैध गतिविधियों पर प्रभावी ढंग से रोक लगाई जा सके।
आरोपी के खिलाफ दर्ज होंगे कई मामले
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आरोपी के खिलाफ अलग-अलग कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। बरामद दवाओं के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं और सभी सामग्री को सील कर दिया गया है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया तेज की जाएगी।