NEET – भागलपुर में छात्रों का उग्र प्रदर्शन, केंद्र सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा
NEET –देशभर में चर्चा का विषय बनी नीट परीक्षा में गड़बड़ी और दिल्ली में विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए बल प्रयोग के खिलाफ शनिवार को आयोजित बिहार बंद का मिला-जुला असर देखने को मिला। भागलपुर में सुबह से ही छात्र-छात्राओं का जमावड़ा शुरू हो गया था, जो समय बीतने के साथ एक बड़े जनांदोलन में बदल गया। शहर के प्रमुख स्टेशन चौक पर हजारों की तादाद में एकत्र हुए युवाओं ने केंद्र सरकार की नीतियों और परीक्षा प्रणाली के खिलाफ जमकर विरोध दर्ज कराया।

स्टेशन चौक पर गूंजे विरोध के स्वर
सुबह करीब नौ बजे से ही छात्र-छात्राओं का स्टेशन परिसर के आसपास जुटना शुरू हो गया था। साढ़े दस बजे तक वहां भारी भीड़ जमा हो चुकी थी। युवाओं ने हाथों में तरह-तरह के संदेश लिखी तख्तियां ले रखी थीं और वे केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा की साख पूरी तरह से दांव पर लग चुकी है, जिससे लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य अंधकार में लटक गया है।
निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
आंदोलन में शामिल युवाओं ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पूर्ण पारदर्शिता बरतने की मांग की। छात्रों का साफ तौर पर कहना था कि पर्चा लीक करने वाले गिरोह और इसमें शामिल जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कदम उठाए जाएं। इसके साथ ही, दिल्ली में शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज उठा रहे विद्यार्थियों पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज की भी कड़े शब्दों में निंदा की गई। प्रदर्शनकारी इस पूरे घटनाक्रम की नैतिक जिम्मेदारी तय करने की मांग पर अड़े हुए थे।
आंदोलन में छात्राओं की अग्रिम भूमिका
इस प्रदर्शन की सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि इसमें छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पुरुषों की तुलना में महिला अभ्यर्थियों की मौजूदगी ज्यादा नजर आई। उनका कहना था कि महीनों की कड़ी मेहनत के बाद जब इस तरह की गड़बड़ियां सामने आती हैं, तो सबसे ज्यादा निराशा उन्हें ही होती है। छात्राओं ने स्पष्ट किया कि जब तक परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाने और जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों की जवाबदेही तय करने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक वे चुप नहीं बैठेंगी।
व्यापार और यातायात पर दिखा असर
स्टेशन चौक के आसपास स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद दिखाई दिया। छात्रों का जत्था शांतिपूर्ण तरीके से मुख्य बाजार की ओर भी गया। हालांकि प्रदर्शनकारियों ने किसी के साथ जबरदस्ती नहीं की, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से और छात्रों के प्रति समर्थन व्यक्त करते हुए आधे से अधिक दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखे। सड़कों पर आम दिनों की तुलना में वाहनों की आवाजाही काफी कम रही और दूर-दराज से आने वाले यात्रियों को भी थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा।
इस पूरे विरोध प्रदर्शन का संयोजन छात्र संगठन आइसा, इंकलाबी नौजवान सभा और बहुजन स्टूडेंट्स यूनियन के प्रतिनिधियों की देखरेख में किया गया। नेताओं ने एक सुर में कहा कि यह लड़ाई केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की समूची शिक्षा प्रणाली को बचाने का एक प्रयास है।