बिहार

Bhagalpur Devshayani Ekadashi – भागलपुर के मंदिरों में हरिशयनी एकादशी पर गूंजे मंत्र, मांगलिक कार्यों पर लगा विराम

Bhagalpur Devshayani Ekadashi – भागलपुर समेत आसपास के क्षेत्रों में शनिवार को हरिशयनी यानी देवशयनी एकादशी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। शहर के विभिन्न ठाकुरबाड़ियों और प्रमुख मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। विशेष पूजा-अर्चना, जलाभिषेक और कथा श्रवण के साथ ही सनातन परंपरा के अनुसार चार महीने का पवित्र चातुर्मास काल विधिवत शुरू हो गया है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इन चार महीनों के दौरान भगवान श्री हरि विष्णु क्षीर सागर में योगनिद्रा में विश्राम करते हैं। इसके चलते विवाह, मुंडन, मुंडन संस्कार और गृह प्रवेश जैसे सभी तरह के मांगलिक व शुभ कार्यों पर रोक लग गई है।

bhagalpur devshayani ekadashi celebrations

बाजार में मंदी का साया, अब सावन से बढ़ीं उम्मीदें

मांगलिक आयोजनों पर विराम लगने का सीधा असर स्थानीय व्यापार पर देखने को मिल रहा है। सराफा बाजार और कपड़ा व्यवसाय में फिलहाल सुस्ती का माहौल है। हालांकि, स्थानीय व्यापारियों को आने वाले सावन महीने से काफी उम्मीदें हैं। भागलपुर के थोक और खुदरा बाजारों में गेरुआ वस्त्र, पूजन सामग्री, फल तथा अन्य धार्मिक वस्तुओं की मांग बढ़ने लगी है। कारोबारियों का मानना है कि शिवभक्तों की आवाजाही से बाजार में एक बार फिर रौनक लौटेगी। इसके अलावा, एकादशी के पावन अवसर पर शाम के समय खाटू श्याम मंदिर में भव्य ज्योत प्रज्ज्वलित की जाएगी, जिसके बाद भजन संध्या का आयोजन भी निर्धारित है।

20 नवंबर को जगेगी शहनाइयों की गूंज

कर्मकांड के विद्वानों का कहना है कि चातुर्मास की अवधि केवल ईश्वर की आराधना, संयम और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए समर्पित होती है। पंडित समीर मिश्रा के अनुसार कार्तिक शुक्ल पक्ष की देवोत्थान या देवउठनी एकादशी इस बार 20 नवंबर को पड़ रही है। इसी दिन श्री हरि विष्णु योगनिद्रा से जागेंगे और चातुर्मास का समापन होगा। 20 नवंबर को ही तुलसी विवाह का आयोजन किया जाएगा, जिसके साथ ही शुभ और वैवाहिक लग्नों का दौर दोबारा शुरू हो जाएगा। तब तक सभी प्रकार के मांगलिक कार्य स्थगित रहेंगे।

चंपापुर जैन सिद्धक्षेत्र में चातुर्मास की भव्य तैयारी

दूसरी ओर, भागलपुर के ऐतिहासिक चंपापुर जैन सिद्धक्षेत्र में भी जैन धर्मावलंबियों के चातुर्मास को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। सिद्धक्षेत्र के मंत्री सुनील जैन ने बताया कि जैन समाज का चातुर्मास 28 जुलाई से प्रारंभ होकर 8 नवंबर तक चलेगा। इस दौरान 16 सितंबर को दशलक्षण महापर्व और 25 सितंबर को भगवान वासुपूज्य का निर्वाण महोत्सव अत्यंत श्रद्धा भाव से मनाया जाएगा।

इस पावन अवसर पर देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। आयोजन को भव्य बनाने के लिए राजस्थान से विशेष अष्टमंगल द्रव्य और जबलपुर से अभिषेक कलश मंगवाए गए हैं। इस बार चातुर्मास के दौरान साधकों को पूज्य माता आर्यिका जी का सानिध्य और मार्गदर्शन प्राप्त होगा, जिससे क्षेत्र का माहौल पूरी तरह भक्तिमय बना हुआ है।

Back to top button

Adblock Detected

Please remove AdBlocker first, and then watch everything easily.