अंतर्राष्ट्रीय

RussiaUkraineWar – चार साल बाद भी युद्धविराम पर नहीं बनी सहमति

RussiaUkraineWar – रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष को चार वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन अब तक स्थायी युद्धविराम की दिशा में कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई है। लगातार कोशिशों के बावजूद कूटनीतिक स्तर पर समाधान दूर नजर आ रहा है। इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने स्वीकार किया है कि लंबा खिंचता यह युद्ध आम नागरिकों पर भारी पड़ रहा है, हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की संप्रभुता से समझौता संभव नहीं है।

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जेलेंस्की का बयान: थकान है, लेकिन समर्पण नहीं

एक साक्षात्कार में जेलेंस्की ने कहा कि संघर्ष अब अपने पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है और स्वाभाविक है कि लोग मानसिक और आर्थिक दबाव महसूस कर रहे हैं। उनके मुताबिक, युद्ध से थकान का अर्थ यह नहीं कि यूक्रेन हथियार डाल दे। उन्होंने कहा कि रूस की ओर से रखी जा रही शर्तें ऐसी हैं, जिन्हें स्वीकार करना देश के हित में नहीं होगा। उनका तर्क है कि यदि दबाव में आकर समझौता किया गया तो स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर खतरा पैदा हो सकता है।

अमेरिका की भूमिका पर जोर

जेलेंस्की ने इस संघर्ष में अमेरिका के समर्थन को अहम बताया। उन्होंने कहा कि यदि वॉशिंगटन अधिक प्रभावी दबाव बनाए तो मॉस्को की रणनीति को प्रभावित किया जा सकता है। अमेरिकी नेतृत्व का जिक्र करते हुए उन्होंने संकेत दिया कि रूस पर कड़ा रुख अपनाना आवश्यक है। उनके अनुसार, रूस की सभी मांगों को मान लेना यूक्रेन के अस्तित्व के लिए जोखिम भरा होगा।

रूस का पक्ष: भविष्य और सुरक्षा की लड़ाई

दूसरी ओर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हाल में कहा कि उनका देश अपने भविष्य, स्वतंत्रता और सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने सैन्य अधिकारियों को सम्मानित करते हुए कहा कि अग्रिम मोर्चे पर तैनात बल राष्ट्रीय हितों की रक्षा कर रहे हैं। रूस ने फरवरी 2022 में यूक्रेन में सैन्य कार्रवाई शुरू की थी, जिसके बाद से दोनों देशों के बीच व्यापक संघर्ष जारी है।

संघर्ष के बीच हालिया घटनाएं

बीते महीनों में दोनों पक्षों को सैन्य और रणनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। हाल में रूस के एक महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठान पर हमले की खबरें भी सामने आईं। इन घटनाओं ने संघर्ष की तीव्रता को और रेखांकित किया है। हालांकि दोनों पक्ष समय-समय पर बातचीत की बात करते रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में बड़ा बदलाव नहीं दिखा।

कूटनीति की राह अब भी कठिन

विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध जितना लंबा खिंचता है, समाधान उतना जटिल होता जाता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय शांति वार्ता की अपील कर रहा है, लेकिन भरोसे की कमी और परस्पर आरोप-प्रत्यारोप प्रक्रिया को धीमा कर रहे हैं।

चार साल बाद भी स्थिति अनिश्चित बनी हुई है। एक ओर यूक्रेन अपनी संप्रभुता की रक्षा की बात कर रहा है, तो दूसरी ओर रूस अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता बता रहा है। ऐसे में स्थायी समाधान के लिए व्यापक कूटनीतिक प्रयासों और आपसी विश्वास की आवश्यकता होगी।

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