उत्तराखण्ड

Uttarakhand Stray Cattle Management Scheme: मवेशी पालें और घर बैठे कमाएं 12 हजार रुपये, धामी सरकार की इस स्कीम ने मचाया तहलका

Uttarakhand Stray Cattle Management Scheme: उत्तराखंड सरकार ने राज्य की सड़कों और लहलहाते खेतों को आवारा पशुओं के आतंक से मुक्त करने के लिए एक मास्टर प्लान तैयार किया है। प्रदेश सरकार ने दो ऐसी क्रांतिकारी योजनाएं शुरू की हैं जो न केवल बेसहारा मवेशियों को छत देंगी, बल्कि ग्रामीणों की जेब भी भरेंगी। इन योजनाओं के माध्यम से (Rural Economic Empowerment) की नई राहें खुल रही हैं, जिससे आम नागरिक हर महीने एक सम्मानजनक राशि कमा सकते हैं। पशुपालन विभाग की यह पहल विशेष रूप से उन इलाकों के लिए संजीवनी साबित होगी जहाँ आवारा पशु फसलों को भारी नुकसान पहुँचाते रहे हैं।

Uttarakhand Stray Cattle Management Scheme
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एक तीर से दो निशाने लगाएगी यह सरकारी योजना

पिथौरागढ़ के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (सीवीओ) डॉ. योगेश शर्मा ने रविवार को इस योजना की बारीकियों को साझा किया। उन्होंने बताया कि इस मुहिम का असली मकसद निराश्रित घूम रहे मवेशियों को उचित आश्रय, पौष्टिक भोजन और समय पर चिकित्सा उपलब्ध कराना है। इस (Sustainable Livestock Welfare) दृष्टिकोण से दो बड़े फायदे होंगे। पहला यह कि बेजुबान जानवरों को असुरक्षित सड़कों से हटाकर सुरक्षित ठिकानों पर पहुँचाया जाएगा, और दूसरा यह कि किसानों की मेहनत से उगाई गई फसलों को बर्बाद होने से बचाया जा सकेगा।

ग्राम गौर सेवक योजना से होगी बंपर कमाई

सरकार की पहली योजना का नाम ‘ग्राम गौर सेवक योजना’ है, जो सीधे तौर पर व्यक्तिगत पशुपालकों को लाभ पहुँचाती है। इस स्कीम के अंतर्गत कोई भी ग्रामीण अधिकतम पांच नर आवारा पशुओं को अपने पास रख सकता है। सरकार प्रति पशु 80 रुपये रोजाना के हिसाब से भुगतान करेगी, जिससे (Monthly Income Opportunity) के तहत पांच पशु पालने पर सीधे 12 हजार रुपये प्रति माह की कमाई सुनिश्चित होगी। यह राशि सीधे पशुपालक के खाते में भेजी जाएगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

मुफ्त इलाज और चारे की चिंता हुई दूर

पशुओं को पालने की जिम्मेदारी लेने वाले ग्रामीणों पर आर्थिक बोझ न पड़े, इसके लिए सरकार ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। 12 हजार रुपये की नकद राशि के साथ-साथ, उन पशुओं के लिए (Free Veterinary Services) भी उपलब्ध कराई जाएगी। पशुपालन विभाग की टीमें समय-समय पर इन घरों का दौरा करेंगी ताकि मवेशियों के स्वास्थ्य की निगरानी की जा सके। जिले में अब तक कई जागरूक नागरिक इस योजना का लाभ उठाना शुरू कर चुके हैं, जिससे सड़कों पर पशुओं की तादाद में कमी आने लगी है।

गौशाला योजना में पशुओं की संख्या पर नहीं है पाबंदी

सरकार की दूसरी महत्वपूर्ण कड़ी ‘गौशाला योजना’ है, जो बड़े स्तर पर मवेशियों को संभालने के लिए डिजाइन की गई है। इस योजना के तहत कोई भी संस्था या व्यक्ति अपने गौसदन में कितनी भी संख्या में निराश्रित पशुओं को रख सकता है। यहाँ भी सरकार (Government Grant Per Animal) के रूप में 80 रुपये प्रतिदिन प्रति पशु का भुगतान करेगी। मुनस्यारी और बारावे जैसे क्षेत्रों में चल रही गौशालाएं इस बात का प्रमाण हैं कि बड़े पैमाने पर पशुओं को सुरक्षित रखना अब वित्तीय रूप से भी व्यवहार्य हो गया है।

मुनस्यारी और बारावे में गौशालाओं ने पकड़ी रफ्तार

वर्तमान में जिले के मुनस्यारी और बारावे क्षेत्रों में दो बड़ी गौशालाएं सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं। इन केंद्रों पर अभी कुल 225 निराश्रित पशुओं को आश्रय और गुणवत्तापूर्ण भोजन मिल रहा है। प्रशासन का लक्ष्य (Large Scale Animal Shelters) की संख्या को और बढ़ाना है ताकि जिले का कोई भी कोना आवारा पशुओं की समस्या से ग्रसित न रहे। इन केंद्रों के संचालन से स्थानीय युवाओं को भी रोजगार मिल रहा है, जो पशुओं की देखभाल और प्रबंधन का कार्य देख रहे हैं।

केवल ग्रामीण क्षेत्रों के लिए है यह विशेष प्रावधान

पशुपालन विभाग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ये दोनों ही योजनाएं विशेष रूप से ग्रामीण अंचलों के लिए तैयार की गई हैं। शहरों की तुलना में गांवों में चारे और जगह की उपलब्धता अधिक होती है, इसलिए (Rural Development Strategies) को ध्यान में रखते हुए इसे ग्राम पंचायतों के स्तर पर लागू किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि अगर ग्रामीण समाज इस मुहिम से जुड़ता है, तो आवारा पशुओं की समस्या को जड़ से खत्म किया जा सकता है।

पशु प्रेमियों और किसानों के लिए सुनहरा मौका

यह योजना उन लोगों के लिए एक वरदान की तरह है जो पशु प्रेम रखते हैं लेकिन संसाधनों की कमी के कारण उन्हें पाल नहीं पा रहे थे। अब सरकार की आर्थिक मदद से (Animal Husbandry Business) को एक नया आयाम मिलेगा। किसान अब अपनी फसलों की रखवाली के तनाव से मुक्त होकर खेती पर ध्यान दे सकेंगे, क्योंकि सड़कों पर घूमने वाले मवेशियों को अब गौसेवकों के घर और सरकारी गौशालाओं में सुरक्षित स्थान मिल रहा है।

आवेदन प्रक्रिया और भविष्य की योजनाएं

जो लोग इस योजना का हिस्सा बनकर हर महीने 12 हजार रुपये कमाना चाहते हैं, वे अपने नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र या सीवीओ कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। सरकार आने वाले समय में (Community Participation Models) को और मजबूत करेगी ताकि इस योजना का विस्तार पूरे उत्तराखंड में किया जा सके। प्रशासन का संदेश साफ है- पशुओं की सेवा करें, फसलों को बचाएं और अपनी आर्थिक स्थिति को भी मजबूत बनाएं।

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