Frozen Shoulder – कंधे की अकड़न और दर्द से राहत दिला सकती है यह पारंपरिक घरेलू थेरेपी
Frozen Shoulder – फ्रोजन शोल्डर, जिसे आम भाषा में कंधे की अकड़न कहा जाता है, आज तेजी से बढ़ती जीवनशैली से जुड़ी समस्याओं में शामिल हो चुकी है। लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठकर काम करना, लगातार मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल, गलत पोश्चर, बढ़ती उम्र, डायबिटीज या किसी चोट के बाद कंधे को पर्याप्त मूवमेंट न देना इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। इस समस्या में कंधे की गति धीरे-धीरे सीमित हो जाती है और हाथ उठाना, पीछे ले जाना या रोजमर्रा के काम करना तक कठिन हो जाता है।

फ्रोजन शोल्डर क्यों बन रहा है आम समस्या
विशेषज्ञों के अनुसार, शहरी जीवनशैली में शारीरिक गतिविधियों की कमी और घंटों एक ही पोजिशन में बैठे रहने की आदत कंधे की मांसपेशियों को जकड़ देती है। समय के साथ कंधे के जॉइंट के आसपास की मांसपेशियां और लिगामेंट्स सख्त हो जाते हैं, जिससे दर्द और अकड़न बढ़ती जाती है। कई मामलों में यह समस्या धीरे-धीरे बढ़ती है और शुरुआत में लोग इसे मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
क्या है पोटली थेरेपी और क्यों मानी जाती है प्रभावी
न्यूट्रिशनिस्ट श्वेता शाह द्वारा सुझाई गई पोटली थेरेपी एक पारंपरिक घरेलू उपाय है, जिसका उपयोग वर्षों से मांसपेशियों और जोड़ों के दर्द में किया जाता रहा है। इस थेरेपी में प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और मसालों को गर्म करके कपड़े की पोटली में बांधा जाता है और प्रभावित हिस्से पर हल्के दबाव के साथ सेंक दिया जाता है। गर्माहट के कारण ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, जिससे जकड़ी हुई मांसपेशियों को धीरे-धीरे आराम मिलता है।
पोटली थेरेपी फ्रोजन शोल्डर में कैसे मदद करती है
फ्रोजन शोल्डर में कंधे की मांसपेशियों में सूजन और सख्ती आ जाती है। पोटली से मिलने वाली गर्म सेंक मांसपेशियों को रिलैक्स करने में मदद करती है और दर्द के संकेतों को कम करती है। नियमित रूप से इसका उपयोग करने पर कंधे की मूवमेंट में सुधार महसूस किया जा सकता है। यह थेरेपी दवाइयों के साथ सहायक उपाय के रूप में भी अपनाई जा सकती है।
पोटली में इस्तेमाल होने वाली सामग्री
इस घरेलू पोटली को बनाने के लिए किसी खास या महंगी चीज की जरूरत नहीं होती। आमतौर पर रसोई में मौजूद सामग्री ही पर्याप्त होती है। इसमें अजवाइन का उपयोग सूजन और दर्द को कम करने के लिए किया जाता है। सेंधा नमक मांसपेशियों को ढीला करने में मदद करता है। सूखी सौंठ पाउडर की गर्म तासीर अकड़न को घटाने में सहायक मानी जाती है। सरसों के दाने ब्लड सर्कुलेशन को सक्रिय करते हैं, जबकि कुछ बूंदें अरंडी के तेल की जोड़ों और मांसपेशियों को पोषण देती हैं।
पोटली बनाने और उपयोग करने का सही तरीका
इन सभी सामग्रियों को एक साफ सूती कपड़े में डालकर पोटली की तरह बांध लें। इसके बाद पोटली को माइक्रोवेव में दो से तीन मिनट तक हल्का गर्म करें। ध्यान रखें कि पोटली जरूरत से ज्यादा गर्म न हो, ताकि त्वचा को नुकसान न पहुंचे। अब इस गर्म पोटली से कंधे के दर्द वाले हिस्से पर हल्के हाथों से सेंक करें। दिन में एक या दो बार यह प्रक्रिया दोहराने से कुछ दिनों में जकड़न और दर्द में फर्क महसूस हो सकता है।
किन सावधानियों का रखना चाहिए ध्यान
यदि कंधे की त्वचा पर पहले से कोई घाव, जलन या अधिक सूजन हो, तो पोटली थेरेपी से बचना चाहिए। लंबे समय से बना हुआ या असहनीय दर्द होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहना सही नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि पोटली थेरेपी के साथ हल्की स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज और सही पोश्चर भी उतना ही जरूरी है।
घरेलू उपायों की भूमिका क्यों है अहम
फ्रोजन शोल्डर के इलाज में दवाइयों के साथ-साथ घरेलू और प्राकृतिक उपाय भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। न्यूट्रिशनिस्ट श्वेता शाह की बताई गई यह पोटली थेरेपी सरल, सुरक्षित और घर पर आसानी से अपनाई जा सकने वाली विधि है। नियमित देखभाल, संयम और सही समय पर विशेषज्ञ की सलाह से कंधे की अकड़न और दर्द में काफी हद तक राहत पाई जा सकती है।



