उत्तराखण्ड

Uttarakhand Health Crisis: उत्तराखंड में स्वास्थ्य सिस्टम की बड़ी लापरवाही, एंबुलेंस में ऑक्सीजन खत्म होने से महिला की मौत

Uttarakhand Health Crisis: उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में लचर स्वास्थ्य सेवाओं ने एक बार फिर एक मासूम जान निगल ली है। इस बार सिस्टम की इस ‘बीमारी’ का शिकार टिहरी नगर पालिका की एक महिला सफाई कर्मचारी बनी हैं। परिजनों का आरोप है कि समय पर इलाज न मिलना और रेफर करने में की गई देरी तो जानलेवा साबित हुई ही, रही-सही कसर एंबुलेंस के खाली ऑक्सीजन सिलेंडर ने पूरी कर दी। नगर पालिका की सफाई कर्मी रेखा देवी की मौत की खबर फैलते ही इलाके में भारी आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय निवासियों और साथी कर्मचारियों ने इस घटना को सीधे तौर पर प्रशासनिक हत्या करार दिया है।

woman dies due to lack of oxygen in ambulance

रेफर करने में बर्बाद हुआ कीमती समय और खस्ताहाल एंबुलेंस

परिजनों ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि गुरुवार को जब रेखा देवी की तबीयत अचानक बिगड़ी, तो उन्हें तुरंत जिला अस्पताल बौराड़ी ले जाया गया। अस्पताल में प्राथमिक उपचार के नाम पर घंटों बीत गए और जब उन्हें हायर सेंटर रेफर करने का फैसला लिया गया, तब तक काफी देर हो चुकी थी। आरोप है कि रेफरल कागजात तैयार करने में ही अस्पताल प्रशासन ने करीब डेढ़ घंटा बर्बाद कर दिया। हद तो तब हो गई जब उन्हें ले जाने के लिए जो एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई, उसकी स्थिति बेहद जर्जर थी। बीच रास्ते में ही एंबुलेंस का ऑक्सीजन सिलेंडर जवाब दे गया और सांसों की जद्दोजहद के बीच रेखा देवी ने दम तोड़ दिया।

अस्पताल गेट पर फूटा गुस्सा, दोषियों पर कार्रवाई की मांग

शुक्रवार सुबह जैसे ही रेखा देवी की मौत की सूचना सार्वजनिक हुई, टिहरी में माहौल तनावपूर्ण हो गया। नगर पालिकाध्यक्ष मोहन सिंह रावत के नेतृत्व में बड़ी संख्या में सफाई कर्मचारी जिला अस्पताल के मुख्य द्वार पर एकत्र हुए और धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं के कारण किसी पहाड़ी की जान गई हो। पालिकाध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि जब तक इस घोर लापरवाही के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन खत्म नहीं होगा। प्रदर्शन के कारण अस्पताल के प्रशासनिक कार्यों में भी बाधा आई।

स्वास्थ्य विभाग की सफाई और जांच कमेटी का गठन

मामले के तूल पकड़ने के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. श्याम विजय ने विभाग का पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि रेखा देवी पहले से ही उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रही थीं और उनका इलाज जिला अस्पताल में चल रहा था। डॉक्टर के अनुसार, उन्हें 21 जनवरी को ही किसी बड़े अस्पताल में दिखाने का परामर्श दिया गया था। गुरुवार रात जब उनकी स्थिति नाजुक हुई, तब उन्हें रेफर किया गया। विभाग ने इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया है। सीएमओ ने भरोसा दिलाया कि यदि एंबुलेंस में ऑक्सीजन की कमी या रेफरल में देरी की पुष्टि होती है, तो संबंधित दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

पहाड़ों में स्वास्थ्य सेवाओं की असलियत पर फिर उठे सवाल

यह दुखद घटना एक बार फिर उत्तराखंड के दुर्गम क्षेत्रों में बुनियादी स्वास्थ्य ढांचे की पोल खोलती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहाड़ों पर अस्पतालों की इमारतें तो खड़ी कर दी गई हैं, लेकिन न तो वहां पर्याप्त विशेषज्ञ डॉक्टर हैं और न ही आपातकालीन स्थिति के लिए जीवन रक्षक उपकरण। एंबुलेंस में ऑक्सीजन जैसी बुनियादी सुविधा का न होना यह दर्शाता है कि प्रशासन जनता की जान के प्रति कितना लापरवाह है। फिलहाल, मृतक महिला के परिवार में मातम छाया हुआ है और वे न्याय की उम्मीद में सिस्टम की ओर देख रहे हैं।

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