FactCheck – जयशंकर के नाम से वायरल वीडियो को PIB ने बताया फर्जी
FactCheck – सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से साझा किया जा रहा है, जिसमें दावा किया गया कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका से कथित “कॉकरोच जनता पार्टी” से जुड़े लोगों को भारत को सौंपने की मांग की है। वीडियो के वायरल होने के बाद इस पर बहस शुरू हो गई। हालांकि सरकारी फैक्ट चेक एजेंसी PIB ने साफ किया है कि यह वीडियो असली नहीं है और इसे कृत्रिम तकनीक की मदद से तैयार किया गया है।

वीडियो में क्या दावा किया गया था
वायरल वीडियो में विदेश मंत्री एस जयशंकर की आवाज और बयान जैसा दिखाने की कोशिश की गई थी। वीडियो में यह दावा किया गया कि उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बातचीत के दौरान कहा कि कुछ गैर-राज्य तत्व अमेरिका की जमीन का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए कर रहे हैं। वीडियो में “कॉकरोच जनता पार्टी” नाम के मंच का भी जिक्र किया गया।
इसके अलावा वीडियो में यह भी सुनाई देता है कि भारत ने अमेरिका और इजरायल के साथ अपने संबंध मजबूत किए हैं, जबकि कुछ लोग कथित तौर पर ईरान और पाकिस्तान से जुड़े एजेंडे चला रहे हैं। वीडियो में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ऐसे लोगों को भारत को सौंपने की अपील किए जाने का भी दावा किया गया।
सोशल मीडिया पर तेजी से फैला वीडियो
यह वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक अकाउंट द्वारा साझा किया गया था। कुछ ही घंटों में इसे बड़ी संख्या में लोगों ने देखना और आगे शेयर करना शुरू कर दिया। कई यूजर्स ने इसकी सत्यता पर सवाल उठाए, जबकि कुछ लोगों ने इसे वास्तविक बयान मान लिया।
डिजिटल विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के समय में AI तकनीक की मदद से बनाए गए वीडियो और ऑडियो क्लिप तेजी से बढ़े हैं, जिनमें किसी व्यक्ति की आवाज और चेहरे की हूबहू नकल की जा सकती है। ऐसे मामलों में आधिकारिक पुष्टि बेहद जरूरी हो जाती है।
PIB फैक्ट चेक ने दी सफाई
वायरल वीडियो पर बढ़ती चर्चा के बीच प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो की फैक्ट चेक इकाई ने इसे फर्जी बताया। PIB ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में कहा कि विदेश मंत्री एस जयशंकर का यह वीडियो डिजिटल तरीके से एडिट किया गया है और इसमें AI तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।
एजेंसी ने स्पष्ट किया कि विदेश मंत्री ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है। साथ ही लोगों से अपील की गई कि वे सोशल मीडिया पर साझा होने वाली अपुष्ट सामग्री को बिना जांचे आगे न फैलाएं।
AI आधारित फर्जी सामग्री को लेकर बढ़ी चिंता
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि Deepfake और AI जनरेटेड वीडियो आने वाले समय में बड़ी चुनौती बन सकते हैं। ऐसे वीडियो न केवल गलत सूचना फैलाते हैं, बल्कि सार्वजनिक व्यक्तियों की छवि और कूटनीतिक संबंधों को भी प्रभावित कर सकते हैं।
सरकारी एजेंसियां लगातार लोगों को डिजिटल सामग्री की सत्यता जांचने की सलाह दे रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी वायरल वीडियो को सही मानने से पहले आधिकारिक स्रोतों या विश्वसनीय समाचार माध्यमों से पुष्टि करना जरूरी है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर निगरानी की मांग
इस घटना के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फर्जी और भ्रामक सामग्री की निगरानी को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। कई साइबर विशेषज्ञों ने कहा है कि AI आधारित गलत सूचनाओं को रोकने के लिए तकनीकी और कानूनी दोनों स्तरों पर मजबूत व्यवस्था की जरूरत है।
फिलहाल PIB की ओर से वीडियो को फर्जी घोषित किए जाने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि विदेश मंत्री के नाम से वायरल किया गया बयान वास्तविक नहीं था और इसे डिजिटल एडिटिंग तकनीक के जरिए तैयार किया गया था।