T20WorldCup – सुपर 8 के पहले मुकाबले में भारत की हुई करारी हार
T20WorldCup – टी20 विश्व कप 2026 के सुपर 8 चरण की शुरुआत भारतीय टीम के लिए निराशाजनक रही। पहले ही मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका ने भारत को 76 रनों के बड़े अंतर से पराजित कर दिया। इस हार ने न सिर्फ टीम संयोजन पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि रणनीति को लेकर भी चर्चाओं का दौर तेज कर दिया है। मुकाबले में भारत ने अपनी प्लेइंग इलेवन में कोई बदलाव नहीं किया और उपकप्तान अक्षर पटेल को बाहर ही रखा। मैच के बाद इसी फैसले पर क्रिकेट जगत में बहस छिड़ गई।

मैच का संक्षिप्त हाल
सुपर 8 के इस अहम मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए मजबूत स्कोर खड़ा किया। भारतीय गेंदबाज शुरुआत में लय नहीं पकड़ सके और विरोधी टीम ने बीच के ओवरों में तेजी से रन जोड़े। लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम दबाव में नजर आई। शुरुआती विकेट जल्दी गिरने से पारी संभल नहीं सकी और पूरी टीम निर्धारित ओवरों से पहले ही सिमट गई। 76 रनों की यह हार टूर्नामेंट के इस महत्वपूर्ण चरण में भारत के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है।
टीम संयोजन पर उठे सवाल
मुकाबले से पहले यह उम्मीद की जा रही थी कि भारतीय टीम परिस्थितियों को देखते हुए बदलाव कर सकती है, लेकिन टीम प्रबंधन ने वही संयोजन बरकरार रखा जो पिछले मैचों में खेल रहा था। खासतौर पर अक्षर पटेल को बाहर रखने के फैसले ने कई पूर्व खिलाड़ियों को हैरान किया। उपकप्तान होने के बावजूद उन्हें अंतिम एकादश में जगह नहीं मिली। टीम प्रबंधन ने लेफ्ट-हैंड बल्लेबाजों के खिलाफ रणनीति के तहत वॉशिंगटन सुंदर को प्राथमिकता दी, लेकिन यह दांव कारगर साबित नहीं हुआ।
अश्विन की नाराजगी
पूर्व भारतीय ऑफ स्पिनर आर अश्विन ने इस फैसले पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि आईपीएल जैसे लंबे टूर्नामेंट में मैचअप की रणनीति समझ में आती है, जहां 14 या उससे ज्यादा मैच होते हैं। लेकिन आईसीसी टूर्नामेंट में टीम को जितना संभव हो स्थिर रखना चाहिए। उनके मुताबिक अक्षर पटेल टी20 प्रारूप में भारत के सबसे मूल्यवान खिलाड़ियों में से एक हैं और उन्हें बाहर बैठाना समझ से परे है।
पिछले प्रदर्शन की याद दिलाई
अश्विन ने यह भी याद दिलाया कि पिछले टी20 विश्व कप में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ कठिन परिस्थिति में अक्षर पटेल ने महत्वपूर्ण पारी खेली थी। उस मुकाबले में भारत ने शुरुआती तीन विकेट जल्दी गंवा दिए थे, लेकिन अक्षर ने 31 गेंदों में 47 रन बनाकर टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया था। उनकी उस पारी में एक चौका और चार छक्के शामिल थे। अश्विन का कहना है कि ऐसे खिलाड़ी को बड़े मैच में नजरअंदाज करना जोखिम भरा फैसला है।
रणनीति बनाम अनुभव
क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े टूर्नामेंट में संतुलित टीम संयोजन बेहद अहम होता है। सिर्फ आंकड़ों के आधार पर मैचअप तय करना हमेशा सही परिणाम नहीं देता। इस मुकाबले में वॉशिंगटन सुंदर से जिस भूमिका की उम्मीद थी, वह पूरी नहीं हो सकी। वहीं, अक्षर जैसे ऑलराउंडर की अनुपस्थिति खलती रही, खासकर तब जब मध्यक्रम दबाव में था। टीम चयन में अनुभव और हालिया प्रदर्शन के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन ऐसे मैचों में निर्णयों का असर सीधे परिणाम पर दिखता है।
आगे की राह
सुपर 8 चरण अभी जारी है और भारतीय टीम के पास वापसी का मौका रहेगा। हालांकि इस हार ने संकेत दे दिया है कि आगे की रणनीति पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। टीम प्रबंधन को संयोजन और भूमिका निर्धारण पर स्पष्टता लानी होगी। बड़े मंच पर छोटी चूक भी भारी पड़ सकती है। अब देखना होगा कि आगामी मुकाबलों में भारतीय टीम किस तरह से अपनी गलतियों से सीख लेती है और प्रदर्शन में सुधार करती है।



