ChildActor – मास्टर लड्डू की दर्दनाक कहानी, फिल्मों से उभरते सितारे का अंत
ChildActor – हिंदी सिनेमा में कई ऐसे बाल कलाकार हुए हैं जिन्होंने कम उम्र में ही अपनी अदाकारी से दर्शकों के दिलों में खास जगह बना ली। 1970 और 80 के दशक में फिल्मों में नजर आने वाले मास्टर लड्डू भी उन्हीं कलाकारों में से एक थे। मास्टर लड्डू का असली नाम इंद्रजीत सिंह था। अपनी मासूमियत और सहज अभिनय के कारण उन्होंने उस दौर के कई बड़े सितारों के साथ काम किया और दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हो गए। हालांकि उनका फिल्मी सफर जितना उम्मीदों से भरा था, उनका अंत उतना ही दुखद साबित हुआ।

बाल कलाकार के रूप में मिली पहचान
मास्टर लड्डू ने बहुत कम उम्र में फिल्मों में कदम रखा था। उस समय हिंदी फिल्मों में बाल कलाकारों की भूमिका काफी अहम मानी जाती थी और कई कहानियां बच्चों के किरदारों के इर्द-गिर्द भी लिखी जाती थीं। इंद्रजीत सिंह ने अपनी स्वाभाविक अभिनय शैली के कारण जल्दी ही फिल्म निर्माताओं का ध्यान आकर्षित कर लिया।
उन्हें 1976 में रिलीज हुई फिल्म दो अनजाने में देखा गया था, जिसमें उन्होंने अमिताभ बच्चन और रेखा के बेटे का किरदार निभाया था। इस फिल्म में उनके छोटे लेकिन प्रभावी अभिनय को दर्शकों ने पसंद किया। इसके बाद उन्हें लगातार कई फिल्मों में काम मिलने लगा और वे इंडस्ट्री में मास्टर लड्डू के नाम से पहचाने जाने लगे।
मिस्टर नटवरलाल से मिली खास लोकप्रियता
मास्टर लड्डू को असली पहचान 1979 में आई अमिताभ बच्चन की फिल्म मिस्टर नटवरलाल से मिली। इस फिल्म में उन्होंने अमिताभ बच्चन के बचपन का किरदार निभाया था। फिल्म का एक लोकप्रिय गीत और उसमें उनकी मासूम अदाकारी ने दर्शकों का दिल जीत लिया था।
फिल्म की सफलता के बाद मास्टर लड्डू की लोकप्रियता और बढ़ गई। उस समय कई निर्माता उन्हें अपनी फिल्मों में लेना चाहते थे। धीरे-धीरे उन्होंने हेमा मालिनी, धर्मेंद्र, जितेंद्र, संजय दत्त और माधुरी दीक्षित जैसे कलाकारों के साथ भी काम किया। कम उम्र में मिली इस पहचान ने उन्हें उस दौर के चर्चित बाल कलाकारों में शामिल कर दिया।
बड़े अभिनेता बनने की उम्मीद
फिल्मों में लगातार काम करने के कारण मास्टर लड्डू का नाम इंडस्ट्री में तेजी से उभर रहा था। कई लोगों को उम्मीद थी कि जैसे-जैसे वे बड़े होंगे, वे मुख्य अभिनेता के रूप में भी अपनी पहचान बना सकते हैं। उस समय यह माना जा रहा था कि आने वाले वर्षों में वे हिंदी सिनेमा में बड़े सितारे के रूप में सामने आ सकते हैं।
इसी दौरान वे अपनी पढ़ाई के साथ-साथ फिल्मी करियर की नई दिशा तय करने की तैयारी में थे। बताया जाता है कि वे जल्द ही मुख्य भूमिका में फिल्मों में नजर आने की योजना बना रहे थे। लेकिन इससे पहले ही उनके जीवन में एक ऐसी घटना घटी जिसने सब कुछ बदल दिया।
1989 में सामने आया हत्या का मामला
साल 1989 मास्टर लड्डू और उनके परिवार के लिए बेहद दुखद साबित हुआ। उस समय उनकी उम्र करीब 18 वर्ष थी। इसी दौरान मुंबई के अंधेरी इलाके में उनकी हत्या की खबर सामने आई, जिसने फिल्म जगत को भी चौंका दिया।
जांच के दौरान सामने आया कि कुछ लोगों ने उनका गला घोंटकर हत्या कर दी थी। इस मामले में तीन लोगों के शामिल होने की बात कही गई थी। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और आसपास के लोगों से पूछताछ की गई।
किराए के मकान को लेकर विवाद
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस घटना के पीछे मकान को लेकर चल रहा विवाद बताया गया। जानकारी के मुताबिक मास्टर लड्डू के पिता भगवंत एस आनंद और मकान मालिक के बीच किराए और फ्लैट खाली करने को लेकर मतभेद चल रहा था। बताया जाता है कि कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने से पहले ही परिवार पर मकान खाली करने का दबाव बनाया जा रहा था।
इसी विवाद के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई और मामला हिंसक रूप ले बैठा। बाद में जांच के दौरान इस मामले में अहमद बाबाजान शेख का नाम सामने आया था। इस घटना ने उस समय फिल्म उद्योग को भी स्तब्ध कर दिया था।
आज भी याद किए जाते हैं मास्टर लड्डू
कम उम्र में ही कई फिल्मों में काम कर चुके मास्टर लड्डू को आज भी उनके निभाए गए किरदारों के लिए याद किया जाता है। उनकी मासूम अदाकारी ने उस दौर के दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई थी।
हालांकि उनका फिल्मी सफर बहुत लंबा नहीं रहा, लेकिन उन्होंने जिन फिल्मों में काम किया, उनमें उनका अभिनय लोगों को आज भी याद है। एक उभरते कलाकार की असमय मौत ने हिंदी सिनेमा के एक संभावित सितारे की कहानी अधूरी छोड़ दी।