अंतर्राष्ट्रीय

USChinaTalks – ट्रंप और जिनपिंग वार्ता में उठा ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ मुद्दा

USChinaTalks – अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बीजिंग में हुई उच्चस्तरीय बैठक ने वैश्विक राजनीति का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। दोनों नेताओं के बीच कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें ताइवान, व्यापार, वैश्विक स्थिरता और रणनीतिक संबंध प्रमुख रहे। इस दौरान शी जिनपिंग ने बातचीत में ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ का उल्लेख किया, जिसे अंतरराष्ट्रीय संबंधों के जानकार काफी महत्वपूर्ण मान रहे हैं।

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विशेषज्ञों के अनुसार, यह टिप्पणी सिर्फ एक ऐतिहासिक संदर्भ नहीं बल्कि अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा को लेकर दिया गया संकेत भी मानी जा रही है।

जिनपिंग ने सहयोग और स्थिरता पर दिया जोर

रिपोर्ट्स के मुताबिक, शी जिनपिंग ने ट्रंप से कहा कि दुनिया की दो बड़ी शक्तियों को टकराव के बजाय सहयोग का रास्ता तलाशना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या चीन और अमेरिका ऐसे मॉडल की ओर बढ़ सकते हैं, जिसमें प्रतिस्पर्धा के बावजूद स्थिरता और वैश्विक सहयोग कायम रखा जा सके।

चीन के राष्ट्रपति ने वैश्विक चुनौतियों से निपटने और मानवता के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनके बयान को दोनों देशों के रिश्तों में तनाव कम करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

क्या है ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ का अर्थ

‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ अंतरराष्ट्रीय राजनीति में इस्तेमाल होने वाला चर्चित सिद्धांत है। इसे हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ग्राहम एलिसन ने लोकप्रिय बनाया था। यह अवधारणा प्राचीन यूनानी इतिहासकार थ्यूसीडाइड्स के लेखन से प्रेरित है।

इतिहासकार थ्यूसीडाइड्स ने लगभग 2500 वर्ष पहले एथेंस और स्पार्टा के बीच हुए युद्ध का अध्ययन करते हुए लिखा था कि उभरती शक्ति के कारण स्थापित शक्ति में पैदा हुआ डर युद्ध का कारण बना। आधुनिक राजनीति में इस सिद्धांत का उपयोग तब किया जाता है, जब कोई नई ताकत मौजूदा वैश्विक शक्ति को चुनौती देती दिखाई देती है।

अमेरिका और चीन के रिश्तों में क्यों बढ़ी चिंता

विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और चीन के बीच मौजूदा हालात इस सिद्धांत से मेल खाते दिखाई देते हैं। पिछले कुछ दशकों में चीन ने आर्थिक, तकनीकी और सैन्य क्षेत्रों में तेज प्रगति की है। विनिर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर और वैश्विक व्यापार जैसे क्षेत्रों में चीन की बढ़ती मौजूदगी को अमेरिका गंभीरता से देख रहा है।

इसी वजह से दोनों देशों के बीच व्यापार शुल्क, तकनीकी प्रतिबंध, साइबर सुरक्षा, ताइवान और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को लेकर लगातार तनाव बना हुआ है। कई विशेषज्ञ इसे रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का नया दौर मानते हैं।

पहले भी कई बार कर चुके हैं जिक्र

शी जिनपिंग इससे पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ का उल्लेख कर चुके हैं। उनका लगातार यह संदेश रहा है कि यदि दोनों देश संवाद और सहयोग का रास्ता अपनाएं तो बड़े टकराव से बचा जा सकता है।

जानकारों का कहना है कि चीन इस तरह के बयानों के जरिए खुद को अमेरिका के बराबर वैश्विक शक्ति के रूप में प्रस्तुत करना चाहता है। वहीं अमेरिका भी एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपने प्रभाव को बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।

दुनिया की नजरें भविष्य के रिश्तों पर

अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका और चीन के संबंध आने वाले वर्षों में वैश्विक राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं। अगर दोनों देश प्रतिस्पर्धा के साथ संतुलन बनाए रखने में सफल रहते हैं, तो वैश्विक स्थिरता मजबूत हो सकती है। वहीं तनाव बढ़ने की स्थिति में इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर पड़ सकता है।

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