Thyroid – बढ़ते मामलों के पीछे छुपे कारणों पर विशेषज्ञ की अहम व्याख्या
Thyroid – आज के समय में थायराइड की समस्या किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं रह गई है। पुरुष हों या महिलाएं, युवा हों या अधेड़ उम्र के लोग—लगभग हर दूसरा व्यक्ति इससे जूझता नजर आता है। अधिकतर मामलों में इलाज की शुरुआत दवाओं से होती है, लेकिन कई बार नियमित दवा लेने के बावजूद लक्षण पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो पाते। इसी तेजी से बढ़ती समस्या को लेकर सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में डॉ. प्रमोद त्रिपाठी ने इसके पीछे के कारणों को विस्तार से समझाया है।

जेनेटिक नहीं, मेटाबॉलिक है अधिकतर थायराइड
डॉ. त्रिपाठी के अनुसार आज जिन लोगों में थायराइड डिटेक्ट हो रहा है, उनमें से अधिकांश मामलों का संबंध जेनेटिक कारणों से नहीं है। यानी यह समस्या माता-पिता से विरासत में मिली हुई नहीं होती। असल में यह एक मेटाबॉलिक डिसऑर्डर है, जो जीवनशैली से जुड़ी गड़बड़ियों के कारण विकसित होता है। खासकर महिलाओं में प्रेग्नेंसी के बाद, अचानक वजन बढ़ने पर, किसी संक्रमण से उबरने के बाद या लंबे समय तक तनाव में रहने के बाद थायराइड के लक्षण सामने आने लगते हैं। दवाओं से कुछ हद तक राहत जरूर मिलती है, लेकिन जड़ में मौजूद कारण बने रहने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होती।
लिवर की खराबी और थायराइड का सीधा संबंध
थायराइड हार्मोन के काम करने की प्रक्रिया में लिवर की भूमिका बेहद अहम होती है। शरीर में बनने वाला टी4 हार्मोन अपने आप में निष्क्रिय होता है, जिसे सक्रिय टी3 में बदलने का काम लगभग 80 प्रतिशत तक लिवर करता है। अगर किसी व्यक्ति का लिवर फैटी हो चुका है, तो यह कन्वर्जन सही तरीके से नहीं हो पाता। नतीजतन, शरीर में हाइपोथायराइड के लक्षण दिखने लगते हैं, भले ही रिपोर्ट में हार्मोन का स्तर बहुत ज्यादा बिगड़ा हुआ न हो।
इंसुलिन रेजिस्टेंस भी बन रहा है बड़ी वजह
लिवर के फैटी होने के पीछे एक अहम कारण इंसुलिन रेजिस्टेंस है। जब शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन पर सही प्रतिक्रिया नहीं देतीं, तो इसका असर लिवर और थायराइड—दोनों पर पड़ता है। इंसुलिन रेजिस्टेंस की स्थिति में थायराइड हार्मोन कोशिकाओं तक पहुंच तो जाता है, लेकिन वहां अपना असर ठीक से नहीं दिखा पाता। इससे थकान, वजन बढ़ना और सुस्ती जैसे लक्षण लंबे समय तक बने रहते हैं।
लगातार तनाव से बिगड़ता है हार्मोन बैलेंस
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में तनाव एक आम समस्या बन चुका है। लेकिन जब तनाव लंबे समय तक बना रहता है और भावनात्मक दबाव को संभालना मुश्किल हो जाता है, तो शरीर में रिवर्स टी3 नामक हार्मोन बनने लगता है। यह हार्मोन थायराइड रिसेप्टर्स से तो जुड़ता है, लेकिन कोई सक्रिय प्रतिक्रिया नहीं देता। इसका नतीजा यह होता है कि शरीर में थायराइड हार्मोन मौजूद होने के बावजूद उसके लक्षण खत्म नहीं होते।
पोषण की कमी भी नहीं है छोटी बात
थायराइड के बढ़ते मामलों के पीछे न्यूट्रिशन की कमी भी एक बड़ा कारण है। प्रोटीन, जिंक, आयोडीन और सेलेनियम जैसे जरूरी पोषक तत्व अगर शरीर में पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलते, तो थायराइड हार्मोन के निर्माण के लिए जरूरी कच्चा माल ही उपलब्ध नहीं हो पाता। लंबे समय से केवल आरओ वाटर पीने वालों में भी कुछ जरूरी मिनरल्स की कमी देखी गई है, जो धीरे-धीरे थायराइड की समस्या को बढ़ा सकती है।
वायरल संक्रमण के बाद भी दिख रहे हैं केस
हाल के वर्षों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां कोविड या अन्य वायरल संक्रमण के बाद शरीर में सूजन बढ़ गई। इस इन्फ्लेमेशन का असर थायराइड ग्लैंड पर भी पड़ता है, जिससे अस्थायी या स्थायी रूप से थायराइड डिटेक्ट हो जाता है। ऐसे मामलों में केवल दवा नहीं, बल्कि पूरे मेटाबॉलिक हेल्थ पर ध्यान देना जरूरी माना जा रहा है।



