उत्तराखण्ड

VikramSharmaMurder – दुश्मनी और रंगदारी से उपजी हत्या की साजिश का खुलासा

VikramSharmaMurder – अपराध जगत में अक्सर कहा जाता है कि दुश्मन का दुश्मन साथ खड़ा हो जाता है। कुख्यात विक्रम शर्मा हत्याकांड की जांच में कुछ ऐसा ही परिदृश्य सामने आया है। पुलिस और एसटीएफ की पड़ताल में खुलासा हुआ है कि इस वारदात की रूपरेखा दो ऐसे पक्षों ने मिलकर तैयार की, जो अलग-अलग कारणों से विक्रम से रंजिश रखते थे। सोमवार को पुलिस ने मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर साजिश की कई परतें खोलीं।

vikram sharma murder conspiracy case

जेल की रंजिश बनी हत्या की वजह

जांच में सामने आया कि इस कहानी की शुरुआत जेल के भीतर हुए एक विवाद से हुई। शूटर विशाल को कथित तौर पर विक्रम के करीबी लोगों ने जेल में प्रताड़ित किया था। इस घटना के बाद से ही वह बदले की भावना रखे हुए था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, जेल से बाहर आने के बाद उसने उन लोगों से संपर्क साधा जो पहले से विक्रम के व्यवहार से असंतुष्ट थे।

ठेकेदारी विवाद ने बढ़ाई दुश्मनी

दूसरा पक्ष रेलवे से जुड़ा एक ठेकेदार बताया जा रहा है। जांच एजेंसियों का कहना है कि विक्रम उस ठेकेदार पर दबाव बना रहा था और उसके कारोबार में दखल देने की कोशिश कर रहा था। रंगदारी की मांग और कथित धमकियों से परेशान होकर उसने भी विरोधी खेमे से हाथ मिला लिया। दोनों पक्षों के साझा हित ने हत्या की साजिश को आकार दिया।

गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका

पुलिस ने अक्षत ठाकुर और राजकुमार को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के अनुसार, अक्षत ने कथित शूटरों को ठहरने की जगह उपलब्ध कराई थी और घटना के बाद फरार होने के लिए वाहन की व्यवस्था में सहयोग किया। वहीं राजकुमार पर आर्थिक मदद उपलब्ध कराने का आरोप है। पुलिस का कहना है कि डिजिटल लेनदेन के कुछ साक्ष्य भी जांच के दायरे में हैं।

आठ लोगों की बताई गई संलिप्तता

इस हत्याकांड में कुल आठ लोगों की भूमिका सामने आई है। मुख्य शूटर आशुतोष सिंह और विशाल सिंह पर सीधे तौर पर गोली चलाने का आरोप है। अंकित वर्मा ने कथित तौर पर कई महीनों तक रेकी की और घटना के दिन गतिविधियों की सूचना दी। यशराज नामक ठेकेदार पर साजिश में सहयोग और वाहन उपलब्ध कराने का आरोप है। अन्य दो लोगों ने भागने के लिए किराये के वाहन और संसाधन जुटाने में मदद की। पुलिस ने कहा है कि सभी पहलुओं की गहन जांच जारी है।

गैंग संबंधों की भी पड़ताल

प्रारंभिक जांच में एक गैंग की भूमिका प्रमुख रूप से सामने आई है, लेकिन पुलिस अन्य आपराधिक समूहों के संभावित संबंधों की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि विक्रम के करीबी माने जाने वाले कुछ लोगों से भी पूछताछ की जा रही है, क्योंकि हाल के महीनों में उनके बीच दूरी की चर्चा थी। हालांकि इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक निष्कर्ष नहीं निकाला गया है।

परिवार के आरोप भी जांच में शामिल

हत्या के बाद विक्रम की पत्नी ने पारिवारिक स्तर पर भी कुछ गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने अपने देवर पर संदेह जताया था। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इन आरोपों को भी जांच में शामिल किया गया है। जिस जिम में विक्रम जाते थे, उसकी सदस्यता से जुड़े तथ्यों की भी पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की पूरी सच्चाई मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी और पूछताछ के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।

पुलिस का कहना है कि यह मामला केवल गैंगवार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें व्यक्तिगत रंजिश, आर्थिक विवाद और आपराधिक गठजोड़ जैसे कई पहलू जुड़े हैं। जांच एजेंसियां साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही हैं और फरार आरोपियों की तलाश जारी है।

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