उत्तर प्रदेश

Gyanvapi – मध्यस्थता प्रक्रिया में मुस्लिम पक्ष भी रखेगा अपना पक्ष

Gyanvapi- वाराणसी के ज्ञानवापी विवाद से जुड़े मामलों के समाधान के लिए प्रस्तावित मध्यस्थता प्रक्रिया में अब मुस्लिम पक्ष भी शामिल होगा। सुप्रीम कोर्ट की पहल के बाद आयोजित होने वाली बैठक में अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद की ओर से अधिवक्ताओं का पैनल अपना पक्ष रखेगा। इससे पहले संगठन ने एक सार्वजनिक बयान जारी कर मध्यस्थता में शामिल न होने का निर्णय बताया था, लेकिन बाद में आंतरिक विचार-विमर्श के बाद बैठक में भाग लेने पर सहमति बन गई।

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जिला अदालत के निर्देश पर होगी बैठक

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप जिला न्यायालय ने ज्ञानवापी से जुड़े मामलों को मध्यस्थता केंद्र भेजा है। इसके तहत सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर निर्धारित तिथि पर वार्ता के लिए आमंत्रित किया गया है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य न्यायिक ढांचे के भीतर आपसी संवाद के जरिए समाधान की संभावनाओं का पता लगाना है।

पहले जताई थी असहमति

सोमवार को अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद की ओर से जारी पत्र में कहा गया था कि संगठन प्रस्तावित मध्यस्थता प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनेगा। संगठन का मत था कि इतने संवेदनशील मामले का अंतिम समाधान न्यायालय के फैसले से ही निकलना चाहिए। हालांकि बाद में संगठन के पदाधिकारियों और कानूनी सलाहकारों के बीच हुई चर्चा के बाद अधिवक्ताओं को बैठक में भेजने का निर्णय लिया गया।

तीन सदस्यीय समिति करेगी सुनवाई

मध्यस्थता केंद्र से संबंधित दस्तावेजों को एडीजे-षष्ठम आलोक कुमार की अदालत में स्थानांतरित किया गया है। जानकारी के अनुसार, उनके नेतृत्व में गठित तीन सदस्यीय समिति वार्ता की प्रक्रिया का संचालन करेगी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव राजीव मुकुल पांडेय भी इस प्रक्रिया में मौजूद रहेंगे और आवश्यक न्यायिक औपचारिकताओं की निगरानी करेंगे।

कई मामलों पर हो सकता है विचार

हिंदू पक्ष के अधिवक्ताओं के अनुसार, मध्यस्थता के दौरान ज्ञानवापी परिसर से जुड़े कई लंबित मामलों पर चर्चा की जा सकती है। इनमें शृंगार गौरी में दर्शन-पूजन से संबंधित वाद, परिसर के तहखानों के सर्वेक्षण की मांग और अन्य लंबित याचिकाएं शामिल हैं। हालांकि किसी भी मामले में अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप ही होगा।

कुछ पक्षों ने अब भी जताई आपत्ति

शृंगार गौरी मामले की वादिनी राखी सिंह की ओर से मध्यस्थता प्रक्रिया में शामिल होने पर आपत्ति दर्ज कराई गई है। उनके अधिवक्ता ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को आवेदन देकर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि संबंधित मामलों पर अंतिम निर्णय शीर्ष अदालत के निर्देशों के अनुरूप ही होना चाहिए। दूसरी ओर, जिला प्रशासन की ओर से नियुक्त विशेष अधिवक्ता ने पुष्टि की है कि प्रशासन मध्यस्थता प्रक्रिया में शामिल होकर अपना पक्ष रखेगा।

कानूनी समाधान पर बनी हुई है नजर

ज्ञानवापी विवाद लंबे समय से न्यायालय में विचाराधीन है और इसे संवेदनशील मामलों में गिना जाता है। स्थानीय स्तर पर भी विभिन्न पक्षों का मानना है कि इस विवाद का स्थायी समाधान कानून और न्यायालय की प्रक्रिया के माध्यम से ही निकलना चाहिए। फिलहाल सभी की निगाहें प्रस्तावित मध्यस्थता बैठक और उससे आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं।

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