MadrasaEnrollment – हरिद्वार में छात्र संख्या में आई बड़ी गिरावट, जारी हुए जांच के निर्देश
MadrasaEnrollment – हरिद्वार जिले के मदरसों में दर्ज छात्रों की संख्या में अचानक आई भारी कमी ने शिक्षा विभाग का ध्यान अपनी ओर खींचा है। प्रारंभिक जांच में सामने आए आंकड़ों के बाद राज्य स्तर पर मामले की समीक्षा शुरू कर दी गई है। शिक्षा विभाग ने सभी जिलों में स्कूलों और मदरसों में नामांकित विद्यार्थियों की वास्तविक संख्या का सत्यापन कराने के निर्देश जारी किए हैं।

जिले में हुई जांच के दौरान छात्र संख्या से जुड़े आंकड़ों में उल्लेखनीय अंतर सामने आया, जिसके बाद विभाग ने पूरे राज्य में रिकॉर्ड की पड़ताल का फैसला लिया है। अधिकारियों का कहना है कि सत्यापन प्रक्रिया के माध्यम से वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाएगी।
हरिद्वार में जांच के दौरान सामने आई विसंगति
उत्तराखंड में वर्तमान समय में 452 मदरसे संचालित हैं। इनमें से 241 संस्थानों में प्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत विद्यार्थियों को मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराया जाता है। हाल ही में हरिद्वार प्रशासन द्वारा कराए गए सत्यापन अभियान में कई मदरसों के छात्र रिकॉर्ड की समीक्षा की गई।
जांच के दौरान पाया गया कि जिले के 130 से अधिक मदरसों में मार्च 2026 तक लगभग 31 हजार छात्रों का पंजीकरण दर्ज था, जबकि अप्रैल माह में यह संख्या घटकर करीब 19 हजार रह गई। इतने कम समय में छात्र संख्या में आई इस बड़ी कमी ने विभागीय अधिकारियों को सतर्क कर दिया है।
राज्यभर में सत्यापन अभियान को मिले निर्देश
समग्र शिक्षा अभियान से जुड़े अधिकारियों के अनुसार छात्रों के रिकॉर्ड को प्रमाणिक बनाने के लिए राज्यभर में अपार आईडी तैयार करने का कार्य चल रहा है। इस प्रक्रिया में प्रत्येक छात्र के दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है, जिससे नामांकन से संबंधित सभी सूचनाएं डिजिटल रूप से प्रमाणित हो सकें।
अपर राज्य परियोजना निदेशक (समग्र शिक्षा) डॉ. मुकुल कुमार सती ने बताया कि सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को अपने-अपने जिलों में स्कूलों और मदरसों की छात्र संख्या का भौतिक सत्यापन सुनिश्चित करने को कहा गया है। उनका कहना है कि अपार आईडी व्यवस्था लागू होने के बाद किसी भी प्रकार की फर्जी या असंगत छात्र संख्या को पहचानना अधिक आसान हो जाएगा।
छात्र रिकॉर्ड की पारदर्शिता पर जोर
शिक्षा विभाग का मानना है कि विद्यार्थियों के सही आंकड़े उपलब्ध होना विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रभावी संचालन के लिए आवश्यक है। इसी कारण छात्र पंजीकरण और वास्तविक उपस्थिति के बीच किसी भी अंतर की जांच की जा रही है। विभागीय स्तर पर यह भी देखा जा रहा है कि कहीं रिकॉर्ड अद्यतन न होने या अन्य प्रशासनिक कारणों से संख्या में अंतर तो नहीं आया।
अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक कारणों की स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी। फिलहाल राज्य के सभी जिलों में छात्र डेटा की समीक्षा प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक प्रतिक्रिया
इसी बीच हरिद्वार में युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया। संगठन के कार्यकर्ताओं ने शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों और हाल के कुछ शैक्षणिक विवादों को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।
युवा कांग्रेस के जिला नेतृत्व ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मामलों में विद्यार्थियों के हित सर्वोपरि होने चाहिए। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं और मूल्यांकन प्रक्रिया से जुड़े विवादों का उल्लेख करते हुए निष्पक्ष व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की।
छात्रों के हितों को प्राथमिकता देने की मांग
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा से जुड़े किसी भी विवाद का सबसे अधिक असर विद्यार्थियों पर पड़ता है। ऐसे में सरकार और संबंधित संस्थाओं को पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि छात्रों और अभिभावकों का विश्वास बना रहे।
शिक्षा विभाग की ओर से फिलहाल छात्र संख्या सत्यापन अभियान जारी है और जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।