EU FTA India: भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते से वस्त्र उद्योग को नया विस्तार
EU FTA India: भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से लंबित मुक्त व्यापार समझौते पर 27 जनवरी को हस्ताक्षर होने के साथ ही भारतीय वस्त्र एवं परिधान उद्योग के लिए नई संभावनाओं के द्वार खुल गए हैं। केंद्र सरकार का मानना है कि इस समझौते से भारत के वस्त्र निर्यात को उल्लेखनीय बढ़त मिलेगी और आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र वैश्विक बाजार में कहीं अधिक मजबूत स्थिति में आ सकता है। सरकार के अनुसार, यह समझौता केवल व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रोजगार सृजन और औद्योगिक विस्तार में भी अहम भूमिका निभाएगा।

निर्यात में तेज वृद्धि की उम्मीद
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि इस समझौते के लागू होने के बाद भारत का वस्त्र और परिधान निर्यात मौजूदा लगभग 7 अरब डॉलर से बढ़कर 30 से 40 अरब डॉलर तक पहुंचने की क्षमता रखता है। उन्होंने बताया कि यह वृद्धि अपेक्षाकृत कम समय में संभव है, क्योंकि यूरोपीय बाजार में भारतीय उत्पादों को अब बेहतर शुल्क शर्तों पर प्रवेश मिलेगा। मंत्री के अनुसार, इससे श्रम-प्रधान इस उद्योग में 60 से 70 लाख तक नए रोजगार के अवसर बन सकते हैं।
बांग्लादेश से प्रतिस्पर्धा में बराबरी
पीयूष गोयल ने इस बात की ओर भी ध्यान दिलाया कि अब तक यूरोपीय कपड़ा बाजार में बांग्लादेश की मजबूत स्थिति का एक बड़ा कारण उसे मिलने वाली शून्य शुल्क सुविधा रही है। ‘कम विकसित देश’ की श्रेणी में होने के कारण बांग्लादेश को यूरोपीय संघ में बिना आयात शुल्क के वस्त्र निर्यात करने का लाभ मिलता था। इसी वजह से उसने लगभग 250 अरब डॉलर के यूरोपीय कपड़ा बाजार में करीब 30 अरब डॉलर की हिस्सेदारी बना ली। भारत, जहां अब तक 12 प्रतिशत तक शुल्क के साथ केवल 7 अरब डॉलर का निर्यात करता था, इस मामले में पीछे रह गया था। नए समझौते के बाद भारत को भी शुल्क के स्तर पर समान अवसर मिलेगा, जिससे प्रतिस्पर्धा अधिक संतुलित होगी।
कृषि के बाद सबसे बड़ा रोजगार क्षेत्र
मंत्री ने बताया कि वस्त्र उद्योग भारत में कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा रोजगार देने वाला क्षेत्र है। वर्तमान में इससे लगभग चार करोड़ लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है। यूरोपीय संघ को होने वाले निर्यात पर शुल्क समाप्त होने से उद्योग की लागत घटेगी और उत्पादन बढ़ेगा। इसका सीधा असर रोजगार पर भी पड़ेगा, खासकर उन क्षेत्रों में जहां कपड़ा और परिधान निर्माण आजीविका का प्रमुख साधन है।
समझौते का व्यापक दायरा
सरकार के अनुसार, यह मुक्त व्यापार समझौता अपने दायरे में अब तक के सबसे व्यापक समझौतों में से एक है। इसके तहत भारत से यूरोपीय संघ को होने वाले लगभग 99 प्रतिशत निर्यात और यूरोपीय संघ से भारत आने वाले करीब 97 प्रतिशत निर्यात को शामिल किया गया है। कपड़ा, परिधान, गृह सज्जा और फर्निशिंग जैसे क्षेत्रों को पहले दिन से ही शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी। वर्तमान में यूरोपीय बाजार में भारत की हिस्सेदारी वस्तुओं में लगभग 1.5 प्रतिशत और सेवाओं में 2.5 प्रतिशत है, जिसे बढ़ाने की पर्याप्त गुंजाइश मानी जा रही है।
कार्बन टैक्स से जुड़ी चुनौतियां
समझौते में आधुनिक व्यापार से जुड़ी चुनौतियों को भी ध्यान में रखा गया है। यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) को लेकर भारत की चिंताओं पर चर्चा हुई है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, यह नियम सभी व्यापारिक साझेदारों पर समान रूप से लागू होता है। इससे निपटने के लिए भारत और यूरोपीय संघ के बीच तकनीकी संवाद की व्यवस्था की जाएगी, ताकि भारत में ही यूरोपीय मानकों के अनुरूप कार्बन उत्सर्जन का सत्यापन किया जा सके।
भारतीय निर्यातकों के लिए नई राह
सरकार का कहना है कि इस तकनीकी सहयोग से भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय मानकों को समझने और अपनाने में आसानी होगी। इससे अनावश्यक बाधाएं कम होंगी और निर्यात प्रक्रिया अधिक सुचारु बनेगी। कुल मिलाकर, यह समझौता भारत के वस्त्र उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।