Diplomacy – ताजमहल दौरे के बाद ईरान ने मार्को रुबियो पर साधा निशाना
Diplomacy – अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो इन दिनों भारत दौरे पर हैं। नई दिल्ली में कई अहम बैठकों और कूटनीतिक कार्यक्रमों के बीच सोमवार को वह अपनी पत्नी के साथ आगरा पहुंचे, जहां उन्होंने ताजमहल का भ्रमण किया। दौरे के दौरान उन्होंने स्मारक परिसर में ली गई तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं। इसके बाद भारत स्थित ईरानी वाणिज्य दूतावास ने उनके इस दौरे को लेकर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी, जिसने चर्चा को नया मोड़ दे दिया।

ईरानी वाणिज्य दूतावास की टिप्पणी
हैदराबाद स्थित ईरानी वाणिज्य दूतावास ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री पर परोक्ष टिप्पणी की। पोस्ट में कहा गया कि यदि इतिहास और वास्तुकला की बेहतर समझ होती, तो ताजमहल के सामने तस्वीरें खिंचवाने का अर्थ भी अलग नजर आता। दूतावास ने यह भी उल्लेख किया कि ताजमहल का निर्माण एक मुगल शासक ने अपनी फारसी मूल की पत्नी की याद में करवाया था और इसके निर्माण में ईरानी वास्तुकारों की भी अहम भूमिका रही थी।
पोस्ट में अमेरिकी नीतियों पर भी कटाक्ष किया गया और कहा गया कि जिस सभ्यता के योगदान की मिसाल दुनिया के सामने है, उसी के खिलाफ कठोर बयानबाजी की जा रही है। हालांकि अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से इस टिप्पणी पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
ताजमहल और फारसी विरासत का संबंध
इतिहासकारों के अनुसार, ताजमहल केवल भारतीय स्थापत्य कला का प्रतीक नहीं बल्कि उसमें फारसी वास्तुकला की झलक भी दिखाई देती है। मुगल सम्राट शाहजहां ने इसे अपनी पत्नी मुमताज महल की स्मृति में बनवाया था, जिनका संबंध फारसी परिवार से माना जाता है। स्मारक के डिजाइन, नक्काशी और बागवानी शैली में भी मध्य एशियाई और फारसी प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ताजमहल के निर्माण में भारत सहित कई क्षेत्रों के कारीगरों और वास्तुकारों ने योगदान दिया था। यही वजह है कि यह स्मारक आज भी सांस्कृतिक मेल-जोल और स्थापत्य कला का वैश्विक उदाहरण माना जाता है।
ट्रंप के पुराने बयान का भी जिक्र
ईरानी दूतावास की टिप्पणी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पुराने बयान का भी संदर्भ शामिल था। ट्रंप ने कुछ समय पहले ईरान को लेकर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि समझौता न होने की स्थिति में “एक पूरी सभ्यता खत्म हो सकती है।” उस बयान की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी आलोचना हुई थी। ईरानी पक्ष ने अब उसी बयान को आधार बनाकर अमेरिकी नेतृत्व की नीतियों पर सवाल उठाए हैं।
प्रेस वार्ता में भी उठा था विवादित सवाल
भारत दौरे के दौरान रुबियो एक अन्य सवाल को लेकर भी चर्चा में रहे। रविवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ हुई संयुक्त प्रेस वार्ता में उनसे पूछा गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा भारत को लेकर दिए गए पुराने विवादित बयान को किस संदर्भ में देखा जाए। सवाल सुनकर रुबियो कुछ क्षणों के लिए असहज दिखाई दिए। बाद में उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप भारत और भारतीय लोगों के प्रति सकारात्मक सोच रखते हैं और दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करना चाहते हैं।
कूटनीतिक चर्चाओं के बीच बढ़ी चर्चा
रुबियो का भारत दौरा मुख्य रूप से रणनीतिक और आर्थिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित है। लेकिन ताजमहल यात्रा और उसके बाद आई ईरानी प्रतिक्रिया ने इस दौरे को सांस्कृतिक और राजनीतिक बहस से भी जोड़ दिया है। सोशल मीडिया पर इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।