HighCourtNotice – चार लेन हाईवे भूमि अधिग्रहण पर सरकारों को मिला नोटिस
HighCourtNotice – उत्तराखंड हाई कोर्ट ने एक प्रस्तावित चार लेन सड़क परियोजना के लिए किए जा रहे भूमि अधिग्रहण पर उठे विवाद को गंभीरता से लेते हुए केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा है। यह मामला लगभग 10 किलोमीटर लंबे हाईवे निर्माण से जुड़ा है, जिसके लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को चुनौती दी गई है। अदालत ने इस पर सुनवाई करते हुए दोनों सरकारों को चार सप्ताह के भीतर अपना पक्ष स्पष्ट करने का निर्देश दिया है।

याचिका में उठाए गए सवाल
यह याचिका रामनगर निवासी जगमोहन रावत सहित अन्य लोगों ने दायर की है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में कई बुनियादी नियमों और प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रभावित लोगों को पर्याप्त जानकारी और उचित मुआवजा सुनिश्चित करने के मामले में पारदर्शिता नहीं बरती गई।
अदालत की प्रारंभिक टिप्पणी
मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने इसे गंभीर मुद्दा मानते हुए केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया। अदालत ने कहा कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सरकारों का पक्ष जानना जरूरी है, ताकि उचित निर्णय लिया जा सके।
चार सप्ताह में जवाब देने का निर्देश
हाई कोर्ट ने दोनों सरकारों को स्पष्ट रूप से निर्देश दिया है कि वे चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करें। इसके साथ ही अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि आवश्यक हुआ तो मामले की आगे विस्तृत सुनवाई की जाएगी। फिलहाल अदालत ने किसी प्रकार की अंतरिम रोक लगाने का आदेश नहीं दिया है।
प्रभावित लोगों की चिंताएं
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क परियोजना से विकास तो होगा, लेकिन जमीन अधिग्रहण के तरीके को लेकर उनके मन में कई सवाल हैं। उनका कहना है कि उचित मुआवजा, पुनर्वास और पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित होना चाहिए, ताकि किसी को नुकसान न उठाना पड़े।
परियोजना का महत्व
चार लेन हाईवे परियोजना को क्षेत्र के विकास और यातायात सुविधा के लिहाज से अहम माना जा रहा है। इससे पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, विकास कार्यों के साथ-साथ प्रभावित लोगों के अधिकारों का संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी माना जा रहा है।
आगे की सुनवाई पर नजर
अब सभी की नजर इस बात पर है कि केंद्र और राज्य सरकार अदालत में क्या जवाब देती हैं। इसके आधार पर ही यह तय होगा कि परियोजना आगे किस दिशा में बढ़ेगी। फिलहाल मामला न्यायिक प्रक्रिया में है और अंतिम निर्णय अदालत की सुनवाई के बाद ही सामने आएगा।