उत्तराखण्ड

World Bank Uttarakhand Water Project 2026: 6 लाख लोगों की प्यास बुझाने के लिए 1600 करोड़ का मेगा प्लान, क्या आपके शहर की भी बदलेगी सूरत…

World Bank Uttarakhand Water Project 2026: उत्तराखंड के विकास पथ पर तेजी से अग्रसर 16 शहरों के लिए एक बेहद सुखद और राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य के शहरी क्षेत्रों में पेयजल की बढ़ती किल्लत को जड़ से समाप्त करने के लिए विश्व बैंक की सहायता से 1600 करोड़ रुपये का एक विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। इस (Urban Water Infrastructure Development) के माध्यम से राज्य के तेजी से विकसित हो रहे कस्बों और नगरों में पानी की सप्लाई को आधुनिक और अधिक मजबूत बनाया जाएगा। केंद्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट की सफलता सुनिश्चित करने के लिए कुछ कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं, ताकि योजनाओं का लाभ जनता तक बिना किसी देरी के पहुंच सके।

World Bank Uttarakhand Water Project 2026
World Bank Uttarakhand Water Project 2026

केंद्र की नई शर्त: पहले टेंडर फिर मिलेगी मंजूरी

इस बार केंद्र सरकार ने कार्यप्रणाली में एक बड़ा बदलाव करते हुए जवाबदेही तय कर दी है। जल निगम को अब किसी भी पेयजल योजना के लिए पहले टेंडर प्रक्रिया पूरी करनी होगी, जिसके बाद ही केंद्र सरकार द्वारा अंतिम वित्तीय स्वीकृति प्रदान की जाएगी। इस (Government Tender Policy Compliance) का मुख्य उद्देश्य प्रोजेक्ट्स में होने वाली प्रशासनिक देरी को कम करना और पारदर्शिता को बढ़ाना है। एमडी जल निगम रणवीर सिंह चौहान ने स्पष्ट किया है कि इसी महीने वर्ल्ड बैंक की टीम के साथ मिलकर प्राथमिक शहरों का चयन अंतिम रूप से कर लिया जाएगा, जिससे बजट का सही आवंटन सुनिश्चित हो सके।

24 घंटे पानी और 6 लाख आबादी का लक्ष्य

यह विशाल परियोजना उत्तराखंड के भविष्य की जल जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। इसके तहत राज्य के एक लाख घरों में रहने वाली लगभग छह लाख की आबादी को कवर करने का महात्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। अधिकारियों का दावा है कि इस (Continuous Water Supply Scheme) के लागू होने के बाद चिन्हित शहरों में 24 घंटे स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होगा। यह न केवल लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाएगा, बल्कि उभरते हुए पर्यटन केंद्रों और आवासीय क्षेत्रों में पानी की कमी की समस्या को हमेशा के लिए खत्म कर देगा।

समय सीमा तय: तीन महीने में पूरी होगी प्रक्रिया

प्रोजेक्ट की सुस्ती को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार ने एक सख्त टाइमलाइन निर्धारित की है। जल निगम को इस परियोजना के लिए अगले तीन महीने के भीतर टेंडर प्रक्रिया पूरी करनी होगी और अधिकतम छह महीने के अंदर जमीनी स्तर पर काम शुरू करना अनिवार्य होगा। इस (Project Implementation Timeline Management) के कारण विभाग में हलचल तेज हो गई है। एमडी के अनुसार, कुल 1600 करोड़ के बजट के पहले चरण में 30 प्रतिशत कार्यों के टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे, ताकि मंजूरी मिलते ही निर्माण कार्य को गति दी जा सके।

गढ़वाल से कुमाऊं तक इन शहरों की चमकेगी किस्मत

पेयजल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने वाली इस योजना का दायरा बहुत विस्तृत है। इसमें सेलाकुईं और चकराता जैसे औद्योगिक क्षेत्रों के साथ-साथ हरिद्वार के रामपुर, पाडली गुज्जर और इमलीखेड़ा को शामिल किया गया है। इसके अलावा (Himalayan Region Water Network) के तहत रुद्रप्रयाग के उखीमठ, अगस्त्यमुनी, तिलवाड़ा और टिहरी के कैंपटी फाल जैसे पर्यटन स्थलों को भी जोड़ा गया है। उत्तरकाशी के पुरोला और बड़कोट से लेकर चमोली के गैरसैंण और गोपेश्वर तक, हर प्रमुख कस्बे को इस मिशन का हिस्सा बनाया गया है ताकि पहाड़ों में पानी का संकट इतिहास बन जाए।

तराई और सरोवर नगरी में भी होगा कायाकल्प

पेयजल का यह मजबूत जाल केवल पहाड़ों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उधम सिंह नगर और नैनीताल जिले के मैदानी व तराई क्षेत्रों में भी फैलाया जाएगा। यूएस नगर के सुल्तानपुर पट्टी, दिनेशपुर, गुलरभोज और केलाखेड़ा जैसे इलाकों में (Integrated Water Management Systems) के माध्यम से सप्लाई को दुरुस्त किया जाएगा। सरोवर नगरी के पास स्थित भीमताल, भवाली और कालाढूंगी जैसे क्षेत्रों में भी जल निगम नया इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करेगा। बागेश्वर और महुवाडाबरा जैसे इलाकों को भी इस बजट में विशेष स्थान मिला है, जिससे समूचे उत्तराखंड का जल मानचित्र बदलने की तैयारी है।

एमडी जल निगम का विजन और भविष्य की राह

जल निगम के एमडी रणवीर सिंह चौहान ने इस प्रोजेक्ट को उत्तराखंड के शहरी विकास की रीढ़ बताया है। उनका मानना है कि विश्व बैंक के सहयोग से खड़ा होने वाला यह नया सिस्टम आगामी कई दशकों तक पानी की जरूरतों को पूरा करेगा। इस (Sustainable Water Resource Engineering) के जरिए न केवल नई पाइपलाइन बिछाई जाएंगी, बल्कि आधुनिक स्टोरेज टैंक और पंपिंग स्टेशनों का भी निर्माण होगा। जल्द ही टेंडर प्रक्रिया पूरी कर फाइनल डीपीआर मंजूरी के लिए केंद्र को भेजी जाएगी, जिससे राज्य के शहरों में जल क्रांति का सूत्रपात होगा।

शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर में मील का पत्थर साबित होगा निवेश

1600 करोड़ का यह भारी-भरकम निवेश उत्तराखंड के शहरी विकास की दिशा और दशा बदलने वाला साबित होगा। जिस तेजी से राज्य में शहरीकरण बढ़ रहा है, वहां परंपरागत स्रोत पर्याप्त नहीं रह गए थे। इस (World Bank Funded Projects) के कारण अब आधुनिक तकनीक का समावेश होगा, जिससे पानी की बर्बादी रुकेगी और गुणवत्तापूर्ण आपूर्ति सुनिश्चित होगी। देवभूमि की जनता को अब उस दिन का इंतजार है जब उनके घरों के नलों में बिना किसी रुकावट के शुद्ध जल की धारा बहेगी और पानी के लिए लगने वाली लंबी कतारें गुजरे जमाने की बात हो जाएंगी।

Related Articles

Back to top button

Adblock Detected

Please remove AdBlocker first, and then watch everything easily.