ArifMohammadKhan – बिहार में 14 माह का शांत कार्यकाल, नए राज्यपाल से बदली व्यवस्था
ArifMohammadKhan – बिहार के राज्यपाल रहे आरिफ मोहम्मद खान का कार्यकाल हाल ही में समाप्त हो गया, जिसके साथ राज्य में राजभवन की जिम्मेदारी नए हाथों में चली गई है। उन्होंने 2 जनवरी 2025 को बिहार के 42वें राज्यपाल के रूप में पद की शपथ ली थी और लगभग एक वर्ष दो महीने तक इस पद पर रहे। कुल मिलाकर उनका कार्यकाल 428 दिनों का रहा। उन्होंने यह जिम्मेदारी राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर के बाद संभाली थी। हालांकि उनका कार्यकाल अपेक्षाकृत छोटा रहा, लेकिन इस दौरान उन्होंने प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर कई निर्देश जारी किए। खासकर विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक सत्र और परीक्षाओं को समय पर आयोजित करने को लेकर उन्होंने अधिकारियों को नियमित रूप से निर्देश दिए थे।

शिक्षा व्यवस्था पर दिया विशेष ध्यान
राज्यपाल के रूप में आरिफ मोहम्मद खान ने विश्वविद्यालयों की व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर दिया। उनके कार्यकाल में कई बार कुलपतियों और विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिए गए कि शैक्षणिक सत्र में देरी और परीक्षा परिणामों में होने वाली अनियमितताओं को खत्म किया जाए। उनका मानना था कि शिक्षा व्यवस्था में नियमितता छात्रों के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
हालांकि उनका कार्यकाल लगभग 14 महीनों का ही रहा, इसलिए इस अवधि में कोई बहुत बड़ा बदलाव या दीर्घकालिक परिणाम सामने आना संभव नहीं हो पाया। फिर भी विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली को लेकर उनकी सक्रियता लगातार चर्चा में रही।
सत्ता और विपक्ष दोनों से बनाए संतुलित संबंध
राज्यपाल बनने के बाद आरिफ मोहम्मद खान ने राज्य की विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के नेताओं से मुलाकात कर संवाद की शुरुआत की थी। उन्होंने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की कोशिश की। यही वजह रही कि उनके कार्यकाल के दौरान किसी बड़े राजनीतिक विवाद की स्थिति सामने नहीं आई।
सार्वजनिक कार्यक्रमों और विश्वविद्यालयों के आयोजनों में उनके भाषण भी चर्चा का विषय रहते थे। वे अक्सर केरल की संस्कृति और इतिहास के साथ-साथ बिहार की ऐतिहासिक विरासत का उल्लेख करते थे। अपने संबोधनों में वे कई बार धार्मिक और साहित्यिक ग्रंथों से उदाहरण भी देते थे, जिनमें महाभारत और रामचरितमानस की चौपाइयों का जिक्र शामिल रहा।
राजभवन में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन
बिहार में अपने कार्यकाल के दौरान आरिफ मोहम्मद खान ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों को भी बढ़ावा दिया। उन्होंने केरल में मनाए जाने वाले कुछ प्रमुख त्योहारों का आयोजन पटना स्थित राजभवन, यानी लोकभवन में भी कराया था। इन आयोजनों का उद्देश्य विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक परंपराओं को साझा करना और सांस्कृतिक संवाद को मजबूत करना बताया गया था।
हालांकि उनका कार्यकाल अपेक्षाकृत छोटा रहा, इसलिए उनके पद से हटाए जाने को लेकर राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं भी सामने आईं। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि छह वर्ष के कुल राज्यपाल कार्यकाल को पर्याप्त मानते हुए केंद्र ने प्रशासनिक फेरबदल किया है। वहीं कुछ लोगों ने इसे राज्य के चुनावी माहौल से भी जोड़कर देखा है।
पिछले दशक में बार-बार बदले राज्यपाल
बिहार में पिछले दस वर्षों के दौरान राज्यपाल पद पर कई बार बदलाव हुआ है। इस अवधि में सात अलग-अलग व्यक्तियों ने यह जिम्मेदारी संभाली है। हाल के वर्षों में राज्यपाल का औसत कार्यकाल लगभग डेढ़ से दो वर्ष के आसपास ही रहा है।
आरिफ मोहम्मद खान से पहले राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने फरवरी 2023 से जनवरी 2025 तक यह पद संभाला था। उनसे पहले फागू चौहान जुलाई 2019 से फरवरी 2023 तक राज्यपाल रहे। इसके अलावा लालजी टंडन, सत्यपाल मलिक, केशरी नाथ त्रिपाठी और रामनाथ कोविंद भी अलग-अलग समय पर बिहार के राज्यपाल रह चुके हैं।
नंदकिशोर यादव को नागालैंड का राज्यपाल बनने पर उत्साह
इसी नियुक्ति प्रक्रिया के तहत बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता नंदकिशोर यादव को नागालैंड का राज्यपाल बनाया गया है। यह घोषणा होते ही उनके समर्थकों में खुशी का माहौल देखने को मिला। देर रात सूचना मिलने के बाद बड़ी संख्या में समर्थक उनके आवास पर पहुंचकर उन्हें बधाई देने लगे।
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रभाकर मिश्र, विधायक रत्नेश कुशवाहा और पार्टी के सह कोषाध्यक्ष नितिन अभिषेक सहित कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं। जदयू और भाजपा के कई कार्यकर्ता भी इस मौके पर मौजूद रहे। राज्य के विभिन्न हिस्सों से भी लोगों ने उन्हें संदेश भेजकर नई पारी के लिए बधाई दी।



