SnowLeopard – दारमा घाटी में फिर दिखा दुर्लभ हिम तेंदुआ, जैव विविधता के लिए शुभ संकेत
SnowLeopard – हिमालय की ऊँची और बर्फ से ढकी चोटियों के बीच स्थित उत्तराखंड की दारमा घाटी से एक बार फिर उत्साहजनक खबर सामने आई है। पिथौरागढ़ जिले की इस दूरस्थ घाटी में जनवरी माह के दौरान दुर्लभ हिम तेंदुए की मौजूदगी दर्ज की गई है। 10 हजार फीट से अधिक ऊँचाई वाले इलाके में ‘टीम हिडन हिमालयाज ऑफ उत्तराखंड’ ने कैमरा ट्रैप के जरिए इस रहस्यमयी वन्य जीव को रिकॉर्ड किया। दारमा घाटी में यह हिम तेंदुए की तीसरी दर्ज उपस्थिति है, जिसे क्षेत्र के संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र का अहम संकेत माना जा रहा है।

दारमा घाटी में तीसरी बार दर्ज हुई मौजूदगी
विशेषज्ञों के अनुसार, दारमा घाटी में हिम तेंदुए का दिखना अब एक दुर्लभ संयोग भर नहीं रहा। इससे पहले वर्ष 2022 में पहली बार और फिर 2025 में दूसरी बार इसकी मौजूदगी दर्ज की गई थी। लगातार तीसरी बार इस प्रजाति का रिकॉर्ड होना यह दर्शाता है कि यह क्षेत्र हिम तेंदुए के लिए अनुकूल आवास प्रदान कर रहा है। वन्यजीव विशेषज्ञ मानते हैं कि किसी इलाके में शीर्ष शिकारी की स्थिर उपस्थिति उस पूरे इकोसिस्टम की मजबूती को दर्शाती है।
ऊँचाई और भूगोल ने बनाया आदर्श आवास
पिथौरागढ़ जिले का यह हिस्सा अत्यंत दुर्गम और कम मानव हस्तक्षेप वाला क्षेत्र है। 10 हजार फीट से अधिक ऊँचाई पर स्थित दारमा घाटी में बर्फीला मौसम, चट्टानी ढलान और पर्याप्त शिकार प्रजातियाँ हिम तेंदुए के अनुकूल वातावरण तैयार करती हैं। यही कारण है कि यह इलाका इस दुर्लभ वन्य जीव का प्राकृतिक आवास माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे क्षेत्रों में हिम तेंदुआ केवल तभी टिक पाता है जब पारिस्थितिक संतुलन बना रहे।
रहस्यमयी और अत्यंत दुर्लभ प्रजाति
हिम तेंदुआ दुनिया के सबसे कम दिखने वाले और रहस्यमयी वन्य जीवों में शामिल है। यह आमतौर पर इंसानी बस्तियों से दूर, ऊँचे और बर्फीले इलाकों में रहता है। इसकी गतिविधियाँ सीमित क्षेत्र तक ही रहती हैं, जिससे इसे कैमरे में कैद करना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। यही वजह है कि दारमा घाटी में इसका कैमरा ट्रैप में आना वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
स्नो कॉक की भी हुई पुष्टि
‘टीम हिडन हिमालयाज ऑफ उत्तराखंड’ के सदस्य जयेंद्र फिरमाल के अनुसार, दारमा घाटी जैव विविधता के लिहाज से बेहद समृद्ध क्षेत्र है। हिम तेंदुए के साथ-साथ टीम ने 27 और 28 जनवरी को स्नो कॉक की भी तस्वीरें कैद की हैं। स्नो कॉक एक दुर्लभ हिमालयी पक्षी है, जिसकी मौजूदगी ऊँचाई वाले स्वस्थ पारिस्थितिक तंत्र का संकेत मानी जाती है। इन दोनों प्रजातियों का एक ही क्षेत्र में दर्ज होना घाटी के प्राकृतिक संतुलन को और मजबूत करता है।
अनेक दुर्लभ वन्य जीवों का घर
दारमा घाटी केवल हिम तेंदुए तक सीमित नहीं है। यहां ब्लू शीप, हिमालयन थार, हिमालयन मोनाल, हेडेड वल्चर, विभिन्न प्रजातियों के फिंच, स्नो कॉक और काला भालू जैसे कई दुर्लभ जीव और पक्षी पाए जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी विविध प्रजातियों की मौजूदगी यह साबित करती है कि यह क्षेत्र जैव विविधता संरक्षण के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
संरक्षण प्रयासों की मिल रही सकारात्मक दिशा
जयेंद्र फिरमाल ने बताया कि इस अभियान में नितेश सिंह, असमित सिंह, भीम सिंह और दिनेश सिंह जैसे टीम सदस्य लगातार दुर्गम क्षेत्रों में सक्रिय रहकर निगरानी कार्य कर रहे हैं। दारमा घाटी में हिम तेंदुए की बार-बार दर्ज हो रही मौजूदगी यह संकेत देती है कि संरक्षण प्रयास सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। यह न केवल उत्तराखंड की वन्यजीव विरासत को मजबूत करता है, बल्कि भविष्य में इस क्षेत्र को संरक्षण के मॉडल के रूप में विकसित करने की संभावना भी दिखाता है।



