Diabetes- घर की रोटी-सब्जी खाने के बाद भी क्यों बढ़ जाता है शुगर…
Diabetes- डायबिटीज के मरीज अक्सर यह महसूस करते हैं कि घर पर तैयार की गई हल्की-फुल्की रोटी और सब्जी खाने के बावजूद उनका शुगर लेवल अचानक बढ़ जाता है। ऐसे में कई लोग रोटी को ही असली समस्या मान बैठते हैं और इसे खाने से बचने लगते हैं। हालांकि, डायबिटीज विशेषज्ञ डॉ रुचिता मेहता कहती हैं कि रोटी किसी भी तरह से “खराब” नहीं है। असली कारण है खाने के तरीके में छोटी लेकिन अहम गलतियाँ। भारतीय डायबिटीज पेशेंट अक्सर यही गलती करते हैं, जिसकी वजह से घर का साधारण भोजन भी ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ा देता है।

गलत ऑर्डर में खाना बनाता है शुगर बढ़ने का कारण
डॉ मेहता बताती हैं कि अधिकांश मरीज रोटी-सब्जी का सेवन गलत क्रम में करते हैं। अधिकतर लोग सबसे पहले रोटी खाते हैं, उसके बाद सब्ज़ी और प्रोटीन—जो कि कई बार भोजन में शामिल ही नहीं होता। जब भोजन की शुरुआत कार्बोहाइड्रेट्स जैसे रोटी, चावल या पोहा से होती है, तो ब्लड शुगर अचानक बढ़ जाता है। इसके परिणामस्वरूप इंसुलिन का स्तर तेजी से बढ़ता है और शरीर पैनिक मोड में चला जाता है। यही वजह है कि खाना हल्का और स्वस्थ होने के बावजूद शुगर बढ़ जाता है।
खाने का सही क्रम अपनाएं
विशेषज्ञों के अनुसार, भोजन की शुरुआत हमेशा फाइबर से करनी चाहिए। सलाद या सब्ज़ियों के साथ भोजन शुरू करने से ग्लूकोज धीरे-धीरे अवशोषित होता है। इसके बाद प्रोटीन का स्रोत लेना चाहिए—जैसे दाल, पनीर, दही, टोफू या अंडा। अंत में कार्बोहाइड्रेट्स शामिल करें। यह सरल बदलाव ब्लड शुगर की बढ़ोतरी को नियंत्रित करता है, इंसुलिन रिस्पॉन्स को बेहतर बनाता है, पेट लंबे समय तक भरा रहता है और भूख के दौरान क्रेविंग कम होती है।
केवल क्या खाते हैं, उतना जरूरी है जितना कैसे खाते हैं
कई मरीज शिकायत करते हैं कि वही भोजन खाने के बावजूद शुगर बढ़ रहा है। इसका कारण है कि “कैसे खाते हैं” उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि “क्या खाते हैं”। दवाएँ शुगर को अस्थायी रूप से नियंत्रित कर सकती हैं, लेकिन भोजन का सही क्रम अपनाने से शरीर ग्लूकोज को बेहतर तरीके से हैंडल करना सीखता है। यही कारण है कि एक ही भोजन और कैलोरी होने के बावजूद केवल खाने के तरीके में बदलाव से ब्लड शुगर नियंत्रण में महत्वपूर्ण सुधार आता है।
निष्कर्ष
डायबिटीज प्रबंधन में रोटी या साधारण घर का भोजन दोषी नहीं है। ब्लड शुगर नियंत्रण के लिए केवल खाने की आदतों में छोटे लेकिन प्रभावशाली बदलाव करना काफी है। फाइबर से शुरुआत, प्रोटीन के बाद कार्ब्स शामिल करना और खाने का सही क्रम अपनाना मरीजों के लिए स्वस्थ विकल्प साबित हो सकता है।