अंतर्राष्ट्रीय

IranNuclearTalks – जिनेवा वार्ता से पहले ईरान की कूटनीतिक सक्रियता तेज

IranNuclearTalks – अमेरिका के साथ प्रस्तावित दूसरे दौर की परमाणु वार्ता से ठीक पहले ईरान ने अपनी कूटनीतिक पहल तेज कर दी है। इसी क्रम में तेहरान के प्रतिनिधिमंडल ने जिनेवा में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के अधिकारियों से मुलाकात की। इस बैठक को आगामी बातचीत से पहले रणनीतिक तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। जानकारों का मानना है कि ईरान अपने रुख को स्पष्ट करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह संकेत देना चाहता है कि वह संवाद के लिए तैयार है, लेकिन अपनी शर्तों के साथ।

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विदेश मंत्री की जिनेवा में सक्रियता

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने आईएईए के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी से मुलाकात की। इसके साथ ही उन्होंने ओमान के विदेश मंत्री बदर अल-बुसैदी से भी बातचीत की योजना की जानकारी दी, जो इस वार्ता की मेजबानी कर रहे हैं। अराघची ने सोशल मीडिया पर कहा कि वह जिनेवा में निष्पक्ष और संतुलित समझौते के उद्देश्य से ठोस प्रस्ताव लेकर पहुंचे हैं।

यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

प्रतिबंधों में राहत की मांग

ईरान के उप विदेश मंत्री माजिद तख्त-रवांची ने संकेत दिया है कि तेहरान समझौते के लिए तैयार हो सकता है, बशर्ते अमेरिका प्रतिबंधों में राहत देने पर सहमत हो। एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि अब निर्णय अमेरिका के हाथ में है और यदि वाशिंगटन ईमानदारी दिखाता है तो समझौते की राह खुल सकती है।

उनके मुताबिक, ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने के लिए तैयार है, लेकिन आर्थिक प्रतिबंधों को नजरअंदाज कर बातचीत आगे नहीं बढ़ सकती।

अमेरिकी रुख और कूटनीतिक प्राथमिकता

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कूटनीति को प्राथमिकता दे रहे हैं। स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन फिलहाल वार्ता के माध्यम से समाधान तलाश रहा है।

हालांकि, अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बनाए रखी है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संभावित स्थिति के लिए सभी विकल्प खुले रखे गए हैं, लेकिन प्राथमिकता बातचीत को दी जा रही है।

क्षेत्रीय तनाव और वार्ता की पृष्ठभूमि

जिनेवा में प्रस्तावित बैठक ऐसे समय हो रही है जब ईरान के परमाणु संवर्धन कार्यक्रम और उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम के भंडार को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता बनी हुई है। ओमान की मध्यस्थता से हो रही इस वार्ता में दोनों पक्षों के प्रतिनिधि आमने-सामने बैठेंगे।

ईरानी अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि किसी भी हमले की स्थिति में जवाबी कदम उठाए जाएंगे। दूसरी ओर, अमेरिकी नेतृत्व ने ईरान के पिछले अनुपालन रिकॉर्ड का हवाला देते हुए सावधानी बरतने की बात कही है।

आगे की राह पर नजर

विश्लेषकों का मानना है कि जिनेवा वार्ता दोनों देशों के लिए अहम परीक्षा होगी। यदि प्रतिबंधों में राहत और परमाणु गतिविधियों की सीमा तय करने पर सहमति बनती है, तो क्षेत्रीय तनाव कम हो सकता है।

फिलहाल, दोनों पक्ष अपने-अपने रुख के साथ वार्ता की मेज पर आने की तैयारी में हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि कूटनीतिक प्रयास स्थायी समझौते की दिशा में बढ़ते हैं या मतभेद बने रहते हैं।

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