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Extradition – तुर्की में छिपे दो वांटेड अपराधियों पर भारत का शिकंजा

Extradition – भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने विदेशों में छिपे संगठित अपराध से जुड़े आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। दाऊद इब्राहिम के करीबी माने जाने वाले ड्रग तस्कर सलीम डोला के हालिया प्रत्यर्पण के बाद अब भारत ने तुर्की में मौजूद दो और वांछित अपराधियों को वापस लाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों आरोपी लंबे समय से ड्रग तस्करी, धमकी और संगठित अपराध के मामलों में जांच एजेंसियों की सूची में शामिल हैं।

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पंजाब और मध्य प्रदेश से जुड़े हैं आरोपी

सूत्रों के अनुसार, जिन दो अपराधियों के प्रत्यर्पण की कोशिश की जा रही है उनमें पंजाब का रहने वाला नवप्रीत सिंह उर्फ ‘नव’ और मध्य प्रदेश का मोहम्मद सरताज शामिल हैं। 34 वर्षीय नवप्रीत पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े नेटवर्क चलाने के आरोप हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि उसकी गतिविधियां कई देशों तक फैली हुई हैं और उसकी अंतिम लोकेशन तुर्की में मिली थी।

वहीं 42 वर्षीय मोहम्मद सरताज पर रंगदारी, धमकी और हिंसा से जुड़े कई गंभीर मामले दर्ज हैं। भारत सरकार ने दोनों आरोपियों को वापस लाने के लिए पहले ही तुर्की प्रशासन को औपचारिक अनुरोध भेज दिया है।

ड्रग नेटवर्क पर लगातार कार्रवाई

भारतीय एजेंसियां पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट्स के खिलाफ अभियान चला रही हैं। इसी कड़ी में हाल ही में अजरबैजान से प्रभदीप सिंह को भारत लाया गया था। जांच अधिकारियों के मुताबिक, वह नवप्रीत सिंह के नेटवर्क से जुड़ा हुआ था और भारत में सिंडिकेट के संचालन में उसकी अहम भूमिका थी।

प्रभदीप का नाम वर्ष 2021 में पकड़ी गई 358 किलो हेरोइन मामले में सामने आया था। सीबीआई और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने संयुक्त कार्रवाई के तहत उसे अजरबैजान से प्रत्यर्पित कराया। वह पिछले दो वर्षों से फरार चल रहा था।

सलीम डोला के मामले ने बढ़ाई सक्रियता

कुछ सप्ताह पहले ही सलीम डोला को तुर्की से भारत लाया गया था। जांच एजेंसियों के अनुसार, वह अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क से जुड़ा हुआ था और लंबे समय से विदेश में रह रहा था। अधिकारियों का कहना है कि उसने तुर्की में निवेश आधारित नागरिकता हासिल करने की कोशिश भी की थी।

भारतीय एजेंसियों की ओर से इंटरपोल के जरिए जारी नोटिस और दोनों देशों के बीच समन्वय के चलते उसकी गिरफ्तारी संभव हो सकी। सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तारी से पहले वह फर्जी दस्तावेजों के जरिए किसी अन्य देश जाने की तैयारी में था।

भारत और तुर्की के बीच बढ़ा सहयोग

सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि भारत और तुर्की के बीच प्रत्यर्पण मामलों में सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। दोनों देशों के बीच वर्ष 2001 में प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर हुए थे, जो 2002 से प्रभावी है। इसी समझौते के तहत आतंकवाद, ड्रग तस्करी और संगठित अपराध से जुड़े मामलों में आरोपियों को एक-दूसरे के देश से वापस लाने की प्रक्रिया पूरी की जाती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई में इंटरपोल रेड नोटिस और द्विपक्षीय सहयोग की भूमिका अहम होती है। भारत पहले भी तुर्की की मदद से कई संदिग्धों और चरमपंथी संगठनों से जुड़े लोगों को वापस ला चुका है।

लंबी लेकिन अहम होती है प्रत्यर्पण प्रक्रिया

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि प्रत्यर्पण प्रक्रिया अक्सर लंबी और जटिल होती है क्योंकि इसमें दोनों देशों के कानून, अदालतों और कूटनीतिक प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ता है। इसके बावजूद हाल के मामलों ने यह संकेत दिया है कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए भारत विदेशों में छिपे वांछित अपराधियों तक पहुंच बनाने में सफल हो रहा है।

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