बिहार

CrimeCase – मुजफ्फरपुर में पति की हत्या पर आरोपी को हुई उम्रकैद

CrimeCase – बिहार के मुजफ्फरपुर में चार साल पुराने एक चर्चित हत्याकांड में अदालत ने दोषी करार दिए गए सुभाष कुमार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-16 की अदालत ने सोमवार को फैसला सुनाते हुए उस पर कुल 55 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। मामला प्रेम संबंध के विवाद से जुड़ा था, जिसमें एक व्यक्ति की हत्या कर शव को ठिकाने लगाने की कोशिश की गई थी।

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हत्या और साक्ष्य मिटाने पर अलग-अलग सजा

अदालत ने हत्या के अपराध में उम्रकैद और 50 हजार रुपये जुर्माना तय किया। वहीं साक्ष्य नष्ट करने के आरोप में तीन वर्ष के कारावास और पांच हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगाया गया। हालांकि दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक अरविंद कुमार ने अदालत में साक्ष्य और गवाहों के बयान प्रस्तुत किए, जिनके आधार पर अदालत ने यह निर्णय दिया।

प्रेम प्रसंग बना वारदात की वजह

मामला नगर थाना क्षेत्र के बालूघाट इलाके का है। राकेश सहनी यहां किराए के मकान में रह रहा था। आरोप के अनुसार, उसकी पत्नी राधा देवी का सुभाष कुमार के साथ संबंध था, जिसका राकेश विरोध करता था। इसी विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। राकेश के भाई दिनेश सहनी ने 19 सितंबर 2021 को प्राथमिकी दर्ज कराते हुए राधा देवी, उसकी बहन, रिश्तेदार विकास कुमार और सुभाष कुमार को नामजद किया था। शिकायत में प्रेम संबंध को हत्या की वजह बताया गया था।

विस्फोट और आग से खुला मामला

18 सितंबर 2021 की रात किराए के बंद कमरे में अचानक विस्फोट हुआ और आग लग गई। सूचना पर पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम ने आग बुझाई तो अंदर की स्थिति संदिग्ध लगी। अगले दिन सुबह पुलिस ने कमरे में रखे एक ड्रम से शव के टुकड़े बरामद किए। इस बरामदगी के बाद मामला स्पष्ट हो गया कि हत्या के बाद शव को छिपाने की कोशिश की गई थी।

जांच में सामने आई साजिश

जांच में पता चला कि राकेश को बहाने से बाहर से बुलाया गया था। आरोप है कि हत्या के बाद शव को काटकर एक नीले ड्रम में रखा गया और उसे गलाने के लिए ब्लीचिंग पाउडर, नमक और अन्य रसायन डाले गए। कमरे को बंद कर दिया गया ताकि किसी को संदेह न हो। जब कई दिनों तक राकेश का पता नहीं चला तो उसके परिजनों को शक हुआ। पूछताछ के दौरान टालमटोल जवाब दिए गए, जिससे संदेह और गहरा गया।

गिरफ्तारी और आगे की कार्रवाई

प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने 22 सितंबर 2021 को सुभाष कुमार को रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया। बताया गया कि वह फरार होने की कोशिश में था। जांच के दौरान अन्य आरोपियों की भूमिका की भी पड़ताल की गई। अदालत में पेश साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर सुभाष को दोषी पाया गया।

इस फैसले के साथ चार वर्ष पुराने इस मामले का एक अहम चरण पूरा हुआ। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि गंभीर अपराधों में कानून के अनुसार कठोर दंड आवश्यक है। परिजनों ने फैसले पर संतोष जताया है।

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